त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संबंधी अध्यादेश निरस्त होने से याचिकाएं सारहीन

हाईकोर्ट ने दो दर्जन याचिका की निराकृत
भोपाल-जबलपुर। प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के संबंध में दोदर्जन से अधिक याचिकाएं दायर की गयी थी। चीफ  जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस पीके कौरव की युगलपीठ को बताया गया कि त्रिस्तरीय चुनाव के संबंध में जारी अध्यादेश सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया है। युगलपीठ ने याचिकाएं सारहीन होने के कारण उक्त मामलों का निराकरण कर दिया।
उल्लेखनीय है कि भोपाल निवासी मनमोहन नायर व गाडरवाड़ा निवासी संदीप पटैल व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में प्रदेश में होने वाले तीन चरणों में  होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया है राज्य सरकार ने पूर्व में तरह आरक्षण लागू कर चुनाव करवाने के संबंध में अध्यादेश पारित किया है। सरकार द्वारा उक्त अध्यादेश कांग्रेस शासनकाल में निर्धारित आरक्षण को निरस्त कर लागू किया गया है। प्रदेशसरकार का उक्त आध्यादेश पंचायत चुनाव एक्ट का उल्लंघन करता है। याचिका में कहा गया था कि पंचायत एक्ट में रोटेशन व्यवस्था का प्रावधान है।
पूर्व की तरह आरक्षण करना पंचायत एक्ट की रोटेशन व्यवस्था के खिलाफ  है। इसके अलावा 2018 में निवाड़ी जिला का गठन किया गया है। बिना सीमांकन किये  नये जिले में पंचायत चुनाव नहीं कराये जा सकते है। मंगलवार को सुनवाई के
दौरान चुनाव संबंधित अध्यादेश सरकार द्वारा निरस्त कर दिये जाने की जानकारी युगलपीठ को दी गयी। जिसके कारण युगलपीठ ने सभी याचिकाएं सारहीन होने पर निराकृत कर दी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर, अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा तथा इंटरविनर की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने पैरवी की।

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