करोड़ों की पाइप लाइनें,फिर भी टैंकर के भरोसे अस्थाई व्यवस्था

खंडवा: शहर में पानी का संकट निगम हल नहीं कर पा रही है। करोड़ों रुपए के बजट आ रहे हैं। नगरीय निकाय चुनाव को देखकर भरपल्ले पानी की लाइनों के लिए पैसा स्वीकृत हो रहा है। अरबों की नर्मदा लाइन भंगार की श्रेणी में आ खड़ी हुई है। सुक्ता के लिए विधायक के 9 करोड़ भी क्या सार्थक हुए? इससे शहर को पानी पर्याप्त मिलना शुरू हो गया पता नहीं? अब 14 करोड़ की सुक्ता जलाशय से जसवाड़ी तक पाइप लाइन के खर्चे की कार्रवाई चल पड़ी है। मतलब साफ है कि अरबों रुपए खर्चने के बाद भी पैसा मिट्टी होता जा रहा है। खंडवा के लोगों के लिए निगम टाइम पास कर रही है कि कब जून आधा बीत जाए, और प्रकृति प्यास बुझा दे। हर साल यही होता आया है।

लाखों रुपए के टैंकर खरीदने की निविदा निकल रही है। इसका मतलब तय है कि नगर निगम व प्रशासन के पास पाइप लाइन से पानी वितरण का कोई स्थाई हल नहीं है। तो फिर करोड़ों रुपए खर्च करने का क्या मतलब?अब नई बैठक में कागजी निर्देश दौड़ाए जा रहे हैं। निगमायुक्त ने बैठक में कहा कि परिवहन कर टैंकरों से जल प्रदाय कार्य की अधिकारीगण करें। सी.एम. हेल्पलाइन में लंबित 547 शिकायतें लंबित हैं। इतना बड़ा आकड़ा सुलझ नहीं पा रहा है। जब मुख्यमंत्री की कड़क योजना जिसकी मानीटरिंग कलेक्टर करते हैं उसके ये हाल हंै, तो निगम का ढर्रा कैसा होगा? सहज अंदाज लगाया जा सकता है। निगमायुक्त कह रही हैं कि समाधान जनक रूप से निराकृत कराए जाने की जरूरत है।

इन मसलों की तो छोड़ें। पचासों कालोनी मर्जी के मुताबिक कट रही हैं। कलेक्टर ने चमकाया, तब अवैध कॉलोनाइजर्स के विरुद्ध पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की निगम तैयारी कर रही है। अधिनियम के प्रावधानों के तहत दिए गए 7 कॉलोनाइजर्स को नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं। अवैध कॉलोनी में बने निर्माणों को हटाने की राशि कॉलोनाइजर से ही वसूल की जाएगी। लेकिन लोगों को इंतजार है कि इन्हें हटाया कब जाएगा?

दूध तलाई स्थित चाट-चौपाटी की गंदगी तालाब में फेंकने से इलाका सड़ांध मार रहा है। निगम खंडवा को नंबर वन लाने के लिए पैसा लगा रही है। बिल पर बिल पास किये जा रहे हैं।नगर निगम खुद में फूली नहीं समा रही है। वह शहर के ऐसे सुदूर क्षेत्रों को चिन्हित कर उनमें जलप्रदाय की व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है, जहां पानी कम दबाव से पहुंचता है। ऐसे क्षेत्रों के लिए पेयजल वितरण का स्थाई समाधान करने की बात कर रही है। स्थाई समाधान क्या टैंकरों से पानी वितरण इस जमाने में भी टैंकरों से करके किया जा सकता है। फिर 35 लाख के टैंकर क्यों मंगवाए जा रहे हैं?

नव भारत न्यूज

Next Post

ओबीसी आरक्षण : दुविधा में फंस गए दोनों दल

Thu May 12 , 2022
ग्वालियर – चंबल डायरी  हरीश दुबे  देश की सबसे बड़ी अदालत द्वारा मप्र में ओबीसी आरक्षण के बिना ही पंचायत व निकाय चुनाव कराने का हुक्म देने एवं राज्य चुनाव आयोग द्वारा  इस हुक्म पर अमल की प्रतिबद्धता जताने के बाद भाजपा और कांग्रेस सहित सभी पार्टियां इलेक्शन मोड में […]