दस लाख टन कोयला जब्ती का मामला पकड़ा तूल

बढिय़ाई गंगा की तरह फैलता गया गोदावरी का काम
रेल रैक लाइजनिंग से सीआईएल में बनाई गहरी पैठ
कोयला व ऊर्जा मंत्रालय पहुंचा कोयला भंडारण का मामला

शक्तिनगर : एनसीएल परियोजना के कृष्णशिला रेलवे साइडिंग के समीपस्थ भंडारित तकरीबन दस लाख टन कोयले का मामला प्रशासन व यूपी शासन से होते हुए दिल्ली दरबार पहुंचने की चर्चा है। इस मामले में हर कोई यह जानना चाहता है कि चंद सालों में बढिय़ाई गंगा की तरह गोदावरी का कोयला कारोबार किन संस्थाओं के संरक्षण में और कैसे पसरा। इधर इस पूरे प्रकरण में जवाब तो दूर जिम्मेदार मुंह खोलने से भी बच रहे हैं। इस मामले को गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है कि ब्लैक डायमंड के इस खेल में कितने बड़े हाथ शामिल हैं। गोदावरी के तार पश्चिम बंगाल से जुडऩे से मामले में नया मोड़ आ गया है।

जानकारों की दलीलों को खारिज नहीं करें तो कोलकाता की इस कंपनी ने रेलवे में रोड कम रेल मोड आरसीआर की शुरुआत से कोयला कारोबार पर आधिपत्य स्थापित करना शुरू कर दिया।बताया जाता है कि कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनियों व रेलवे में पैठ के बाद गोदावरी ऊर्जांचल में आबाद एनसीएल में कायदे से साल 2016-17 में कदम रखा। कोल कंपनी रेेेलवे व रियायती कोयला हासिल करने वाले पावर प्रोजेक्टों के अधिकारियों का गठजोड़ गोदावरी के काम आया। इसी गठजोड़ के बदौलत एनसीएल की भूमि पर बिना अनुमति लाखों टन कोयला भंडारित किया और सबकुछ जानते हुए एनसीएल कोयला आपूर्ति करती रही और रेलवे कोयला संग छाई की ढुलाई करता रहा।

भंंडारण स्थल पर रेल रैक सेे मंगाई गई छाई चारकोल को मूूूल कोयले में मिलाकर रेल रैक से पावर प्लांटों को आपूर्ति की जाती रही और छाई मिलावट व गलत तरीके से एनसीएल हासिल सरप्लस कोयले का भंडार बढ़ता गया। ताज्जुब है कि यह सब एनसीएल, रेलवे व पावर प्लांटों के नुमाइंदों की मौजूदगी में हुआ। यही नहीं चारकोल मिले कोयले को खपाने के लिए आपूर्ति करने व खपाने वालों ने ऐसी कोल सैंपलिंग एजेंसी का चुनाव किया जो दोनों के मुफीद रिपोर्ट देती रहे। कोयला परिवहन में रेल रैक लाइजनिंग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है यह कार्य रेलवे ने पूरा किया। रेलवे ने रैक तो दिया ही एडीएम सहदेव मिश्रा की अगुवाई में पहुंची टीम की छापेमारी व भंडारण सील किए जाने के दूसरे दिन चारकोल लेकर पहुंची रैक को खाली भी कराया।

रोजाना सैकड़ों टन कोयला हो रहा राख में तब्दील
यदि सूत्रों की बातों पर भरोसा करें तो पिछले माह कृष्णशिला में कोयला भंडारण सील करने के साथ प्रशासन ने भंडारण का स्वामित्व साबित करने के लिए सप्ताह भर का वक्त दिया था। इस मियाद के बीत जाने के बाद कोई सामने नहीं आया। इससे कोयले के बड़े खेल की कहानी को बल मिला। बताया जा रहा है कि जमा लाखों टन के भंडारण में आग लगी है और रोजाना सैकड़ों टन कोयला राख हो रहा है।

अंतर्राज्यीय सिंडीकेट में बीएन गु्रप का नाम चर्चा में
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कृष्णशिला तक रेल रैक से पहुंचाई गई छाई के मामले में बबलू नेपाल बीएन का नाम सामने आया है। जांच में शामिल कुछ अधिकारियों की माने तो यह ग्रूप झारखंड से चारकोल रेल रैक से कृष्णशिला भिजवाने का काम करता रहा है। बबलू नामक व्यक्ति ऊर्जाधानी में व्यवस्था संभाल रहा था, जबकि नेपाल झारखंड के रामगढ़ बरकाकाना में। वहीं अब सूत्र बता रहे हैं की अब यह दोनों ब्लैक डायमंड के कारोबारी भूमिगत बताए जा रहे हैं।

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