एम्स में सस्ती दवाओं के नाम पर मरीजों को लूट रहे

जन औषधि की जगह दूसरा विकल्प तलाशेगा एम्स
नवभारत न्यूज भोपाल,. राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में सस्ती दवाओं के नाम पर मरीजों को लूटा  जा रहा है. यहां मौजूद जनऔषधि केन्द्र में सस्ती दवाएं नहीं मिल रही, ऐसे में मरीजों को मजबूरन बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं. इसके  पीछे बड़ा गिरोह काम कर रहा है. एम्स डायरेक्टर डॉ. सरमन सिंह के पास इसकी कई शिकाएंते पहुंच चुकी हैं. उन्होंने भी इस बात की तस्दीक  भी की है. लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
तीन साल पहले शुरू हुआ जनऔषधि केन्द्र गौरतलब है कि जनऔषधिा केन्द्र तीन साल से एम्स भोपाल में काम कर रहा है. इसको लेकर कई बार शिकायत भी हो चुकी हैं, कि यहां सस्ती दवाओं की जगह महंगी दवाएं दी जाती हैं. गौरतलब है कि एम्स में हर रोज दो हजार से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं. कोरोना संक्रमण के चलते अस्पताल को कोविड अस्पताल में तबदील कर दिया गया था, जिस कारण काम काफ ी पिछड़ चुका था. जो अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है. इससे आम लोगों को काफ ी फ ायदा पहुंच रहा है. प्रायवेट वार्ड का चार्ज निजी से भी ज्यादा गौरतलब है कि एम्स में प्रायवेट वार्ड और डायलिसिस का शुल्क निजी अस्पतालों से भी ज्यादा है. यही कारण है कि अस्पताल का प्रायवेट वार्ड ज्यादातर खाली रहता है. दरअसल एम्स और हमीदिया में ज्यादातर गरीब मरीज ही इलाज के लिए पहुंचते हैं. एम्स डायरेक्टर का कहना है कि जब एम्स भोपाल की शुरुआत हुई थी तब यहां प्राइवेट वार्ड और अन्य उपचार का शुल्क दिल्ली एम्स के समान था. जल्द ही इसे कम कि या जाएगा.
एम्स डायरेक्टर को बनने की होड़ में कई डॉक्टर गौरतलब है कि एम्स के डायेरक्टर डॉ. सरमन सिंह नवंबर में सेवानिवृत्त हो रहे हैं. विभाग ने नए डॉयरेक्टर तलाशने के लिए विज्ञापन जारी कि या है. एम्स के अधीक्षक डॉ. मनीषा सहित एम्स के कुछ और डॉक्टरों नें डायरेक्टर बनने के लिए फार्म भारा है. इनके अलावा देश भर से कई आवेदन आए हैं.
वर्जन
शिकायत मिली है कि कुछ जन औषधि केन्द्र पर मरीजों को सस्ती दवाएं नहीं मिल रही हैं. इसको लेकर हम जल्द ही कार्रवाई करेंगे. जन

औषधि केन्द्र को बंद कर इसकी जगह दूसरा विकल्प पर भी काम किया जा रहा है. डॉ. सरमन सिंह, डॉयरेक्टर एम्स भोपाल

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