हमीदिया में पीपीपी मोड में लगेगा लीनियर एक्सीलेटर

महंगी रेडियोथेरेपी से कैंसर मरीजों को मिलेगी राहत
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव, जल्द होगा टेंडर
नवभारत न्यूज भोपाल, – राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से जूझ रहे मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है. कैंसर से जूझ रहे मरीजों को अब निजी अस्पतालों में महंगी रेडियो थेरेपी कराने से राहत मिल सकेगी. चिकित्सा शिक्षा विभाग गांधी मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के 5 मेडिकल कॉलेजों में लीनियर एक्सीलेटर स्थापित करने जा रहा है. विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है.

कैबिनेट की मंजूरी के बाद टेंडर जारी किए जाएंगे. लगभग 1 साल में यह लीनियर एक्सीलेटर शुरू हो जाएंगे. भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में पीपीपी मोड पर मशीन लगेगी.
विभाग केवल जगह, बिजली और पानी देगा गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के साथ ही इंदौर और सागर के मेडिकल कॉलेज में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पीपीपी मोड पर लीनियर ए क्सीलेटर स्थापित किए जाएंगे, यहां चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से सिर्फ जगह, बिजली, पानी की सुविधा दी जाएगी. मशीनें लगने से लेकर उनके संचालन और संचाल और संधारण ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का काम निजी कंपनी को करना होगा.
हमीदिया में सबसे पुरानी कोबाल्ट मशीन 2 साल से बंद
डॉक्टरों के अनुसार हमीदिया अस्पताल में कैंसर मरीजों की रेडियोथैरेपी के लिए करीब 27 वर्ष पुरानी देश की सबसे प्राचीन कोबाल्ट 60 मशीन से काम चल रहा था. डॉक्टरों का कहना है कि मशीन काफ ी पुरानी होने के कारण इस के क लपुर्जे नहीं मिला पा रहे हैं. इसलिए जैसे तैसे मरम्मत कर इस से काम चलाया जा रहा था. सोर्स खत्म होने के बाद ये मशीन 2 साल पहले हमेशा के लिए बंद हो गई.
रोजाना 20 कैंसर मरीजों की सिकाई करती है या मशीन
हमीदिया अस्पताल में लगी कोबाल्ट मशीन से 2 साल पहले तक रोजाना 20 कैंसर मरीजों की सिकाई की जाती थी. इस मशीन के आउटडेटेड होने और महंगे सोर्स के कारण बंद हो गए यही नहीं ब्रेकिंग थेरेपी के बंद होने से पहले रोजाना चार पांच मरीजों की रेडियोथैरेपी भी की जाती थी. अब हालात ऐसे हैं कि 40 हजार से डेढ़ लाख तक खर्च करके मरीजों को शिकाई करानी पड़ रही है. लनियर एक्सीलरेटर से कैंसर की सिकाई की जाती है. यह सिकाई की अत्याधुनिक मशीन है. हमीदिया में मशीन नहीं होने से मरीजों को सिकाई के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है. यहां ब्रेकिंग थेरेपी मशीन भी 2 साल से बंद है. मशीन से सभी तरह के कैंसर की सिकाई प्रभावित हो रही है. इस मशीन का सोर्स क रीब 8 लाख मैं आता है जो 6 से 8 महीने तक चलता है कॉलेज के पास पर्याप्त बजट नहीं होने से इस वर्ष की खरीदी नहीं हो पा रही है. इस कारण मरीजों को परेशानी बढ़ी हुई है.
20 से 22 करोड़ में आएगी नई मशीन
डीएमई के अधिकारियों ने बताया कि एक लीनियर एक्सीलेटर की स्थापना 20 से 22 करोड़ का खर्च आएगा. पीपीपी मोड में यह खर्च कंपनी को वहन करना होगा. ग्वालियर और जबलपुर के मेडिकल क ॉलेज में विभाग खुद मशीनें खरीदकर स्टाल कराएगा. इसके बाद आउटसोर्स एजेंसी इसका संचालन और मेंटेनेंस का काम करेगी.

नव भारत न्यूज

Next Post

विश्वामित्र चोंगथम सहित तीन भारतीय मुक्केबाज सेमीफाइनल में

Sun Aug 22 , 2021
दुबई, 22 अगस्त (वार्ता) विश्व युवा चैंपियनशिप 2021 के कांस्य पदक विजेता विश्वामित्र चोंगथम (51 किग्रा) सहित अन्य तीन भारतीय मुक्केबाज सभी की उम्मीदों पर खरे उतरते हुए यहां शनिवार को एएसबीसी युवा एवं जूनियर मुक्केबाजी चैंपियनशिप के दूसरे दिन सेमीफाइनल में पहुंच गए। मणिपुर के युवा मुक्केबाज विश्वामित्र क्वार्टर […]