चुनाव: कई जगहों पर इंडिया-बांग्लादेश जैसा मुकाबला

कई बड़े चेहरों की प्रतिष्ठा के साथ राजनीतिक कॅरियर भी दांव पर

मंदसौर: भारत और बांग्लादेश के बीच मैच में सबसे ज्यादा दबाव भारत पर होता है। इसका कारण है कमजोर टीम के सामने खेलने वाली मजबूत टीम को मैच जीतना ही होता है। यहां उसकी प्रतिष्ठा दांव पर होती है। नगरीय निकाय चुनावों में भी कई जगहों पर भारत बांग्लादेश मैच जैसी स्थिति है। यहां प्रतिष्ठा तो ठीक है, राजनीतिक कॅरियर भी दांव पर लगने जैसी स्थिति है। अगर मजबूत और बड़े चेहरे हार गए तो विस और लोस की टिकीट मांगने में यह हार सबसे बड़ा माईनस पाइंट रहेगी।

निकाय चुनाव के रण में इस बार जिले में कई बड़े चेहरों की प्रतिष्ठा दांव पर है। कही बहु तो कही पुत्रवधु के चुनाव परिणाम इन बड़े नेताओं की भविष्य की राजनीति दिशा को तय करेंगे। पूर्व मंत्री से लेकर पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष के अलावा लोकसभा व विधानसभा चुनाव में टिकिट की दावेदार करने वाले कई चेहरें इस बार पार्षद के लिए चुनाव मैदान में है। तो वहीं मंडी से लेकर किसानों व ग्रामीण अंचल की राजनीति करने वाले चेहरें भी ओबीसी महिला होने के कारण इस बार निकाय चुनाव के रण में मैदान में उतरें है। पार्टी से टिकिट मिलने के बाद प्रचार भी शुरु कर दिया है लेकिन चुनाव परिणाम के साथ इन चेहरों का राजनीतिक कद भी तय होगा। मंदसौर में ऐसे नाम सबसे अधिक है तो मल्हारगढ़ से लेकर शामगढ़ व गरोठ में भी ऐसे चेहरें है।
गुर्जर-चांवला जैसे नाम अप्रत्यक्ष रूप मैदान में
नम्रता प्रीतेश चावला- पूर्व गृहमंत्री व भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश चावला की पुत्रवधु है। जो मंदसौर नपा चुनाव में वार्ड 1 से भाजपा प्रत्याशी है। वर्ष 2018 के चुनाव में नीमच जिले की मनासा विधानसभा से कैलाश चावला का पार्टी ने टिकिट काटा था। ऐसे में इस बार नपा चुनाव का परिणाम चावला की पिता-पुत्र की राजनीति का भविष्य तय करेगा। भाजपा से वार्ड 3 से रमा-बंशीलाल गुर्जर चुनाव लड़ रही है। इस वार्ड के चुनाव परिणाम से आने वाले समय में विधानसभा व लोकसभा चुनाव के भी समीकरण बदलेंगे। अब तक मंडी व किसानों से जुड़ी राजनीति करने वाले गुर्जर पहली बार निकाय की राजनीति में पांव रखा है। बंशीलाल गुर्जर वर्तमान में किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है और विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव के समय पिछले चुनावों में टिकिट की पैनल में भी नाम शामिल रहा है। ऐसे में इस वार्ड के चुनाव से दोनों चुनाव के समीकरणों पर असर पड़ेगा।
यहां राजनीतिक सफर तय करेंगी हार-जीत
भाजपा ने मंदसौर शहर के वार्ड 39 से भारती-धीरज पाटीदार को प्रत्याशी बनाया है। पाटीदार पूर्व में जिला पंचायत का चुनाव भी लड़ चुके है और धीरज पाटीदार वर्तमान में भाजपा के पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश मंत्री है। ऐसे में ओबीसी अध्यक्ष सीट को लेकर चुनाव मैदान में पाटीदार की साख भी दांव पर है और इस चुनाव के परिणाम उनके भविष्य की राजनीति तय करेंगे। इसी तरह से गरोठ में भाजपा ने वार्ड 9 से राजेश चौधरी को प्रत्याशी बनाकर मैदानमें उतारा है। जबकि चौधसरी पूर्व में नगर परिषद के अध्यक्ष रह चुके है और पूर्व में हुए गरेाठ विधानसभा के उपचुनाव में उन्होंने भाजपा से टिकिट भी मांगा था और वह टिकिट के दावेदार थे। ऐसे में अब जब वह पार्षद के रण में है तो चुनाव का परिणाम उनकी भविष्य की राजनीतिक भी तय करेगा।
यहां विधायक के दावेदार मैदान में
गरोठ में ही भाजपा ने वार्ड 11 से राजेश सेठिया को उम्मीदवार बनाया है। वर्तमान में वह भाजपा जिला उपाध्यक्ष है और विधायक के टिकिट के दावेदार रहे है। क्षेत्र की राजनीतिक करने वाले सेठिया इस बार पार्षद के चुनाव में उतरे है तो इस चुनाव का परिणाम राजनीति में उनका भविष्य तय करेगा। इसके अलावा शामगढ़ में कांग्रेस ने वार्ड 6 से सुनेना जायसवाल को प्रत्याशी बनाया है। सुनेना की सास संध्यादेवी जायसवाल दो बार नगर परिषद की अध्यक्ष रही है और पति सोनू जायसवाल ब्लॉक अध्यक्ष है। ऐसे में बहु का परिणाम इस बार पति व सास की भविष्य की राजनीति दिशा को तय करेगा।
पूर्व अध्यक्ष काला की प्रतिष्ठा भी दाव पर
शामगढ़ नगर परिषद की अध्यक्ष रही संतोषा काला के पति रमेश काला भाजपा के टिकिट पर इस बार वार्ड 4 से बीजेपी के प्रत्याशी है और पार्षद के चुनाव रण में है और उनका परिणाम भी काला की भविष्य की राजनीति को तय करेगा।
कर रहे रात दिन एक
अब जब प्रतिष्ठा और कॅरियर दाव पर लगा है तो वाजिब बात है कि इन बड़े नामों के प्रतिनिधियों के लिए जीत जरुरी है। ऐसे में हर नेता अपने समर्थकों के साथ रात दिन वार्ड में एक कर रहे हैं। लगातार लोगों से संपर्क किया जा रहा है। वही सोशल मीडिया पर भी एक्टिव दिख रहे हैं।

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