प्रेम जैन का नाम तय, जोशी को आश्वासन का झूला, तीसरे विकल्प के लिए बंटी का नाम

उपाध्यक्ष में अजा वर्ग से दिनेश सौराष्ट्रीय के नाम पर गंभीरता से विचार, असली पार्षदों को बुलाया भोपाल

शाजापुर: नगर पालिका अध्यक्ष चयन को लेकर अब भाजपा में गंभीर मंथन शुरू हो गया है. अध्यक्ष पद के दावेदार पूर्व नगर अध्यक्ष और पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पे्रम जैन प्रबल दावेदार हैं, जिन्हें संगठन से लगभग सहमति मिल चुकी है. तो वहीं जय शिव कांवड़ यात्री संघ के संयोजक संतोष जोशी को भी भाजपा नेताओं ने आश्वासन दिया है. वहीं इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि यदि अध्यक्ष पद के दोनों दावेदारों पर सहमति नहीं बनती है, तो महाराज भाजपा से बंटी कसेरा को भी अध्यक्ष के लिए चयन किया जा सकता है. क्योंकि बंटी कसेरा के नाम पर संतोष जोशी की भी सहमति बन सकती है. अब देखना यह है कि संगठन किसको अध्यक्ष पद के योग्य समझता है. वहीं दूसरी ओर आज असली पार्षद याने जिनकी पत्नियां चुनाव जीती हैं, उन्हें भोपाल ले जाया गया है.

क्योंकि पार्षदों के भ्रमण में पार्षद पति ही शामिल थे और असली पार्षद शाजापुर में ही थी. वहीं निर्दलीय पार्षद को भाजपा की सदस्यता दिलाकर भाजपा ने अपना अंक गणित मजबूत कर लिया है.गौरतलब है कि प्रदेश भाजपा मुख्यालय से ही अध्यक्ष पद का नाम तय होगा और हर दावेदार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग तरीके से खुद को अध्यक्ष बनने के लिए लॉबिंग में लगा हुआ है. नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष पे्रम जैन का नाम संगठन से लगभग तय है, बस उनके नाम पर मोहर लगना है. वहीं संतोष जोशी को भी अध्यक्ष के टिकट के लिए आश्वासन दिया गया है. लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अध्यक्ष चयन को लेकर भाजपा में तोड़-फोड़ ना हो, इसके लिए तीसरे विकल्प के तौर पर पैनल में महाराज भाजपा की ओर से बंटी कसेरा का नाम भी जोड़ा जा रहा है.

इसके पीछे राजनीतिक समझ यह है कि संतोष जोशी बंटी कसेरा के नाम पर अपनी सहमति दे सकते हैं, क्योंकि दोनों का 21 साल से कांवड़ यात्रा में गुरु-चेले का संबंध रहा है. अब देखना यह है कि यदि तीसरे विकल्प पर विचार किया जाता है, तो संतोष जोशी अपने चेले बंटी के नाम पर सहमति देते हैं या फिर वे खुद अध्यक्ष बनने के लिए अड़े रहते हैं. वहीं उपाध्यक्ष पद की बात करें, तो 28 साल बाद एक बार फिर अजा वर्ग से दिनेश सौराष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार हैं. यदि सामान्य वर्ग से अध्यक्ष का चयन होता है, तो उपाध्यक्ष पद पर ओबीसी या अजा वर्ग से ही बनना तय है. यदि तीसरे विकल्प में बंटी अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर होते हैं, तो फिर बंटी कसेरा उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदार बन सकते हैं.
प्रेम जैन के पास प्रशासनिक अनुभव, तो युवाओं की फौज जोशी के साथ...
एक दशक बाद शाजापुर नगर पालिका अध्यक्ष अनारक्षित सीट हुई है. दोनों ही नेताओं का राजनीतिक भविष्य भी इस बार के चुनाव पर टिका हुआ है. क्योंकि अगली बार अध्यक्ष पद अनारक्षित नहीं होगा, यह तय है. और अधिकांश पार्षदों का भी भविष्य इसी परिषद पर टिका हुआ है, क्योंकि जो पार्षद चुनकर गए हैं,उनके वार्ड अगले आरक्षण में क्या होते हैं, उन्हें भी नहीं पता है. इसलिए पार्षद भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उन्हें उपाध्यक्ष या पीआईसी में शामिल किया जाए. बात करें प्रेम जैन की, तो प्रेम जैन संगठन के पूर्व नगर अध्यक्ष हैं और नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष के साथ-साथ प्रशासनिक समिति में भी वे नगर पालिका को संचालित कर चुके हैं.

