इंदौर भाजपा में यह क्या चल रहा है ?

सियासत

इंदौर नगर भाजपा एक ऐसा रिकॉर्ड बनाने जा रही है जो कोई भी नगर अध्यक्ष भविष्य में बनाना नहीं चाहेगा। नगर की कार्यकारिणी का गठन लगातार टल रहा है। जबकि एक के बाद एक संगठनात्मक अभियान जारी हैं। ऐसे में प्रदेश नेतृत्व को लगता है कि इंदौर में मानोकार्यकारिणी की आवश्यकता ही नहीं है। जबकि नगर के कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ती जा रही है। इसका कारण यह है कि नगर कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ है। दीनदयाल अंत्योदय समितियां भी नहीं बनी हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने अपना 2 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण (15 फरवरी को उन्हें 2 वर्ष हो गए) होने के बाद कहा था कि वह देखेंगे कि किन जिलों और मंडलों में कार्यकारिणी काम नहीं कर रही है।

ऐसे में होना यह चाहिए कि सबसे पहले इंदौर नगर की कार्यकारिणी घोषित किया जाए। उसके बाद ही संगठनात्मक कार्यक्रम किए जाएं। यदि स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे जीवित होते तो क्या इतने दिनों तक इंदौर की कार्यकारिणी का गठन लटका रहता ? यह सही है कि इसके लिए प्रदेश नेतृत्व नहीं बल्कि स्थानीय नेता जिम्मेदार हैं जो कुछ नामों को लेकर मतभेद रखते हैं। प्रदेश नेतृत्व को चाहिए कि इन मतभेदों को सुलझा कर जल्दी से जल्दी नगर की कार्यकारिणी का गठन करें। बहरहाल, इंदौर के कुछ नेताओं को आशा थी कि निगम मंडलों में नियुक्तियां होंगी लेकिन संगठन ने केवल सावन सोनकर को ही उपकृत किया है। जयपाल सिंह चावड़ा इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष जरूर बनाए गए हैं लेकिन उन्हें देवास जिले का मूल निवासी माना जाता है।

इस तरह देखा जाए तो इंदौर के नेताओं में केवल सावन सोनकर ही भाग्यशाली रहे हैं। ऐसे में सुदर्शन गुप्ता, गोपीकृष्ण नेमा, कृष्ण मुरारी मोघे, बाबू सिंह रघुवंशी, भंवर सिंह शेखावत, मधु वर्मा, मनोज पटेल, उमेश शर्मा, जगमोहन वर्मा जैसे अनेक नेता प्रतीक्षारत ही रह गए। बहरहाल, प्राधिकरण में अध्यक्ष के पद पर जयपाल सिंह चावड़ा को तो बिठा दिया है लेकिन उपाध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति होना है। क्योंकि नगर भाजपा की कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ है इसलिए भाजपा के कार्यकर्ता चाहते हैं कि कम से कम प्राधिकरण का गठन हो जाए तो उसमें अवसर मिल सकें। नगर भाजपा में पदाधिकारी रहे अनेक नेता और पूर्व पार्षद इस संबंध में लॉबिंग कर रहे हैं। वैसे अतीत में शंकर लालवानी और मधु वर्मा ऐसे प्राधिकरण अध्यक्ष रहे हैं जिन्होंने बिना सदस्यों के भी काम चलाया है। यह मुख्यमंत्री पर निर्भर है कि वह क्या निर्णय लेते हैं।

नव भारत न्यूज

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