यूरिया खाद के साथ कम्पनी जबरन दे रही पेस्टीसाइड और सल्फर

न लेने पर यूरिया खाद देने से करते हैं मना, किसान भी परेशान

रीवा:  यूरिया खाद की मारामारी शुरू हो चुकी है, रीवा में दो दिन पूर्व यूरिया की रैक पहुंची. जिसमें 70 प्रतिशत सहकारी संस्थाओं को एवं 30 प्रतिशत प्राईवेट विक्रेताओं को वितरित करना है. चम्बल फर्टिलाइजर एण्ड केमिकल कम्पनी के अधिकारियों द्वारा निजी विके्रताओं एवं डीलरों पर दबाव बनाकर यूरिया खाद के साथ पेस्टीसाइड और सल्फर लेने के लिये मजबूर किया जा रहा है. अगर कोई डीलर या विक्रेता पेस्टीसाइड या सल्फर नही लेता तो उसे खाद देने में आनाकानी की जाती है. जब विक्रेता सल्फर और पेस्टीसाइड खाद के साथ लेता है तो किसानों को भी देता है. ऐसे में किसानों को खाद मंहगी पड़ती है.

खाद की आवश्यकता के चलते मजबूरी में किसान भी पेस्टीसाइड और सल्फर लेते है. अगर कम्पनियों द्वारा पेस्टीसाइड और सल्फर टैग कर जबरन न दिया जाय तो किसानों को मंहगी यूरिया से निजात मिल सकती है. प्राप्त जानकारी के अनुसार 23 अगस्त को 3069 मीट्रिकटन की रैक रीवा आई थी. जिसमें से 70 प्रतिशत सहकारी संस्थाओं को एवं 30 प्रतिशत प्राइवेट विक्रेताओं को जाना था. सूत्रों बताते हैं कि विपणन संघ ने सहकारी संस्थाओं की सूची यूरिया वितरण के लिये चम्बल कर्टिलाइजर एवं केमिकल कम्पनी के अधिकारी को दी थी, परन्तु चम्बल फर्टिलाइजर के अधिकारी द्वारा परिवहन रूट का बहाना बनाकर यूरिया परिवहन नही किया जा रहा है.

वहीं दूसरी तरफ चम्बर कर्टिलाइजर लि0 एण्ड केमिकल के रीवा में अधिकारी द्वय विकास गौतम व सुधीर गैदर द्वारा प्राइवेट विक्रेताओं को एक गाड़ी यूरिया के साथ लगभग 40 हजार से 50 हजार रूपये कीमत का पेस्टीसाइड और सल्फर लेना अनिवार्य करते है जो कि बाजार मूल्य से 10 प्रतिशत अधिक मंहगा पड़ता है. अधिकारियों द्वारा बोला जाता है कि पेस्टीसाइड और सल्फर नही लोगे तो यूरिया नही दी जायेगी. इस तरह से कम्पनी के अधिकारी प्राईवेट विक्रेताओं पर दबाव बनाया जाता है. इस संबंध में चंबल फर्टिलाइजर के अधिकारी विकास गौतम से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन बातचीत नही हो पाई.

कम्पनी द्वारा जबरन बनाया जाता है दबाव
कम्पनी द्वारा प्राईवेट विक्रेताओं को जबरन टैग कर दिये गये पेस्टीसाइड और सल्फर उत्पादों के कारण बाजार में किसानो को काफी मंहगे दामों पर यूरिया लेनी पड़ रही है. फर्टिलाइजर कम्पनियों की इस तरह की मनमानी के कारण किसान मंहगी यूरिया लेने के लिये बाध्य व मजबूर है. नाम न छापने की शर्त पर रीवा, सीधी, सतना व सिंगरौली के कई प्राईवेट विक्रेताओं द्वारा बताया गया है कि चम्बल फर्टिलाइजर कम्पनी के अधिकारी विकास गौतम व सुधीर गैदर द्वारा अनैतिक दबाव बनाकर यूरिया के एवज में टैग कर पेस्टीसाइड और सल्फर दिया जाता है. अगर फर्टिलाइजर कम्पनियों के द्वारा यह पेस्टीसाइड और सल्फर टैग कर जबरन न दिया जाय तो किसानों को मंहगी यूरिया से निजात मिल सकती है.

शिकायत करें होगी कार्यवाही: संयुक्त संचालक
संयुक्त संचालक कृषि के.एस नेताम से जब इस मामले पर चर्चा की गई तो उन्होने बताया कि ऐसा नही होना चाहिये. अगर कम्पनी के अधिकारी इस तरह कर रहे हैं तो डीलर एवं निजी विक्रेता इसकी शिकायत कलेक्टर एवं मेरे पास करें. निश्चित रूप से जांच कराकर कार्यवाही करेगें.

नव भारत न्यूज

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