भगत के जाने से बदलेंगे राजनीतिक समीकरण

सियासत

अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत को संघ ने वापस बुला लिया है। नए संगठन महामंत्री की नियुक्ति होने तक मौजूदा सह संगठन मंत्री हितानंद शर्मा प्रभारी प्रदेश संगठन महामंत्री होंगे। सुहास भगत मूल रूप से इंदौर के ही हैं। यहीं उन्होंने इंजीनियरिंग की है। यहीं से 24 वर्ष की उम्र में भी संघ के प्रचारक बने। उन्हें पहले भोपाल में महानगर प्रचारक और बाद में भोपाल विभाग प्रचारक का दायित्व दिया गया। वे मध्य भारत प्रांत के सहप्रांत प्रचारक और प्रांत प्रचारक भी रहें। सुहास भगत ने भोपाल में स्वर्गीय अनिल माधव दवे के साथ काम किया है। उन्होंने प्रदेश में उम्र के प्रतिबंध का फार्मूला लागू किया जिसके फलस्वरूप 40 वर्ष तक मंडल अध्यक्ष और 50 वर्ष तक के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हुई।

इंदौर संभाग में भी भाजपा का चेहरा बदलने में उन्होंने महत्वपूर्ण काम किया। सुहास भगत सोशल इंजीनियरिंग के लिए भी जाने जाते हैं। गौरव रणदिवे के नगर भाजपा अध्यक्ष बनने में सुहास भगत का बड़ा योगदान रहा है। उनके कारण ही जयपाल सिंह चावड़ा करीब 5 वर्ष तक इंदौर के संभागीय संगठन मंत्री बने रहें। जयपाल सिंह चावड़ा को इंदौर विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष पद की नियुक्ति भी भगत के कारण ही मिली है। भाजपा नेताओं में कैलाश विजयवर्गीय व रमेश मेंदोला की सुहास भगत से अच्छी ट्यूनिंग रही है। उनकी भाजपा से विदाई के बाद इंदौर के राजनीतिक समीकरण बदलेंगे लेकिन सबसे ज्यादा असर जयपाल सिंह चावड़ा पर पड़ेगा। जयपाल सिंह चावड़ा को अब अपना नया सरपरस्त ढूंढना होगा। अब इंदौर के कार्यकर्ताओं को नए प्रदेश संगठन महामंत्री की नियुक्ति को लेकर उत्सुकता है।

सिंधिया और विजयवर्गीय की जुगलबंदी की चर्चा

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद को भाजपा में पूरी तरह से ढालने में लगे हुए हैं। उनकी कोशिश रहती है कि सभी नेताओं को साथ में लेकर चला जाए। इसलिए ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार भाजपा के सभी नेताओं से मिलने का प्रयत्न करते हैं। जब कांग्रेस में थे तो उनकी भाजपा में सुमित्रा ताई से पटरी बैठी थी। कहा तो यह भी जाता है कि क्रिकेट की राजनीति में सुमित्रा ताई के समर्थक हमेशा सिंधिया का साथ देते थे।कनमडीकर परिवार इसका उदाहरण है। पत्रकार और एमपीसीए के मौजूदा अध्यक्ष अभिलाष खांडेकर भी सुमित्रा ताई के नजदीक हैं। यह सभी जानते हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और कैलाश विजयवर्गीय एमपीसीए के चुनाव में आमने-सामने रह चुके हैं। एक समय दोनों में तीखी बयान बाजी होती थी लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्रीय मंत्री हैं तो कैलाश विजयवर्गीय भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं। खास बात यह है कि दोनों ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सहयोगी हैं। इस कारण से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहल करके कैलाश विजयवर्गीय की ओर अपना हाथ बढ़ाया है। कैलाश विजयवर्गीय ने भी उन्हें अनुकूल प्रतिक्रिया दी है। दोनों के बीच बने नए समीकरणों को इंदौर संभाग की क्रिकेट एसोसिएशन के कार्यक्रम में लोगों ने महसूस भी किया। इंदौर की राजनीति और क्रिकेट के लिए यह बहुत अच्छा है कि प्रदेश के दो दिग्गज आपस में एकजुट होकर क्रिकेट और इंदौर के विकास के बारे में विचार करें। खेल जगत ने इस खबर को हाथों हाथ लिया है।

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