तोमर और सिधिंया ने बनाई विजय की रणनीति

ग्वालियर: भाजपा के महापौर की सीट हारने के बाद लगातार अंचल के दोनों दिग्गज सिंधिया व नरेंद्र सिंह तोमर की साख पर सवाल खड़े होने लगे थे और यही वजह रही कि इन दोनों दिग्गज नेताओं के साथ-साथ पूरी भाजपा ने सभापति की सीट हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। सबसे पहले 34 नवनिर्वाचित पार्षदों को दिल्ली बुलाया, जहां पर पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सभी पार्षदों के साथ बैठक की और उसके बाद फिर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने बंगले पर सभी 34 पार्षदों के साथ मंथन किया।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर की साख को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे कि अगर भाजपा महापौर के बाद अब सभापति का सीट भी हार जाती है तो कहीं ना कहीं ग्वालियर -चंबल अंचल में भाजपा के लिए बुरा असर देखने को मिलता। यही कारण है कि सिंधिया और तोमर सभापति की सीट को हासिल करने के लिए मंथन और रणनीति बनाते रहे और आखिरकार उन्होंने सभापति की सीट को जीतकर अपनी साख बचा ली।

धोखा देने वाले तीन पार्षदों की खोज में जुटी भाजपा: ऐसा माना जा रहा है कि 3 निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा के सभापति प्रत्याशी मनोज तोमर को वोट नहीं दिया। यह पार्षद भाजपा के दल के साथ दिल्ली हरियाणा गये, फाइव स्टार रिसोर्ट में रूके लेकिन अंतरात्मा की आवाज पर कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मी सुरेश गुर्जर को वोट दिया। भाजपा नेता पुख्ता तौर पर तलाश कर रहे है कि यह वोट न देने वाले पार्षद भाजपा के या निर्दलीय । संगठन को यह भी अंदेशा है कि कहीं 3 निर्दलीयों ने तो वोट भाजपा को दे दिये हैं और कहीं भाजपा के 3 पार्षद गडबड तो नहीं कर गये। अब संगठन पार्षदों से कसम उठवाने की तैयारी में है। भाजपा को सभापति चुनाव में 37 पार्षदों के वोट मिलने का विश्वास था।

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