शहर की सीमाएं बढ़ाने का फिर है मौका

निगम की सीमा विस्तार का पूर्व में भी शासन को जा चुका है प्रस्ताव, एक दर्जन पंचायतों को निगम में शामिल करने का हुआ था प्रयास

सागर . स्मार्ट सिटी में शामिल हो चुके सागर में पिछले समय से बजट तो पर्याप्त आ रहा है लेकिन निगम सीमा में शासकीय भूमि की अनुपलब्धता के चलते कई प्रोजेक्टों में काफी देरी हो रही है. करीब पांच वर्ष पूर्व निगम सीमा के विस्तार का प्रस्ताव निगम परिषद से पारित होकर शासन को गया था तो लेकिन मंजूर नहीं हुआ. अब जबकि निकाय चुनाव आगे बढ़ चुके है तो ऐसे में शहर की सीमाओं में विस्तार किया जा सकता है.
बुंदेलखंड की एकमात्र नगर निगम सागर को प्रदेश के मंत्री तक कस्बा या गांव बता चुके है. निगम की सीमाओं में विस्तार आखिरी बार करीब ढाई दशक पूर्व हुआ था. चार वर्ष पूर्व निगम को स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल कर लिया गया, जिसके तहत डेढ़ हजारा करोड़ रूपए के विकास कार्यों को स्वीकृति भी दी गई, लेकिन निगम प्रशासन के पास शासकीय भूमि की कमी के चलते कई अहम प्रोजेक्ट यहाँ या तो शुरू नहीं हो सके, कुछ शुरू हुए तो काफी देर से. निवृतमान निगम परिषद द्वारा करीब पांच वर्ष पूर्व निगम की सीमावृद्धि का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा गया था, जिसमें शहर से लगी हुई मकरोनिया, हफसिली, गढ़पहरा, कुड़ारी, रतौना, रजौआ, सिलेरा, सिरोंजा, पथरिया जाट, बदौना, बिहारीखेड़ा, मेनपानी सहित करीब एक दर्जन ग्राम पंचायतों को निगम सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव था. लेकिन स्थानीय राजनैतिक नेतृत्व की इच्छाशक्ति की कमी के चलते यह लंबित ही रहा, इसी दौरान शासन द्वारा मकरोनिया, रजाखेड़ी सहित पांच पंचायतों को मिलाकर मकरोनिया बुर्जुग नपा का गठन कर दिया गया. जिसके बाद निगम सीमा के विस्तार का मसला लगभग ठंडे बस्ते में चला गया.
हालांकि मकरोनिया नपा गठन के बाद भी तत्कालीन निगम नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद अजय परमार ने उन पांच पंचायतों को छोडक़र शेष पंचायतों को निगम सीमा में शामिल करने सरकार को पत्र लिखा लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.
बताया जाता है कि शहर की सीमाओं के विस्तार का निर्णय शासन निकाय चुनाव से करीब छह माह पूर्व तक कर लेती है. ऐसे में अब जबकि निकाय चुनाव अगले वर्ष तक के लिए टल चुके हैं, तो ऐसे में नगर निगम की सीमा विस्तार किया जा सकता है. लेकिन मामला फिर वहीं राजनैतिक इच्छाशक्ति पर आ टिकता है. हालांकि जानकारों का कहना है कि सीमा विस्तार के लिए चुनाव से छह माह पूर्व की डेडलाईन आवश्यक नहीं है. पिछले निकाय चुनाव से महज डेढ़ माह पूर्व ही जिले की ही खुरई नगर पालिका की सीमाओं का विस्तार हुआ था. जहाँ कुछ लगे हुए गांवों को नपा में शामिल किया गया था. क्षेत्रीय विधायक एवं केबिनेट मंत्री भूपेंद्र सिंह के विशेष प्रयासों से यह हो पाया था. एक बार फिर खुरई नपा की सीमाओंं का विस्तार किया जा रहा है. पिछले दिनों ही कुछ और पंचायतों को नपा में शामिल करने का प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा गया है.
मालूम हो कि वर्तमान में श्री सिंह नगरीय प्रशासन मंत्री है, ऐसे में अगर शहर के जनप्रतिनिधि और नेता मिलकर प्रयास करें तो शहर की सीमाओं में वृद्धि हो सकती है.

नव भारत न्यूज

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