भाजपा का असमंजस और कांग्रेस की अन्तरकथाएँ……!!

सियासत

जैसा कि कहा जा रहा था कांग्रेस ने संजय शुक्ला के नाम का विधिवत ऐलान कर दिया। अब सामने भाजपा की ओर से कौन आएगा इसको लेकर अटकलों का दौर जारी है। इससे भाजपा में असमंजस बढ़ गया है। जीतू जिराती, मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़ को संभागीय चयन समिति में सदस्य बनाया गया है। आमतौर पर चयन समिति में उसी नेता को लिया जाता है जिसको टिकट नहीं देना होता है। यदि ऐसा हुआ तो रमेश मेंदोला, जीतू जिराती, मधु वर्मा और मालिनी गौड़ दौड़ से बाहर हो जाएंगे। हालांकि राजनीति में नियम सुविधानुसार बनाए और तोड़े जाते हैं, लेकिन फिलहाल यह माना जा रहा है कि संभागीय चयन समिति में शामिल नामों पर विचार नहीं होगा। ऐसे में महापौर पद के लिए सस्पेंस और7 गहरा गया है। भाजपा के विभिन्न फार्मूलों के कारण सुदर्शन गुप्ता भी दौड़ से बाहर हैं। कांग्रेस ने महापौर पद के लिए संजय शुक्ला को उम्मीदवार बनाकर ब्राह्मण कार्ड खेला है।

भाजपा में भी कहा जा रहा है कि संजय शुक्ला के जवाब में पार्टी भी किसी ब्राह्मण को लड़ाए। यदि ऐसा रहा तो भाजपा को संघ से उम्मीदवार इनसोर्स करने होंगे। संघ परिवार के जिन उम्मीदवारों की इन दिनों चर्चा है उनमें डॉ निशिकांत खरे और विकास दवे दोनों ही ब्राह्मण हैं। इनके अलावा विनीत नवाथे का भी नाम है। विनीत नवाथे संघ के मालवा प्रांत के सह कार्यवाह हैं। भाजपा के पास दमदार ब्राह्मण उम्मीदवार का टोटा है। ले देकर गोलू शुक्ला बचते हैं। दूसरी ओर कैलाश विजयवर्गीय के समर्थकों का मानना है कि महापौर पद के प्रत्याशी का अंतिम फैसला रमेश मेंदोला के पक्ष में ही होगा। रमेश मेंदोला’ से बेहतर भाजपा के पास कोई प्रत्याशी नहीं है। इसलिए तमाम नियम और फार्मूले धरे के धरे रह जाएंगे और रमेश दादा को टिकट मिलेगा।

महापौर टिकट वितरण में कमलनाथ समर्थक दो शक्तिशाली नेताओं को झटका लगा है। सज्जन सिंह वर्मा कमलनाथ खेमे में नंबर दो माने जाते थे। जबकि अरुण यादव का भी इन दिनों महत्व बढ़ गया था। पिछले दिनों यह खबर थी कि कमलनाथ ने खंडवा और बुरहानपुर के लिए अरुण यादव से नाम मांगे हैं। अरुण यादव ने नाम दिए लेकिन कांग्रेस समर्थित निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने जमकर लॉबिंग कर उन नामों को किनारे लगवाया और शहनाज़ अंसारी को टिकट मिल गया। इसी तरह खंडवा में भी अरुण यादव की ओर से 2 नाम गए थे लेकिन कमलनाथ ने आशा मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई। आशा मिश्रा भी अरुण यादव खेमे को पसंद हैं लेकिन वरीयता क्रम में आशा मिश्रा का नाम नीचे था। जाहिर है खंडवा लोकसभा क्षेत्र के दोनों नगर निगमों में अरुण यादव को एक तरह से झटका लगा है। दूसरी ओर सज्जन सिंह वर्मा और उनके समर्थक मनोज राजानी मुगालता पाले हुए थे कि देवास का फैसला उनके बाहर नहीं होगा लेकिन कमलनाथ ने यहां दिग्विजय सिंह समर्थक कविता रमेश व्यास को टिकट दिलवा दिया है।

यह पहली बार होगा जब देवास नगर निगम का फैसला सज्जन सिंह वर्मा की पसंद से नहीं हुआ। देवास जिले को सज्जन सिंह वर्मा अपना गढ़ मानते हैं। सोनकच्छ से वह 7 बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं(इनमें पांच जीते भी हैं)।7 जबकि देवास शाजापुर क्षेत्र से उन्होंने 2 लोकसभा चुनाव लड़े हैं जिनमें एक बार जीत हासिल की है। जाहिर है इंदौर के अलावा देवास जिला उनके लिए गृह क्षेत्र जैसा है। सज्जन वर्मा समर्थक को टिकट नहीं मिला इसका गम नहीं है लेकिन सज्जन वर्मा के समर्थकों को इस बात का गिला है कि टिकट दिग्विजय सिंह के खाते में गया जिनकी पटरी सज्जन सिंह वर्मा से बिल्कुल नहीं बैठती। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अरुण यादव और सज्जन सिंह वर्मा के इलाकों में उनके पसंद से टिकट नहीं दिए जाने का खामियाजा पार्टी को परिणामों में उठाना पड़ता है या नहीं। कांग्रेस में यह सभी जानते हैं कि अरुण यादव के बिना खंडवा और बुरहानपुर तथा सज्जन सिंह वर्मा के बिना देवास नगर निगम का चुनाव जीतना मुश्किल होगा। जाहिर है कांग्रेस ने टिकट वितरण तो आसानी से कर दिया लेकिन चुनाव जीताना बड़ी चुनौती साबित होगा।

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