इस्पात उत्पादन 50 करोड़ टन करने की रणनीति पर काम कर रही है सरकार : सिंह

नयी दिल्ली,  (वार्ता) केंद्रीय इस्पात मंत्री राम चंद्र प्रसाद सिंह ने इस्पात उत्पादन में उत्सर्जन को कम करने हाइड्रोजन जैसे ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों के उपयोग के महत्व पर बल देते हुए रविवार को कहा कि 2030 तक देश में इस्पात की स्थापित उत्पादन क्षमता को 30 टन और 2047 तक इसे 50 करोड़ टन तक पहुंचाने के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सरकार रणनीति बनाना कर चलना जरूरत है।

श्री सिंह ने कहा कि सरकार इस दिशा में हितधारकों के साथ काम कर रही है तथा निर्बाध, पारदर्शी और लचीली प्रक्रिया के साथ उद्योग जगत की मदद करने को प्रतिबद्ध है।

श्री सिंह राजधानी के विज्ञान भवन में इस्पात मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित सेकेंडरी इस्पात विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।इसका विषय “ इस्पात में भारत को आत्म-निर्भर बनाना- माध्यमिक इस्पात क्षेत्र की भूमिका” था।माध्यमिक या सेकेंडरी इस्पात पुराने लोहे के कबाड़ को गला कर बनाया गया इस्पात होता है।

इस सम्मेलन का आयोजन इस उद्योग में लगी इकाइयों कोइस्पात क्षेत्र की चुनौतियों पर अपने विचार साझा करने के लिए मंच प्रदान करना है।

इस एक दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए श्री सिंह ने कहा कि उद्योग से मिले सुझावों पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि निर्बाध, पारदर्शी और लचीली प्रक्रिया भारत सरकार का घोषित उद्देश्य है।
देश में इस्पात उद्योग ने 1991 में 2.2 करोड़ टन से बढ़कर 2021-22 में 12.0 करोड़ टन का उत्पादन कर के बड़ी प्रगति की है।

उन्होंने कहा कि 2030 तक 30 करोड़ टन और 2047 तक 50 करोड़ टन उत्पादन क्षमता के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि इसके लिए लौह अयस्क उत्पादन और अन्य आवश्यक कच्चे माल में वृद्धि के लिए उपयुक्त नीतिगत समर्थन के साथ उचित रणनीतिक दिशा की भी आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कम कार्बन उत्सर्नकारी प्रक्रिया से विनिर्मित हरित इस्पात के लिए काम करने की तत्काल आवश्यकता है और दिशा में प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन पर भी एक महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण दिया है।
श्री सिंह ने कहा कि इससे लौह और इस्पात उद्योग को बड़ा लाभ होगा क्योंकि कोयले की जगह हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जा सकता है और इस प्रकार कोयले के आयात पर हमारी निर्भरता भी कम होगी।

इस अवसर पर इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने अपने संबोधन में उद्योग जगत से अपनी आवश्यकताओं के बारे में मुखर होने और उद्योग के विचारों को इस विश्वास के साथ आगे रखने का आग्रह किया कि उनकी बात सुनी जाएगी और सरकार अपने देश में उद्योग के अनुकूल वातावरण स्थापित करने की दिशा में काम करेगी।
माध्यमिक इस्पात क्षेत्र अपने आप में एक विविध उद्योग है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से आए विचार सरकार के लिए नीति निर्देश निर्धारित करने में सहायक होंगे।

सम्मेलन में सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्यम (एमएसएमई ) मंत्रालय में राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा ने सरकार द्वारा एमएसएमई को दी जा रही विभिन्न सहायता की जानकारी दी।उन्होंने उद्योग को अपने सुझावों के साथ आगे आने का आह्वान किया जो सामान्य रूप से एमएसएमई क्षेत्र और विशेष रूप से इस्पात क्षेत्र को मजबूत कर सकते हैं।

भारत सरकार इस क्षेत्र के लिए 2047 के एक सपने पर की दिशा में काम कर रही है।इसकी कार्ययोजना के संबंधन में सभी सम्बद्ध हितधारकों की राय ली जा रही है।
सम्मेलन में इस्पात मंत्रालय सहित कोयला, खान, और एमएसएमई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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