देश की पहली राष्ट्रीय वायु क्रीड़ा नीति जारी की सिंधिया ने

नयी दिल्ली 07 जून (वार्ता) केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने देश की पहली राष्ट्रीय हवाई खेल नीति को आज यहां जारी किया जिसमें 11 प्रकार के हवाई खेलाें के लिए देश के विभिन्न स्थानों पर अलग अलग हवाई क्लस्टर समेत पूरा ईकोसिस्टम बनाने का प्रावधान किया गया है और इससे देश में पर्यटन, यात्रा, विनिर्माण और अवसंंरचना विकास को और बल मिलेगा।
श्री सिंधिया ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में इस नीति को जारी करते हुए कहा कि आज का दिन देश के नागर विमानन क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर है जब भारत में हवाई खेलों को बढ़ावा देने के लिए बहुत शोध एवं अध्ययन के बाद एक राष्ट्रीय वायुक्रीडा नीति को जारी किया जा रहा है। देश में इस समय करीब पांच हजार लोग हवाई खेलों से जुड़े हुए हैं और इससे करीब 80-100 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित होता है। नयी वायुक्रीड़ा नीति के बाद इस क्षेत्र में करीब एक लाख से अधिक लोगों को राेजगार मिलने और राजस्व 10 हजार करोड़ रुपए तक होने की संभावना है।
नागर विमानन मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में भारतीय वायु क्रीडा महासंघ का गठन किया जाएगा जो देश में हवाई खेलों की सर्वोच्च शासकीय निकाय होगा और इसमें 11 प्रकार के हवाई खेलों के राष्ट्रीय संघों का गठन करके उनके अध्यक्षों एवं सचिवों, भारतीय एयरो क्लब के सदस्यों, तीन विशेषज्ञों और सदस्य सचिव के रूप में नागर विमान मंत्रालय के संयुक्त सचिव सहित कुल 34 सदस्य महासंघ के प्रशासकीय मंडल में होंगे। इसके सदस्यों में चार सरकार एवं अन्य निजी क्षेत्र के होंगे।
श्री सिंधिया ने कहा कि जिन 11 प्रकार के हवाई खेलों को इस नीति में शामिल किया गया है उनमें एयरोबेटिक्स, एयरोमॉडलिंग एवं मॉडल रॉकेटरी, एमेच्योर बिल्ट एवं एक्सपेरीमेंटल एयरक्राफ्ट, एयर बैलूनिंग, ड्रोन, ग्लाइडिंग एवं पावर ग्लाइडिंग, हैंग ग्लाइडिंग एवं पावर्ड हैंग ग्लाइडिंग, पैराशूट (स्काईडाइविंग, बेस जम्पिंग एवं विंगसूट आदि), पैराग्लाइडिंग एवं पैरामोटरिंग (पावर्ड पैराशूट ट्राइक्स सहित), पावर्ड एयरक्राफ्ट (अल्ट्रालाइट, माइक्रोलाइट, एवं लाइट स्पोर्ट्स एयरक्राफ्ट आदि) तथा रोटरक्राफ्ट (ऑटोजाइरो सहित) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में इसमें और भी खेलों को उनकी लोकप्रियता के आधार पर जोड़ा जा सकेगा। इससे पर्यटन
उन्होंने कहा कि देश में हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, पूर्वोत्तर क्षेत्र में अनेक स्थानों पर अलग अलग हवाई खेलों के लिए आरक्षित वायु क्षेत्र या हवाई क्लस्टर बनाये जाएंगे जिनमें वायु यातायात नियंत्रक (एटीसी) की अनुमति से उनकी निगरानी में हवाई खेलों का आनंद लिया जा सकेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा में ग्लाइडिंग, राजस्थान के पुष्कर में हॉट एयर बैलूनिंग के लिए विकसित किया जाएगा। राज्य सरकारों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ मिल कर अवसंरचना विकास किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है जहां करीब 95 करोड़ लोगों की आयु 35 वर्ष से कम है। विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) अन्य शिक्षण संस्थानों, सशस्त्र सैन्य बलों, अर्द्धसैन्य बलों, पुलिस एवं आरक्षित पुलिस बलों के लोगों के बड़े पैमाने पर हवाई खेलों की ओर आकर्षित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक भारत को हवाई खेलों के क्षेत्र में शीर्ष स्थान वाला देश बनाने और देश में सुरक्षित, सस्ता एवं टिकाऊ वायुक्रीडा ईकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय हवाई खेल प्रतिस्पर्धाओं में भारत चोटी का देश बने और भारत स्वयं भी वर्ष 2023 में वैश्विक हवाई खेलों की प्रतियोगिता का आयोजन करे।
उन्होंने कहा कि अगले छह माह में भारतीय वायु क्रीडा महासंघ का संविधान बन जाएगा और उसके आधार पर विभिन्न संघों के संविधान बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश में हवाई खेल अभी असंगठित क्षेत्र के रूप में हैं। जब ये संगठित क्षेत्र के रूप में विकसित होगा तो भारत इस क्षेत्र में विश्व की सबसे मजबूत ताकत बन सकता है। उन्होंने कहा कि
हवाई खेलों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था के बारे में पूछे जाने पर श्री सिंधिया ने कहा कि देश में विभिन्न स्थानों पर हवाई खेलों के परिचालन एवं प्रशिक्षण देने वाली निजी संस्थाएं मौजूद हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय वायु क्रीड़ा महासंघ भारतीय वायुसेना सहित सशस्त्र सैन्य बलों, अर्द्धसैन्य बलों, पुलिस एवं आरक्षित पुलिस बलों के लोगों के साथ एनसीसी के सेवारत एवं सेवानिवृत्त लोगों को प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के कार्यक्रम से जोड़ेगा

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