समावेशी और स्वस्थ आर्थिक वृद्धि के लिए आयकर दरों में की जाए कमी: संजीव बजाज

बेंगलुरू,  (वार्ता) भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष संजीव बजाज ने कहा है कि सरकार को आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के क्रम में व्यक्तिगत आयकर की दरों में कमी पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा है कि इस कदम से लोगों की थैली में खर्च करने योग्य आय बढ़ेगी और मांग चक्र को पुन: तेज करने में मदद मिलेगी।

भारत को वर्ष 2047 तक 40 हजार अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य तक ले जाने में उद्योग और सीआईआई की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सीआईआई का मानना ​​था कि उद्योग और सीआईआई मिल कर इस दिशा में खुद भी बहुत कुछ कर सकते हैं।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति में श्री बजाज के हवाले से कहा गया है कि सरकार को इस दिशा में काम करना चाहिए कि भारत की शेयर बाजार में बड़ी हैसियत रखने वाली कुछ कंपनियों को मोर्गन स्टैनले कैपिटल इंटरनेशनल (एमएससीआई) और फाइनेंशियल टाइम्स स्टॉक एक्सचेंज ( एफटीएसई) जैसे सूचकांकों में स्थान मिल सके।
इसके साथ-साथ भारत को जेपी मॉर्गन के ग्लोबल इमर्जिंग-मार्केट बॉन्ड सूचकांक और बार्कलेज ग्लोबल बॉन्ड सूचकांक में भारत के प्रवेश के उपाय करने में तेजी लाना चाहिए।

उन्होंने सरकार को इंडिया मिलेनियल जैसे विशेष बॉन्ड्स के निर्गम भी लाने चाहिए जैसा कि वर्ष 2008 में किया गया था।

बजाज ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के विस्तार करने और इसके दायरे में और अधिक क्षेत्रों को लाने के महत्व पर बल देते हुए कहा कि विशेष रूप से वे श्रम गहन उद्योगों के क्षेत्र में भारत में विश्व प्रतिस्पर्धा की दृष्टि से मजबूत घरेलू उद्योग के विकास की संभावना है।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोलाइजर्स के लिए पीएलआई लाने से 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी और भारत हरित हाइड्रोजन का निर्यातक भी बन सकता है।

श्री बजाज ने विनियामकीय अनुमोदनों में गति और पारदर्शिता लाने और नए और मौजूदा उद्यमों की नियामकीय और अनुपालन लागत को कम करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तर की मंजूरी और अनुपालन की सुविधा को नए प्रस्तुत की गयी राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (न्यूज) पोर्टल पर लाया जाना चाहिए।

उन्होंने ढांचा परियोजनाओं के बेहतर नियोजन एवं निष्पादन के लिए सभी राज्यों को गतिशक्ति पहल के तहत जोड़ा जाना चाहिए।

बजाज ने ईंधन और बिजली पर लगने वाले सभी शुल्कों को जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यवस्था में लाए जाने पर भी बल दिया है।

बजाज ने जोर दिया कि परिस्थितिकी दृष्टि से स्वस्थ वृद्धि की अवधारणा को व्यवसाय और व्यापार की दृष्टि से एकीकृत किया जाना चाहिए और विनिर्माण क्षेत्र तथा बुनियादी ढांचा हरित होना चाहिए।

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