सभापति की कुर्सी कब्जाने हर दांव चला कांग्रेस-भाजपा ने

दिल्ली से आज तड़के लौटने के बाद भाजपा पार्षदों को होटल आदित्याज में रखा गया, ओरछा से लौटने के बाद कांग्रेस पार्षदों की भी बाड़ाबन्दी, आज एक साथ पहुंचेंगे मतदान करने
ग्वालियर: ग्वालियर नगर निगम के सभापति की कुर्सी पर काबिज होने के लिए भाजपा और कांग्रेस, दोनों तरफ से प्रयास अब निर्णायक दौर में पहुँच गए हैं। महापौर के बाद ग्वालियर निगम में दूसरे नम्बर की इस कुर्सी को ऐन केन प्रकारेण हासिल करने दोनों पार्टियों ने पूरा जोर लगा दिया है। दिल्ली से आज शुक्रवार को तड़के लौटने के बाद सभी भाजपा पार्षदों को भिंड रोड स्थित होटल आदित्याज में रखा गया है। ये पार्षद सुबह 10 बजे मतदान में शामिल होंगे। आज देर रात ओरछा से लौटे कांग्रेस पार्षदों की भी बाड़ाबन्दी की गई है।

आज 5 अगस्त को ग्वालियर निगम के सभापति का चुनाव होना है। दोनों ही पार्टियों ने अपने पार्षदों को दो दिन तक शहर के बाहर रखा। भाजपा ने जहाँ अपने पार्षदों को हरियाणा के फाइव स्टार रिजॉर्ट में रखा, वहीं कांग्रेस ने अपने खेमे के पार्षदों को ओरछा के अमर पैलेस होटल में रखा। भाजपा ने अपने शिविर में ३९ एवं कांग्रेस ने ३० पार्षद होने का दावा किया है जबकि कुल पार्षद ६६ ही हैं।
कांग्रेस के पार्षद आज रात ओरछा से वापस लौट आये हैं। अब इन्हें कल सुबह सभापति पद के लिए मतदान होने तक भाजपा की नजरों से दूर सुरक्षित स्थल पर रखा गया है। महापौर शोभा सिकरवार, विधायक सतीश सिंह, प्रवीण पाठक, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष डाॅ. देवेंद्र शर्मा एवं प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा भी अलग गाड़ी में न चलते हुए पार्षदों की वीडियोकोच से ही वापस ग्वालियर आए। ये नेता एक – एक पार्षद से सीधा समन्वय बनाए हुए हैं।

उधर भाजपा ने अपने पार्षदों की हरियाणा के रिवाड़ी में हंस रिजॉर्ट में बाड़ेबंदी की थी। यहां 37 पार्षदों को ठहराया गया था। यह सभी पार्षद भी आज ५ अगस्त को तड़के वापस ग्वालियर लौटे। इन्हें शहर के बाहर होटल आदित्याज में रखा गया है। होटल सख्त सुरक्षा घेरे में है। इनके आज सुबह एक साथ मतदान के लिए जलविहार पहुँचने की उम्मीद है। दिल्ली में ये भाजपा व निर्दलीय पार्षद केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेन्द्र सिंह तोमर से मिलकर लौटे हैं। यह सभी पार्षद गुरुवार शाम को एक साथ बस में ग्वालियर के लिए रवाना हुए।
भाजपा जिला अध्यक्ष कमल माखजनी ने देर रात नवभारत से कहा कि उनके पास पूर्ण बहुमत के साथ ३८ पार्षद हैं, इनके अलावा चार और का समर्थन है। ग्वालियर में उनका ही सभापति होगा। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने अपने पार्षदों को एक तरह से किडनैप किया हुआ है। कांग्रेस नेताओं ने उनके फोन तक छीन लिए। रेवाड़ी के रिजॉर्ट में भाजपा पार्षदों को ठहराने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे तो यहां थकान दूर करने के लिए ठहरे हैं। बहुमत उनके हक में है, इसलिए उन्हें कोई चिंता नहीं है।

नवभारत ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष डाॅ. देवेंद्र शर्मा से भी इस मसले पर बात की। उन्होंने दावा किया कि अभी उनके साथ ३० पार्षद हैं, इनके अलावा कई ऐसे पार्षद भी हैं, जिनका हमे समर्थन है। सभापति के चुनाव में जब मतदान होगा, तब यह नाम भी खुलकर सामने आ जाएंगे। नम्बर के खेल में भाजपा की बढ़त को देखते हुए कांग्रेस ने उम्मीद लगा रखी है कि भाजपा के कुछ पार्षद उनके पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। सभापति पद की उम्मीदवारी के लिए भाजपा में मूल खेमे के मनोज तोमर, सिंधिया खेमे के अनिल सांखला और हरी पाल के नाम चर्चा में हैं। इनमें अनिल सांखला की ज्यादा उम्मीद बताई जा रही है, हालांकि हरी पाल या मनोज तोमर के लिए भी लॉबिंग चल रही है। वहीं कांग्रेस में अवधेश कौरव, उपासना संजय यादव अथवा विनोद माठू में से कोई चेहरा उभरकर सामने आ सकता है। वैसे दोनों तरफ करीब – करीब नाम तय हैं लेकिन अंतिम खुलाशा कल मतदान से पहले की तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए ही किया जाएगा।
नरेंद्र सिंह के बंगले पर पार्षदों को दिए गए टिप्सनिगम सभापति चुनाव को लेकर दिल्ली में बीती आधी रात केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बंगले पर ग्वालियर भाजपा पार्षद दल के साथ बैठक हुई।

इससे पहले केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, सांसद विवेक शेजवलकर, प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट, ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, संगठन प्रभारी जीतू जिराती, जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी एवं पार्टी के सभी पार्षदों एवं पार्टी पदाधिकारियों के साथ भी मुलाकातो का दौर चला।सिंधिया खेमे के बजाए अपने मूल कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाने के पक्ष में भाजपा के नेताबताया जाता है कि अभी तक भाजपा किसी भी कीमत पर सभापति पद सिंधिया के किसी समर्थक को देने को तैयार नहीं है। भाजपा के पार्षदों से बातचीत का जिम्मा संसद विवेक नारायण शेजवलकर संभाल रहे हैं।

वे सबसे बात कर चुके है। सूत्रों की मानें तो अगर सिंधिया ज्यादा दबाव बनाते हैं तो तोमर -शेजवलकर पार्षदों से रायशुमारी कराने की बात कह सकते है। बीजेपी के 34 सदस्यों में सिंधिया समर्थकों की संख्या महज 12 है यानी बीजेपी के पास खालिस अपने 22 पार्षद हैं। इसीलिए ऊर्जा मंत्री अपनी संख्या बढ़ाने के लिए आनन -फानन में दो निर्दलीयों को लेकर रेवाड़ी पहुंचे।सूत्रों का कहना है कि बीजेपी अपने सभापति को बनाने के बदले सिंधिया समर्थकों को दो पद दे सकती है। सभापति के अलावा एक नेता प्रतिपक्ष का चयन होना है जो बीजेपी किसी सिंधिया समर्थक पार्षद को दे देगी। एक लेखा समिति का सदस्य बनना है और एक अपील समिति का प्रमुख। बीजेपी तीन में से कोई दो पद सिंधिया समर्थकों को सौंपने की पेशकश कर इस गतिरोध को खत्म करने की कोशिश करेगी।

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