महाराज के गढ़ में राजा लगा रहे सेंध

 बाढ़  बाढ़ पीड़ितों का दर्द जानने चार दिन तक चंबल में डेरा, सिंधिया खेमा ने बताया सियासी एजेंडा
  हरीश दुबे
ग्वालियर:  जब दिग्विजयसिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, इस दस साल के दरम्यान उन्होंने ग्वालियर-चंबल की कांग्रेस राजनीति में सिंधिया परिवार के प्रभुत्व को देखते हुए यहां की सियासत में दखल नहीं दिया। कमलनाथ सरकार के सवा साल के कार्यकाल में भी दिग्विजय ने यही नीति अपनाए रखी, इस अंचल से सत्ता व संगठन में नियुक्तियां भी सिंधिया की इच्छानुसार ही होती रहीं लेकिन अब समूचा सिंधिया परिवार कांग्रेस से बाहर है और दिग्विजय ने सिंधिया के इस गढ़ में मजबूती के साथ सेंध लगाना शुरू कर दिया है।   पिछले चार रोज से दिग्विजय ग्वालियर-चंबल में ही डेरा डाले हुए हैं। इस दौरान उन्होंने ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, दतिया, भिण्ड के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में जाकर आपदा पीड़ितों के आंसू पोंछे, नुकसान का जायजा लिया, पटवारी, गिरदावरों को मौके पर बुलाकर राहत व सर्वे अभियान की खामियां दूर करने के लिए ताईद किया। हर जगह उन्होंने शिवराज सरकार व भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोले रखा।
दिग्विजय के समर्थक अपने नेता के इस मैराथन दौरे की मंशा को पाकसाफ बताते हैं लेकिन सिंधिया खेमे को पूर्व मुख्यमंत्री के इस दौरे में सियासत की बू आ रही है। महल के नजदीकी बाल खांडे कहते हैं कि दिग्विजय बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के दौरे की आड़ में अपना छिपा हुआ राजनीतिक एजेंडा चला रहे हैं और राजा के इस दौरे का एकमेव मकसद अपनी खोई हुई जमीन तलाश करना है लेकिन जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रह चुके कांग्रेस के  प्रदेश उपाध्यक्ष वासुदेव शर्मा अपने नेता के दौरे की आधारभूत पृष्ठभूमि इंगित करते हुए दावा करते हैं कि राजा के चार दिन के दौरे से महाराजा के शिविर में हड़कंप है क्योंकि राजा ने यहां चार दिन के दौरे में बाढ़ पीड़ितों के वास्तविक हालात का तो जायजा लिया ही, कांग्रेस संगठन को भी मजबूती दी है। पूर्व सांसद बारेलाल जाटव ने इससे एक कदम आगे बढ़कर नवभारत से कहा कि पिछले सवा साल के संक्रमणकाल में अंचल के कांग्रेस संगठन में जो कुछ पुराने नेता निष्क्रिय हो गए थे या सिंधिया के साथ भाजपा में न जाते हुए भी पार्टी से दूरी बना ली थी, उनमें पार्टी के प्रति फिर से विश्वास जगाने एवं उन्हें पूरी ताकत से सवा दो साल होने बाद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की वापसी के लिए जुटने को प्रेरित किया है।
  प्रदेश में बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान ग्वालियर-चंबल अंचल में हुआ है। अंचल के सभी जिले बाढ़ की चपेट में आ गए। हजारों लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, तो बाढ़ से सभी जिलों में काफी नुकसान भी हुआ। लेकिन बाढ़ के बाद अब पुनर्वास को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। बाढ़ का असर कम होने के बाद अब लोगों की जिंदगी फिर से पटरी पर लाने की जरूरत है लेकिन बाढ़ का असर कम होते ही अब ग्वालियर-चंबल अंचल में सियासत तेज हो गई है। दिग्विजय एवं कमलनाथ ने अपने दौरे में शिवराज सरकार पर बाढ़ के बाद उचित कदम नहीं उठाने का आरोप लगाते हुए सत्ता को घेरा तो भाजपा विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।
  इन्होंने कहा
मुख्यमंत्री से लेकर सरकार में बैठे तमाम बड़े नेता बाढ़ के दौरान लगातार दौरे करते रहें जिससे कि प्रशासनिक अमला उनके ही प्रोटोकॉल में लगा रहा लेकिन अब तक पुनर्वास को लेकर कोई एक्शन प्लान तैयार नहीं किया है जिससे अब लोग परेशान हो रहे हैं, दिग्विजय सिंह ने इन्हीं जमीनी हालात का जायजा लिया है।
   -आरपी सिंह, प्रदेश प्रवक्ता, मप्र कांग्रेस
 सत्ता व संगठन पूरी ताकत से बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने में लगे हैं लेकिन कांग्रेस के नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए दौरे कर बाढ़ राहत अभियान में खलल डाल रहे हैं। दिग्विजय से लेकर कमलनाथ तक ने यही काम किया है।
  -जवाहर प्रजापति, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी, भाजपा

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