संभागीय परियोजना यंत्री पीयूष अग्रवाल 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

खंडवा: जिले के संभागीय परियोजना यंत्री/कार्यपालन यंत्री,पीआईयू, लोक निर्माण विभाग में शुक्रवार को लोकायुक्त की कार्यवाही से हड़कंप मंच गया। यहां लोकायुक्त पुलिस इंदौर की टीम ने कार्यवाही करते हुए परियोजना क्रियान्वयन इकाई पीआईयू के संभागीय परियोजना यंत्री पीयूष अग्रवाल को 50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों उन्हीं के कार्यालय में गिरफ्तार किया।
लोकायुक्त पुलिस को फरियादी नितिन मिश्रा ने शिकायत की थी कि पीआईयू के संभागीय परियोजना यंत्री पीयूष अग्रवाल ने उनकी कंसलटेंसी का 10 लाख रुपए का बकाया बिल पास करने के एवज में रिश्वत मांगी थी।
ये है पूरा मामला
आवेदक नितिन मिश्रा,निवासी बाहेती कॉलोनी,सनावद, हाल निवासी खंडवा की कंसल्टेंसी फर्म है। आवेदक द्वारा खंडवा लोक निर्माण विभाग के पीआईयू का कंसल्टेंसी,डीपीआर तथा सुपरविजन कार्य किया गया था,जिसका कि विभाग के पास 10 लाख का बिल पेंडिंग था, जिसके लिए आरोपी पीआईयू के संभागीय परियोजना यंत्री पीयूष अग्रवाल बिल का भुगतान नहीं कर रहा था। उक्त बिल के भुगतान के एवज में आरोपी द्वारा 50,000 की रिश्वत की मांग की जा रही थी,जिसकी शिकायत आवेदक द्वारा लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में की गई।

शिकायत की प्रथम दृष्टया पुष्टि होने पर शुक्रवार लोकायुक्त इंदौर की टीम द्वारा पीआईयू कार्यालय खंडवा पहुँच कर आरोपी पीयूष अग्रवाल को 50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।लोकायुक्त की टीम इस कार्यवाही के बाद जिले सभी कार्यालयों में हलचल मच गई। इसके अलावा जिले के ज्यादा बजट वाले कार्यालयों में भी रिश्वत कांड को लेकर चर्चाओं का दौर दिन भर चलता रहा। आपको बता दे कि कुछ माह पूर्व ही जिला स्वास्थ्य अधिकारी को रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने पकड़ा था। अब पीआईयू विभाग के रिश्वत कांड से अन्य विभाग सतर्क हो गए हैं।
इनका कहना है
लोकायुक्त पुलिस के निरीक्षक विजय चौधरी ने बताया कि फरियादी नितिन मिश्रा ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि पीआईयू के संभागीय परियोजना यंत्री पीयूष अग्रवाल ने उनसे 50 हजार रुपए रिश्वत की मांग की है। शिकायत की तस्दीक करने के बाद तय योजना के अनुसार पीआईयू कार्यालय में संभागीय परियोजना यंत्री पीयूष अग्रवाल को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
खंडवा से क्यों इतना मोह?
बताया जा रहा है कि आय से अधिक संपत्ति को लेकर आने वाले दिनों में कार्यवाही जिले में हो सकती है। इस तरह की चर्चा चल रही है कि कुछ आम जनता से जुड़े हुए विभागों में बरसों से पदस्थ अधिकारी एवं कर्मचारी खंडवा का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। कुछ तो ऐसे है कि जिनका तबादला शासन ने कर दिया है उसके बाद भी वे अपने तबादले को रूकवाने में ऐड़ी चोटी का जोर लगा कर एक ही कुर्सी पर जमे रहने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे अधिकारी भी है जिनका तबादला हो चुका है वह फिर से खंडवा में पदस्थ होने की जुगाड़ में लगे हैं। वैसे देखा जाए तो जिले में एक दर्जन से अधिक शासकीय लोकसेवक तबादले के बाद फिर खंडवा आकर वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं। ऐसे अधिकारी व कर्मचारी के आलीशान मकान प्रशासनिक चर्चाओं में जगजाहिर है?

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