संकल्पों का क्रियान्वयन जरूरी

76वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से नौंवी बार ध्वजारोहण किया. इस मौके पर उन्होंने राष्ट्र को संबोधित भी किया. उन्होंने अपने संबोधन के जरिए देशवासियों में जोश और जज्बा जगाने की कोशिश की. प्रधानमंत्री के भाषण में भारत की विरासत से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों, यहां की एकता और अखंडता का भी जिक्र था.प्रधानमंत्री ने देश की विविधता पर गर्व करने की अपील की.अपने संबोधन के दौरान पीएम ने अगले 25 सालों के लिए पांच प्रण भी लिए. दरअसल प्रधानमंत्री के यह पांच प्राण यानी पांच संकल्प अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. यदि इन पर सरकार और जनता ने अमल किया तो हमारा देश निश्चित रूप से महाशक्ति बन सकता है. ये पंच प्रण हैं,

विकसित भारत,गुलामी से मुक्ति,विरासत पर गर्व,

एकता और एकजुटता,नागरिकों का कर्तव्य.इनमें में नागरिकों का कर्तव्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हम अक्सर अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहते हैं लेकिन कर्तव्य भूल जाते हैं. कर्तव्य निभाने से ना केवल हम अच्छे नागरिक बल्कि अच्छे इंसान बनते हैं. प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से महिलाओं के बारे में भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण कमजोरी की ओर हमारा ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में हम अक्सर ऐसे शब्द बोल जाते हैं जिससे महिलाओं का अपमान होता है. उनका यह कहना सही है कि महिलाओं को शक्ति देने से देश भी शक्तिशाली होगा. महिलाओं की स्थिति के बारे में प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य महत्वपूर्ण है और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद और परिवारवाद पर भी जमकर प्रहार किए. यह समस्याएं भी भारत को पीछे ले जाने वाली हैं. खास तौर पर भ्रष्टाचार के मामले में बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है. भ्रष्टाचार के कारण हमारी तमाम विकास की योजनाएं और जन कल्याणकारी कार्य आम जनता तक नहीं पहुंच पाते. इस कारण से भ्रष्टाचार से मुक्ति बहुत जरूरी है. भाई भतीजावाद और परिवारवाद का उल्लेख कर प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की है. उनके भाषण के इस संदर्भ पर विवाद भी हो रहा है .

राजनीति से परिवारवाद तभी समाप्त होगा जब जनता जागरूक होगी . कुल मिलाकर प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से देश के प्रगति की तस्वीर खींची और आने वाले भविष्य की रूपरेखा बताई. उन्होंने देश को एकजुट रहने और में जोश भरने का काम भी किया. इस दृष्टि से प्रधानमंत्री का लगभग डेढ़ घंटे का भाषण महत्वपूर्ण साबित हुआ है. अब सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि प्रधानमंत्री के भाषण के प्रत्येक बिंदु का जनता जनार्दन के बीच क्रियान्वयन हो . उन्होंने जिन 5 संकल्पों की चर्चा की है उनका क्रियात्मक पक्ष भी मजबूत रहे , इसकी भी योजनाएं धरातल पर बनाना होगी . तभी हम वास्तव में संकल्पों को जमीन पर उतार सकेंगे .

नव भारत न्यूज

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