केन नदी एवं बीरा के खेतों से प्रतिदिन सैंकड़ों ट्रकों एवं ट्रेक्टरों हो रहा रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन

पन्ना :जिले की अजयगढ तहसील से निकली केन नदी तथा उसके आस पास के ग्रामो के खेतो मे वर्षो से रेत की अवैध खदाने संचालित हो रही है जिससे शासन को करोडो रूपये की रायल्टी का नुकसान हो रहा है उसके बावजूद प्रशासन द्वारा अवैध रेत खदानो पर कोई अंकुश नही लगाया जा रहा है। जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह सारा खेल खनिज, राजस्व तथा पुलिस की मिली भगत से चल रहा है। बिना रायल्टी के दिन रात डम्फर तथा ट्रेक्टर पूरे क्षेत्र मे रेत से भरे हुए दौड रहें है। वर्तमान समय मे बीरा के आसपास क्षेत्रो मे केन नदी की धार रोककर लिफ्टर एवं अत्याधुनिक जेसीबी, एलएनटी मशीनो से दिन रात अवैध उत्खनन एवं परिवहन लगभग 400 से 500 डम्फरों एवं ट्रकों के माध्यम से अवैध परिवहन एवं ओव्हरलोड परिवहन हो रहा है।

इसके अलावा खनन माफिया राजेंद्र द्वारा बीरा के एक कोरी के खेत से दिन रात लगभग 200 ट्रेक्टरों के माध्यम से अजयगढ़ एवं पन्ना रेत का अवैध खनन एवं परिवहन करवा रहा है। बाईपास में लगे कैमरे शोपीस साबित हो रहे हैं। यदि वास्तव में निगरानी के लिए कैमरे लगाये गये हैं तो स्वेमेव देखा जा रहा है कि दिन रात सैंकड़ों ट्रकों एवं ट्रेक्टरों के माध्यम से बिना किसी पिटपास के अवैध परिवहन हो रहा है जिससे शासन को प्रतिमाह करोड़ों की राजस्व क्षति हो रही है यह कार्य कोई अभी से नहीं दिसंबर महीने से चल रहा है और लगभग 7 माह होने जा रहे हैं राजनैतिक एवं प्रशासनिक गठजोड के चलते कोई कार्यवाही नहीं हो रही है जिसमें खनिज राजस्व एवं पुलिस सहित राजनैतिक नेताओं सहित जनप्रतिनिधियों की हिस्सेदारी एवं सांठगांठ के चलते यह पूरा कारोबार बेरोक टोक चल रहा है। ओव्हरलोड तो इतना लगभग क्षमता से दोगुना अधिक ट्रक, डम्फर एवं ट्रेक्टर पटिया लगाकर रेत का अवैध परिवहन कर रहे हैं जिससे बीरा से लेकर अजयगढ़ मुख्य मार्ग तक की सड़क पूर्णतः समाप्त हो गई है जिसका खामियाजा वर्षा ऋतु में दर्जनों गांव वालों को भोगना पडेगा और पन्ना अजयगढ़ मार्ग भी बार बार मरम्मतीकरण के बावजूद जर्जर होता जा रहा है।

आखिर खनिज विभाग के सात बैरियर नाकें क्यों नहीं लगाये गयेः- सूत्रों से पता चला है कि हाल ही में खनिज विभाग के सात बैरियर अवैध परिवहन रोकने के लिए स्वीकृत हुए थे जो अजयगढ़ तहसील में लगाये जाने थे लेकिन पता चला था कि राजनैतिक एवं प्रशासनिक सांठगांठ के चलते खनन माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए बैरियर अभी तक नहीं लगाये गये क्योंकि यह जो दिन रात बेरोक टोक अवैध कारोबार चल रहा है उसमें अंकुश न लग पाये इसकी पुष्टि एवं रेत के इस अवैध कारोबार के संबंध में जिला खनिज अधिकारी को फोन लगाकर पूंछना चाहा आखिर ये बैरियर स्वीकृत हुए थे कि नहीं यदि स्वीकृत हैं तो क्यों नहीं लगाये गये इस पर अपनी आदत के अनुसार खनिज अधिकारी ने फोन उठाना उचित नहीं समझा। क्योंकि वे फोन प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं खनन माफियाओं के उठाते हैं। आम नागरिकों एवं पत्रकारों से उनको एलर्जी जैसी रहती है। ताकि कोई किसी प्रकार का जबाव ही न देना पडे। उनके व्हाट्एप पर भी मैसेज भेजकर उनका पक्ष जाना चाहा तो भी उन्होंने उसका कोई जबाव नहीं दिया।

खनिज विभाग की टीपी का स्थान लिया अवैध टोकन प्रणाली नेः- लगभग छः माह से अवैध उत्खननकर्ताओं, माफियाओं द्वारा अपने कार्य को सुगमता पूर्वक संचालित करने के लिए प्रशासनिक एवं राजनैतिक सांठगांठ करते हुए विशेष प्रकार के टोकन प्रिंट कराये गये हैं जो चर्चाओं में हैं अब टोकन है तो सब कुछ है तो कोई खनिज विभाग वैधानिक पिटपास की आवश्यकता नहीं समझी जा रही है। इस कारण प्रतिदिन लाखों रूपये की राजस्व क्षति शासन को हो रही है और प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं खनन माफिया मालामाल हो रहे हैं।

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