उन्हें नगर पालिका संचालित करने का प्रशासनिक अनुभव है. वहीं वरिष्ठ भाजपाई और संगठन प्रेम जैन के साथ नजर आ रहा है. तो वहीं संतोष जोशी की बात करें, तो वे भाजपा की राजनीति में भाजपा जिला उपाध्यक्ष, बजरंग दल संयोजक और हिंदुत्व के तौर पर उन्होंने अपनी पहचान बनाई. शाजापुर शहर के साथ युवाओं में उनकी गहरी पैठ है. राजनीतिक आकाओं की बात करें, तो प्रेम जैन के साथ भाजपा के तपन भौमिक, पारस जैन और कई वरिष्ठ भाजपाईयों का साथ है. वहीं संतोष जोशी कैलाश विजयवर्गीय, अरविंद मेनन के कट्टर समर्थक हैं. और शाजापुर की राजनीति में पूर्व विधायक अरुण भीमावद और प्रदीप चंद्रवंशी के नजदीक माने जाते हैं.
महाराज भाजपा से बंटी का नाम तीसरे विकल्प के रूप में…
अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के बाद यदि सहमति नहीं बनती है, तो महाराज भाजपा के सबसे नजदीक माने जाने वाले बंटी कसेरा तीसरे विकल्प के रूप में आ सकते हैं लेकिन बंटी कसेरा को लेकर पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष प्रदीप चंद्रवंशी की भी भौंहे तन सकती हैं. क्योंकि उनके कार्यकाल में बंटी कसेरा और प्रदीप चंद्रवंशी की नगर पालिका में केर और बेर जैसा संग था. यहां तक किभ्रष्टाचार के मामले में बंटी कसेरा ने सभापति होते हुए धरना भी दिया था. इसके बाद पूर्व नपाध्यक्ष प्रदीप चंद्रवंशी ने बंटी कसेरा को पीआईसी से हटा दिया था. बंटी कसेरा के नाम पर यदि विचार होता है, तो इससे संगठन को इस बात की उम्मीद रहेगी कि संतोष जोशी भी अपनी सहमति दे सकते हैं. अब देखना यह है कि यदि सभी पार्षदों की सहमति एकसाथ रही, तो प्रेम जैन का अध्यक्ष बनना लगभग तय है.
संकट जोशी के सामने, तो दिक्कत में प्रेम भी है…
राजनीति में कब क्या हो जाए, कह नहीं सकते हैं. यदि प्रेम जैन को भाजपा अध्यक्ष का टिकट देती है, तो संतोष जोशी को किस पद से संतुष्ट किया जाएगा, क्योंकि अध्यक्ष भी सामान्य वर्ग का और उपाध्यक्ष भी सामान्य वर्ग का बनाने से भाजपा का ओबीसी और अजा वर्ग नाराज होने का डर है. याने उपाध्यक्ष पद पर तो ओबीसी या अजा वर्ग का ही चेहरा होगा. और जोशी को यदि अध्यक्ष का टिकट नहीं मिलता है, तो उन्हें केवल पीआईसी में जगह मिल सकती है. यदि संतोष जोशी को संगठन टिकट देता है, तो फिर प्रेम जैन के साथ यही स्थिति रहेगी. अब देखना यह है कि इस पसोपेश में संगठन कैसे नया रास्ता निकालता है. यदि बंटी कसेरा के नाम पर सहमति बनती है, तो भी उपाध्यक्ष को लेकर फिर जोशी और प्रेम जैन में आमना-सामना होगा. लेकिन एक बात तय है कि अध्यक्ष चयन को लेकर भाजपा फूंक-फूंककर कदम रख रही है, ताकि भाजपा पार्षदों में तोड़-फोड़ ना हो और नगरपालिका का बोर्ड बन जाए.
भाजपा पर महाराज भाजपा भारी
शाजापुर नगर पालिका में 29 वार्डों में से 6 वार्डों में महाराज भाजपा कोटे से टिकट मिले. जनपद हो, जिला पंचायत हो, सब उम्मीदवारों के चयन में महाराज भाजपा के प्रदेश मंत्री क्षितिज भट्ट का दखल देखने को मिला. टिकट चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक क्षितिज भट्ट फ्रंट पर और बाकी पदाधिकारी पीछे रहे. यदि क्षितिज भट्ट नगर पालिका अध्यक्ष के लिए महाराज भाजपा कोटे से बंटी कसेरा का नाम आगे बढ़ाते हैं, तो उनका यह दावा सब पर भारी पड़ सकता है. क्योंकि भाजपा की राजनीति में महाराज भाजपा पूरी भाजपा पर भारी नजर आ रही है. या यूं कहें कि पूरी भाजपा महाराज भाजपा के ही ईर्द-गिर्द देखने को मिल रही है. अब देखना यह है कि महाराज भाजपा से बंटी कसेरा का नाम आने के बाद क्या तीसरे विकल्प के रूप में कसेरा पर विचार होता है या नहीं?

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