विपक्ष भी उतरा मैदान में,पानी के लिए महिलाओं में आक्रोश

खंडवा: नगर निगम में अपनी भागीदारी के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों छटपटाने लगे हैं। जनता के वोटों के जरिये वे महापौर चुनने का अधिकार पार्षद बनकर चाह रहे हैं। लोगों को रिझाने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा उद्घाटन और शुभारंभ के साथ भूमिपूजन कर रही है।
कांग्रेस भी माथे पर चुनाव देखकर पानी का वाजिब मुद्दा लेकर सड़कों पर आक्रामक हो गई है। नगर निगम प्रांगण में युंकाइयों ने टब में पानी भरकर जल-सत्यागृह किया। कांग्रेस जनता को समझाने की कोशिश कर रही है कि जितनी बड़ी योजनाएं हैं। सब की सब अधूरी हैं। सबमें भाजपाईयों ने ठेकेदार बैठाकर पैसा हजम किया है। यह बात अलग है कि कोरोना की दूसरी लहर के समय जब इंसानों की मौत मुर्गियों की तरह हो रही थी, तब दोनों दलों के नेता कुर्सी की चिंता छोड़ जान बचाने के लिए दड़बों में घुस गए थे।
दोपहर भर हंगामा
कांग्रेसियों ने नगर निगम में दोपहर भर हंगामा किया। वे नर्मदा जल योजना और स्विमिंग पूल में हुए भ्रष्टाचार पर खफा थे। यूथ कांग्रेसियों ने पानी के टब में बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। शहजाद पंवार, मुल्लू राठौर ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपए की नर्मदा जल योजना लाने के बाद भी जनता पानी को तरस रही है। 4 करोड़ रुपए से बन रहे स्वीमिंग पूल का कई वर्षों से काम हो रहा है,लेकिन पूल में पानी नहीं आ पाया।
पैसा पूरा निकला-काम अधूरे
कांग्रेसियों ने एक दर्जन ऐसे मुद्दे गिनाए जो भाजपा के कार्यकाल में पैसा निकल जाने के बाद भी अधूरे ही हैं। बनते बनते ही इनकी लागत दुगुनी-तिगुनी हो गई। किसी पर भी कोई केस दर्ज नहीं हुआ। यदि किसी पंचायत के सरपंच या सचिव दस-बीस हजार की भी अनियमितता करते हैं, तो उन्हे धारा 40 का नोटिस देकर बाहर कर दिया जाता है। सचिव व सरपंच जेल की सजा तक भुगत रहे हैं। तो फिर इन चकरी वाली कुर्सियों पर बैठे जनप्रनिधियों को कैसे बख्श दिया जाता है? नर्मदा जल योजना में भी ऐसा ही हुआ है। पता नहीं सरकार पर कंपनी का कैसा दबाव है? कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि यह कंपनी किसी छद्म नाम से तो नहीं चल रही है?

गरजीं महिलाएं:पानी नहीं,तो वोट नहीं
एक तरफ सक्रियता दिखाने और चेहरा चमकाने की राजनीति निगम चुनाव के पहले दिन भर होती रही। वहीं, कुछ वास्तविक लोग भी पानी के संकट के चलते नगर निगम पहुंच गए। उन्होंने पानी के खाली बरतन भी बजाए। नगर निगम की अव्यवस्था को नींद से जगाने की कोशिश की। इन्होंने तो यहां तक कह दिया कि एक भी नेता को गलियों में नहीं घुसने देंगे। पानी दो नहीं तो वोट नहीं देंगे।
नगर निगम में सियाराम चौक से आई महिलाओं ने जमकर विरोध किया।
आयुक्त प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए। महिलाएं बच्चे बुजुर्ग हाथों में पानी की केन और बर्तन लेकर पहुंचे थे। आयुक्त से मिलना चाहते थे, लेकिन आयुक्त नहीं मिलीं। जिसके फलस्वरूप महिलाओं का गुस्सा तेज हो गया। नगर निगम के बाहर माहौल देखने लायक था।
पुलिस बुलाना पड़ी
मामला बिगड़ता देख निगम ने पुलिस बुला ली। सुरक्षा के लिए तुरंत पुलिस भी पहुंच गई। नारेबाजी के बाद महिलाएं चेतावनी देकर लौट गर्इं कि यदि पानी नहीं आता है, तो एक भी नेता को गलियों में नहीं घुसने देंगे। पानी दो नहीं तो वोट नहीं देंगे।
नेताओं को सुननी पड़ेगी
जैसे- नारे भी इस बार का नगर निगम चुनाव और पंचायत चुनाव स्थानीय मुद्दे देखने को मिलेंगे। लोग जमकर नेताओं को खरी-खोटी सुनाएंगे। यह चुनौती ही होगी कि खंडवा के सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेता स्थानीय मुद्दों को किस प्रकार सुलझाते हैं। पार्षद और महापौर बनने के लिए अभी से नेता तैयारी कर रहे हैं। पैंट-शर्ट से कुर्ते-पजामे पर नेता और समाजसेवी की भूमिका में दिखेंगे। यह बात अलग है कि पिछले चुनाव 2014 में हुए थे। सुभाष कोठारी का कार्यकाल बिना पानी निर्धन बस्तियों ने गुजारा। सड़कें तो इधर बनीं,उधर उखड़ी जैसे हालात थे? लोग यह भी कह रहे हैं कि भाजपा को जीतना है तो श्री कोठारी को माडल बनाकर जनसंपर्क करवाना चाहिए?

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