बलात्कार के आरोपी आरक्षक की डीएनए रिपोर्ट से छेड़छाड़

हाईकोर्ट के आदेश पर एडीजीपी, एसपी छिंदवाडा सहित अन्य पर गिरेगी गाज
जबलपुर:  बलात्कार के आरोपी आरक्षक की डीएनए रिपोर्ट में छेड़छाड़ किये जाने के मामले को हाईकोर्ट ने काफी सख्ती से लिया है। हाईकोर्ट के आदेश पर एडी जी पी व आई जी जबलपुर जोन उमेश जोगा, पुलिस अधीक्षक छिंदवाड़ा सहित अन्य के खिलाफ अगामी दो-तीन दिनों में गाज गिर सकती है।गौरतलब है कि बलात्कार के अरोप में गिरफ्तार छिंदबाड़ा में पदस्थ पुलिस आरक्षक अजय साहू ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका प्रस्तुत की थी।याचिका में गया था कि बलात्कार के आरोप में उसे नवम्बर 2021 में गिरफ्तार किया गया था। बलात्कार पीडि़ता का गर्भपात दिसम्बर 2021 को शासकीयअस्पताल में किया गया था।

याचिका में डीएनए रिपोर्ट निगेटिव आने का हवाला दिया गया था। न्यायालय में पेश की गयी फॉरेसिंक रिपोर्ट में कहा गया था कि फारमेलिग स्लाईन के भ्रूण का डीएनए भेजा गया था, सेम्पलहोने के कारण डीएनए नहीं हो सका। डीएनए के लिए नॉर्मल स्लाईन में सेम्पल भेजा जाना चाहिए था। सिविल सर्जन छिंदवाडा द्वारा पेश की गयी जानकारी में कहा गया था कि सेम्पल नॉर्मल स्लाईन में भेजा गया था। जिसके बाद न्यायालयने एडीजीपी व जबलपुर जोन के आईजी उमेश जोगा को जांच कर 10 दिनों रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिये थे।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि एडीजीपी द्वारा पेश की गयी रिपोर्ट में संबंधित दस व्यक्तियों के बयान का उल्लेख किया गया है। ओटी टैक्नीशियन ने अपने बयान में कहा था कि उसने भ्रूण के सेम्पल के लिए खाली कंटेनर दिया था। इसके बाद महिला डॉक्टर के कहने पर एनएस की 500 मिली की दो बोतल दी थी। महिला डॉक्टर ने कंटेनर में बॉटल का एनएस डालने के बाद चपड़ा सील सेम्पल पुलिस को दिया था। हाईकोर्ट ने रिपोर्ट का अवलोकन करने में पाया कि स्टॉफ नर्स ने अपने बयान में कहा था कि ओ टी टैक्नीशियन ने संभवत: गलती से नॉर्मल स्लाईन के बजाये फार मेलिंग स्लाईन दे दिया था।

स्टॉफ नर्स के बयान को जांच में नहीं लिया गया था। सिविल सर्जन द्वारा कहा गया था कि पिछले डेढ़ साल से प्रसूतिका विभाग को फॉरमेलिग स्लाईनआवंटित नहीं की गयी है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने 21 अप्रेल को पारित अपने आदेश में कहा था कि पुलिस आरक्षण को बचाने के लिए डीएनए रिपोर्ट से छेड़छाड़ किये जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। युगलपीठ ने अनुसूिचत जाति और अनुसूिचत जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनयम 1989 में पीडिता व गवाहों के प्रोटेक्शन के संबंध में नियम निर्धारित किये है। इसके तहत प्रदेश व जिला स्तरीय विजिलेंस व मॉनिटरिंग कमेटी गठन करने का प्रावधान है।

युगल पीठ ने आदेश जारी किये थे कि कमेटी इस संबंध में मुख्य सचिव को सूचित करे और वह 15 दिनों में एडीजीपी व आईजी जबलपुर जोन, पुलिस अधीक्षक छिंदवाड़ा, सिविल सर्जन सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफकार्यवाही करें। युगलपीठ ने अपने आदेष में कहा था कि इन अधिकारियों को स्थानांतरण दूरवर्ती इलाकों में करें। जिससे वह गवाहों को प्रभावित नहींकर सके। इसके साथ ही युगल पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि जांच सीबीआई को सौपने की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश की समय सीमा शीघ्र समाप्त होने वाली है। सम्भावना है कि इसी सप्ताह संबंधित अधिकारी.के खिलाफ सरकार कार्यवाही कर सकती है।

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