इंफ्रास्ट्रक्चर सामाजिक असमानता को पाटने वाला सेतु: कोविंद

नयी दिल्ली 31 जनवरी (वार्ता) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इंफ्रास्ट्रक्चर को सामाजिक असमानता काे पाटने वाला सेतु बताया और कहा कि इस पर होने वाले निवेश से न केवल लाखों नए रोजगार पैदा होते हैं, बल्कि इससे व्यापार करना सुगम होने के साथ ही परिवहन की गति बढ़ती है तथा हर सेक्टर में आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होती है।
राष्ट्रपति ने संसद के बजट सत्र के शुभारंभ के अवसर पर केन्द्रीय कक्ष में संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी देश के विकास का आधार वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक असमानता को पाटने वाला सेतु भी है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले निवेश से न केवल लाखों नए रोजगार पैदा होते हैं, बल्कि इसका एक गुणात्मक प्रभाव भी होता है। इससे व्यापार करना सुगम होता है, परिवहन की गति बढ़ती है और हर सेक्टर में आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर-विकास के कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज को प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के रूप में एक साथ जोड़ा है। यह प्लान भारत में मल्टी-मॉडल-ट्रान्सपोर्ट के एक नए युग का प्रारम्भ करने जा रहा है। भविष्य के भारत में रेलवे, हाइवे और एयरवे अलग-अलग और अलग-थलग इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होंगे, बल्कि एक देश के एकजुट संसाधन के तौर पर काम करेंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, संसाधनों और इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से देश की उन संभावनाओं को उड़ान मिल रही है, जो दशकों से उपेक्षित पड़ी थीं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की उपलब्धियां गर्व करने योग्य हैं। वर्ष 2020-21 में ग्रामीण इलाकों में 100 किलोमीटर प्रतिदिन से अधिक की रफ्तार से 36 हजार 500 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं और हजारों रिहायशी क्षेत्रों को हर मौसम में सड़क संपर्क से जोड़ा गया है।
वर्तमान में देश के राष्ट्रीय राजमार्ग भी पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण, पूरे देश को एक साथ जोड़ रहे हैं। मार्च 2014 में देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 90 हजार किलोमीटर थी जबकि आज उनकी लंबाई बढ़कर एक लाख चालीस हजार किलोमीटर से अधिक हो गई है। भारतमाला परियोजना के तहत लगभग छह लाख करोड़ रुपये की लागत से 20 हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई के राजमार्गों पर काम किया जा रहा है। इनमें 23 ग्रीन एक्सप्रेस-वे और ग्रीन-फील्ड कॉरिडोर का विकास भी शामिल है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे भी पूरा होने के करीब है, जोकि देश का सबसे लंबा और सबसे तेज एक्सप्रेस-वे होगा। सरकार ने पंढरपुर तीर्थ को जोड़ने वाले संत ज्ञानेश्वर मार्ग और संत तुकाराम पालकी मार्ग के चौड़ीकरण का काम शुरू किया है।
देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से आज जहां एक ओर विकास के नए रास्ते खुल रहे हैं वहीं दूसरी ओर, इससे देश की सुरक्षा को भी नई ताकत मिल रही है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने लद्दाख में उमलिंग ला दर्रा पर 19 हजार फुट की ऊंचाई पर विश्व की सबसे ऊंची परिवहन योग्य सड़क का निर्माण किया है। लद्दाख के देमचोक, उत्तराखंड के जोलिंग कोंग और अरुणाचल प्रदेश के हुरी जैसे सर्वाधिक दूरस्थ गांवों को भी आधुनिक सड़कों से जोड़ा गया है।
भारतीय रेलवे का भी तेज गति से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। नई वंदे भारत ट्रेनें तथा नए विस्टाडोम कोच, भारतीय रेल की आभा में वृद्धि कर रहे हैं। बीते सात वर्षों में 24 हजार किलोमीटर रेलवे रूट का विद्युतीकरण हुआ है। नई रेलवे लाइनें बिछाने और दोहरीकरण का काम भी तेज गति से जारी है। गुजरात में गांधीनगर रेलवे स्टेशन और मध्य प्रदेश में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन आज आधुनिक भारत की नई तस्वीर के रूप में सामने आए हैं। कश्मीर में चिनाब नदी पर निर्मित हो रहा रेलवे आर्च ब्रिज, आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग का जीवन आसान बनाने के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ाने में भी असाधारण काम किया है। देश में 11 नई मेट्रो लाइनों पर सेवाएं शुरू की गई हैं, जिनका लाभ आठ राज्यों में लाखों लोगों को हर दिन मिल रहा है। भारत आज दुनिया के चार सबसे बड़े चालक रहित ट्रेन नेटवर्क वाले देशों में भी शामिल हो गया है। देश में इंडिजेनस ऑटोमैटिक ट्रेन सिस्टम भी विकसित किया है, जो मेक इन इंडिया की बढ़ती क्षमता का प्रतीक है। सरकार ने देश में 21 ग्रीनफील्ड हवाईअड्डे के निर्माण की भी मंजूरी दी है। इनमें से देश का सबसे बड़ा हवाईअड्डा उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में बन रहा है।
देश के महत्वपूर्ण कारोबारी क्षेत्रों को बंदरगाहों से जोड़ने के लिए सागरमाला कार्यक्रम के तहत 80 से अधिक कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी काम हो रहा है। अब तक 24 राज्यों में पांच मौजूदा राष्ट्रीय जलमार्गों और 106 नए जलमार्गों सहित कुल 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है। इनमें से 23 जलमार्गों के जरिए माल परिवहन भी हो सकेगा। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में सरकार द्वारा 27 हजार सर्किट किलोमीटर से ज्यादा ट्रांसमिशन लाइनें भी बिछाई गई हैं।

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