मालवा निमाड़ की शांत फिजा को भड़काने की कोशिश

मालवा निमाड़ की डायरी

मिलिंद मुजूमदार

मालवा निमाड़ की तासीर आमतौर पर अमन की रही है। बहुत मुश्किल से ही यहां उपद्रव भड़कता है। ऐसा नहीं है कि इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक आबादी नहीं है। इंदौर, उज्जैन, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, खरगोन, धार सभी दूर पर्याप्त संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय रहता है। इसलिए गंगा जमुना संस्कृति की वास्तविक झलक मालवा निमाड़ अंचल में मिलती है। पिछले दिनों इस अंचल में ऐसी कुछ घटनाएं हुई जिससे लगा कि सुनियोजित तरीके से यहां की फिजां बिगड़ने की कोशिश की जा रही है। कुछ प्रतिबंधित संगठन माहौल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उज्जैन में कथित रूप से देश विरोधी नारे लगाने का मामला सामने आया। इसके बाद इंदौर में चूड़ी वाले के साथ भीड़ ने मारपीट की जिसे मॉब लिंचिंग कहां गया।

खंडवा में भी इसी तरह की घटना सामने आई है। पुलिस अपना काम कर रही है लेकिन सबसे दुर्भाग्यपूर्ण इस मामले को सियासी रंग देने की कोशिश है। दिग्विजय सिंह ने उज्जैन की घटना को गलत बताया और कहा कि वहां पाकिस्तान जिंदाबाद नहीं बल्कि काजी जिंदाबाद के नारे लगे। इस पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय,प्रदेश के गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कड़े बयान दिए। हिंदूवादी संगठनों ने भी आक्रोशित होकर बड़े प्रदर्शन किए। कुल मिला के सांप्रदायिक तनाव को गहराने की कोशिशें हुईं, लेकिन सौभाग्य से जनता ने इस तरह की कोशिशों को विफल कर दिया। दिग्विजय सिंह जैसे मुख्यमंत्री रहे नेताओं को संयमित रूप से बयान देना चाहिए और तथ्यों पर बात करनी चाहिए। भाजपा और संघ परिवार के संगठनों को भी संयम रखना चाहिए और किसी भी तरह की असुरक्षा भावना का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए क्योंकि केंद्र और प्रदेश दोनों जगह हिंदूवादी सत्ता में हैं।

खंडवा और जोबट के लिए गंभीर भाजपा

प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने खंडवा जबकि प्रदेश के चिकित्सा मंत्री विश्वास सारंग और रमेश मेंदोला ने जोबट के प्रवास किए। भाजपा ने खंडवा के मंडल और जिला स्तर के पदाधिकारियों, विधायकों और प्रभारियों को भोपाल में तलब किया और चुनाव के संबंध में फीडबैक लिया। इस बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, सह संगठन मंत्री हितानंद शर्मा ने करीब 4 घंटे तक बैठक कर सभी नेताओं से वन टू वन बातचीत की। भाजपा खंडवा में प्रत्याशी चयन के मामले में सभी पहलुओं पर विचार करना चाहती है। जोबट में भी उसके सामने प्रत्याशी चयन का संकट है। दमोह उपचुनाव हारने के बाद पार्टी किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहती। खंडवा लोकसभा में स्वर्गीय नंदू भैया के पुत्र हर्षवर्धन सिंह चौहान और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस के बीच टिकट को लेकर होड़ है। वैसे पार्टी के सूत्र बता रहे हैं कि प्रदेश के बड़े नेता हर्षवर्धन सिंह चौहान के पक्ष में हैं। आने वाले कुछ दिनों में इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

मालवा निमाड़ को आस

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ अभी दिल्ली से लौटे नहीं है। सोमवार को उन्होंने राहुल गांधी से चर्चा की है। लंबे अरसे बाद कमलनाथ राहुल गांधी से मिले हैं। कमलनाथ ने राहुल गांधी को मध्य प्रदेश की राजनीति के बारे में फीडबैक दिया है और प्रदेश कार्यकारिणी के गठन की अनुमति मांगी है। इसके पूर्व कमलनाथ कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिल चुके हैं। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश कांग्रेस का पुनर्गठन किया जाएगा। इस पुनर्गठन में मालवा निमाड़ अंचल को पर्याप्त महत्व दिया जाएगा। यहां से सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी, डॉक्टर विजय लक्ष्मी साधो, बाला, बच्चन उमंग सिंघार, सुरेंद्र सिंह हनी बघेल, रवि जोशी, संजय शुक्ला, विशाल पटेल, मीनाक्षी नटराजन,बटुक शंकर जोशी, हुकुम सिंह कराड़ा जैसे नेताओं को एडजस्ट किया जाएगा। कमलनाथ मालवा निमाड़ को महत्व दे रहे हैं। यहां से अर्चना जायसवाल को महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष की जवाबदारी दी गई है। जबकि विक्रांत भूरिया पहले से ही युवक कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मालवा निमाड़ के रास्ते ही सत्ता तक पहुंची थी। इसलिए कमलनाथ किस क्षेत्र को विशेष महत्व दे रहे हैं।

इंदौरी नेताओं को उपेक्षा का दर्द

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों में प्रदेश संयोजकों की नियुक्ति की और मोर्चा कार्यकारिणी के गठन को मंजूरी दी। इसमें साफ तौर पर इंदौर की उपेक्षा की गई है। महिला मोर्चा में इंदौर की किसी नेता को नहीं लिया गया। जबकि अल्पसंख्यक, किसान मोर्चा में कुछ लोगों को एडजस्ट किया गया है। इसी तरह प्रकोष्ठों में भी तीन या चार प्रकोष्ठ में इंदौर के नेताओं को संयोजक की जवाबदारी दी गई है। विधि प्रकोष्ठ में पूर्व उप महाधिवक्ता मनोज द्विवेदी को विधि प्रकोष्ठ, भाजयुमो के पूर्व महामंत्री और बजरंग दल के नेता रहे प्रदीप नायर को सांस्कृतिक प्रकोष्ठ में संयोजक और उद्योगपति योगेश मेहता को आर्थिक प्रकोष्ठ का संयोजक बनाया गया है। किसान मोर्चा में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रवि रावलिया को प्रदेश मंत्री की जवाबदारी दी गई है। इसी तरह अल्पसंख्यक मोर्चे में नासिर शाह को उपाध्यक्ष, नासिर खान तथा बबलू खान को प्रदेश मंत्री की जवाबदारी दी गई हैं। इन गिनी चुनी नियुक्तियों के अलावा इंदौर की स्पष्ट रूप से उपेक्षा की गई है।

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