फिर दबकर रह गए बगावत के सुर

एमपी में दबाव की राजनीति हुई फुस्स , नहीं जुटे पर्याप्त विधायक

खिलावन चंद्राकर

भोपाल : भाजपा में वरिष्ठ विधायकों और पूर्व मंत्रियों के साथ ही कुछ पूर्व विधायकों के सत्ता और संगठन से बगावत के प्रयास एक बार फिर परवान नहीं चढ़ पाए। लगभग तीन दर्जन नेताओं के जुटने की भनक जैसे ही सत्ता और संगठन को मिली, संकटमोचक सक्रिय हो गए और बगावत के सुर को संख्या बल नहीं जुटा पाने के चलते कुचल कर रख दिया गया। प्रदेश में फिर से सरकार बनाने में कामयाब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में अपनी जड़ें इतनी मजबूत कर ली है कि अपने ही कुछ वरिष्ठ और ताकतवर विधायकों ,पूर्व मंत्रियों को सत्ता के सुख से वंचित कर दिया। इसी तरह सांसद बीडी शर्मा के नेतृत्व में भाजपा का संगठन इतना मजबूत हो गया है कि किसी भी तरह के दबाव की राजनीति उस पर असर करती नहीं दिखती।

ताजा प्रसंग पूर्व मंत्री अजय विश्नोई के बुलावे पर पिछले दिनों बगावती तेवर दिखाने वाले विधायकों के न जुटने का है। लंबे समय से अपनी ही पार्टी की सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश में लगे अजय विश्नोई के घर पर हुई बैठक में मात्र 5 मौजूदा और दो पूर्व विधायक ही पहुंचे जबकि योजना के अनुसार लगभग तीन दर्जन मौजूदा और पूर्व विधायकों को इसमें पहुंचना था । इनमें से अधिकांश किसी न किसी कारण से सरकार और संगठन से नाराज बताएं जाते हैं। लेकिन विश्नोई के साथ ही पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन , नागेंद्र सिंह ,विधायक केदार शुक्ला ,यशपाल सिसोदिया और राजेंद्र शुक्ला ही पहुंचे। इनमें से अधिकांश मंत्री पद नहीं मिलने के कारण नाराज समझे जाते हैं जबकि दो पूर्व विधायक जयंत मलैया और दीपक जोशी भी इस बैठक में मौजूद थे , जिन्हें पिछले उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी नहीं बनाए जाने का मलाल है।

इन सभी में राजेंद्र शुक्ला और यशपाल सिंह सिसोदिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गुड लिस्ट में माने जाते हैं ,किंतु बगावती तेवरों से लबरेज भाजपा नेताओं की इस बैठक में उनकी उपस्थिति को आश्चर्यजनक माना जा रहा है। अजय विश्नोई की दबाव की राजनीति को पूरी तरह से फ्लॉप करने के लिए सत्ता और संगठन से जुड़े लगभग एक दर्जन वरिष्ठ भाजपा नेता रातों-रात सक्रिय हो गए और बैठक में शामिल होने जा रहे संभावित विधायकों और पूर्व विधायक पर एक सोची समझी रणनीति बनाकर काम किया और उन्हें बैठक में शरीक होने से रोकने में सफल हो गए।इन परिस्थितियों में भाजपा के सूत्रों का मानना है कि पूर्व मंत्री अजय विश्नोई लगातार दबाव की राजनीति कर रहे हैं जो अब पूरी तरह फ्लॉप हो चुकी है। दूसरी तरफ विश्नोई ने इस बैठक को लेकर दावा किया है कि यह बैठक महज सरकार के कामकाज की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी ,जिसमें आपसी विचार विमर्श हुआ।

त्रिपाठी के सख्त तेवर

अलग विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर लंबे समय से पार्टी और सरकार से बगावत का झंडा उठाने वाले मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी के तेवर भी दिनोंदिन सख्त होते जा रहे हैं। अपनी मांग को विंध्य की आवाज बना चुके त्रिपाठी के साथ अब लोग जुटने भी लगे हैं। उन्होंने राजधानी भोपाल में कुछ बैठक कर मांग को बुलंद किया है साथ ही विंध्य के सतना ,रीवा ,सीधी सहित अन्य जिले में भी लगातार उनके दौरे हो रहे हैं और मांग के समर्थन में लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी ही सरकार से विंध्य के विकास के विषय में 9 सवाल पूछे और सभी सवालों के जवाब में शून्य लिखकर यह बताने की कोशिश की, की लगातार शिवराज सरकार द्वारा विंध्य क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है। विश्नोई और त्रिपाठी द्वारा अपनी ही सरकार को लगातार सवालों के कटघरे में खड़ा करने के बावजूद सरकार और संगठन से जुड़े जिम्मेदार लोगों द्वारा कोई पलटवार करते हुए प्रतिक्रिया सामने नहीं आने से यह भी स्पष्ट होता जा रहा है कि इस तरह के प्रयासों को सरकार और संगठन गंभीरता से नहीं ले रहा है। ऐसी दशा में आने वाला समय ही बताएगा कि दोनों के तेवर और कितना सख्त होते हैं….!!

नव भारत न्यूज

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