29 जनवरी को बुध का होगा उदय और शुक्र होंगे मार्गी

बाजार की गति में आएगा परिवर्तन, आर्थिक नीति पर पड़ेगा असर

उज्जैन:  भारतीय ज्योतिष शास्त्र में बुध व शुक्र ग्रह का विशेष महत्व है उसका मुख्य कारण यह है कि बुध ग्रह को वाणी व्यापार व्यवसाय व प्रकृति का कारक ग्रह बताया गया है। वहीं शुक्र को समृद्धि ऐश्वर्य सौंदर्य तथा वस्त्र आदि का कारक ग्रह बताया गया है। इन दोनों ग्रहों का पिछले 15 से 20 दिन का कालखंड अलग प्रकार का रहा। इन्हीं 15-20 दिनों में बाजार की गति व नीति दोनों में बदलाव आया। क्योंकि बुध और शुक्र ग्रह सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक तीनों को ही प्रभावित करते हैं। क्योंकि इन्हीं के माध्यम से व्यक्ति विशेष दल का परिवर्तन कर देता है। जब इनकी वक्र गति होती है तो भारतीय समाज में आर्थिक राजनीतिक व सामाजिक परिवर्तन दिखाई देते हैं।

पंचांग की गणना के अनुसार 29 जनवरी को शुक्र का भी मार्गी होने का अनुक्रम बनेगा। भारतीय समयानुसार दोपहर 2.28 पर शुक्र ग्रह मार्गी होंगे। इनकी मार्ग गति आर्थिक दृष्टिकोण से भारत की स्थिति में परिवर्तन लाने का प्रयास कर पाएगी। भारत के बाजार की अर्थ नीति में बदलाव होगा। चूंकि वर्तमान में शुक्र धनु राशि में मंगल के साथ गोचर कर रहे हैं। यह स्थिति बहुत ज्यादा श्रेष्ठ नहीं मानी जाती फिर भी भारत का कृषि बाजार एशिया पेसिफिक में अपना प्रभाव छोड़ सकता है। उसका लाभ आने वाले समय में दिखाई देगा।
बुध के उदय होने से बाजार संभलेगा
ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्बावाला ने बताया शेयर मार्केट और पेट्रोल गोल्ड से जुड़े भावों को लेकर अक्सर रस्साकशी होती रहती है। इन में उतार-चढ़ाव की स्थिति दिखाई देती है। अभी यह स्थिति बुध के अस्त होने से चल रही है। 29 जनवरी को बुध का उदय होना और उदय होने के साथ बाजार की गति का बढऩा यह दिखाई देगा। वर्तमान में बुध मकर राशि में सूर्य और शनि के साथ में गोचर कर रहे हैं। सूर्य बुध शनि की युति श्रेष्ठ मानी जाती है। किंतु बाजार की स्थिति में उतार-चढ़ाव का संदेश भी देती है। फिर भी बुध के उदय होने से बाजार संभलेगा।
कालखंड में वक्री मार्गी की स्थिति
दोनों ग्रहों का गति संचार राशि अनुसार अलग-अलग प्रकार का होता है। किंतु मूल रूप से एक राशि में ग्रह का गोचर 40 दिन के आसपास या उससे अधिक की स्थिति में कभी-कभी हो जाता है। यह इनके मार्गी या वक्र गत होने की स्थिति में होता है। क्योंकि दोनों ही ग्रह बाजार व्यापार धन से जुड़े ग्रह हैं। जो समृद्धि की ओर आगे बढ़ाते हैं। ऐसी स्थिति में जब इनका अस्त होना या वक्री होना या किसी अन्य ग्रहों के साथ पापाक्रांत होना होता है तो बाजार तो प्रभावित होता ही है, मानसिक परेशानी भी होती है इन से निवृत्त होने के लिए गणपति जी और दत्तात्रेय की आराधना करनी चाहिए।

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