उत्पादन गुणवत्ता सुधार के लिए किसानों की कार्यशालाएँ आयोजित की जाये- शिवराज

भोपाल,23 जनवरी (वार्ता) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि खाद्य प्रसंस्करण की प्रक्रिया पर प्रदेश में कार्यशालाएँ आयोजित करने की आवश्यकता है। किसानों को अपने उत्पाद की गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग, मार्केटिंग, ब्रांडिंग के संबंध में जानकारी देने और इनकी प्रक्रियाओं से अवगत कराने के लिए कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँ।

मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत कृषि महाविद्यालय ग्वालियर, कृषि विज्ञान केन्द्र, मुरैना और कृषि महाविद्यालय, सीहोर में इन्क्यूबेशन केन्द्रों की स्थापना के लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में आयोजित भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम को निवास कार्यालय से वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना बनाकर ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस योजना में ग्वालियर, मुरैना और सीहोर के इनक्यूबेशन सेंटर निश्चित तौर पर मील का पत्थर साबित होंगे। मध्यप्रदेश में फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने में ये समन्वित कदम एक नई क्रांति का सूत्रपात करेंगे।

उन्होंने बताया कि सीहोर, मुरैना और ग्वालियर में तीन इन्क्यूवेशन सेंटर्स की स्थापना के लिए केन्द्र सरकार ने 9 करोड़ 87 लाख 85 हजार रूपए स्वीकृत किए हैं। सीहोर में अमरूद, फलों तथा सब्जियों के प्रसंस्करण के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना की जा रही है। सेंटर में खाद्य प्र-संस्करण प्रयोगशाला सहित जूस, पल्प, जैम, जैली, वेजिटेबल डिहाइड्रेशन लाइन एवं प्याज प्रसंस्करण लाइन की स्थापना होगी। मुरैना में सरसों एवं अन्य तिलहनों, ज्वार, बाजरा, रागी और बेकरी उत्पादों के प्र-संस्करण के लिए कॉमन इन्क्यूबेशन फेसिलिटी उपलब्ध कराई जाएगी। ग्वालियर में आलू तथा आलू प्र-संस्करण लाइन एवं मिलेट आधारित कुकीज लाइन की स्थापना की जा रही है।

श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश पूरे देश में संतरा, धनिया, लहसुन उत्पादन में देश में पहले नंबर पर और अदरक, मिर्ची, अमरुद, मटर और प्याज के उत्पादन में दूसरे नंबर पर है। यदि किसान अपने इस उत्पादन की छोटी-छोटी फूड प्रोसेसिंग इकाई खोल लें, तो जनता को शुद्ध सामग्री, युवाओं को रोजगार के अवसर और किसानों को उनके उत्पाद के ठीक दाम मिल सकेंगे। खाद्य प्रसंस्करण की प्रक्रिया पर प्रदेश में कार्यशालाएँ आयोजित करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में किसान को 10 लाख रुपए तक की सब्सिडी दी जाएगी जिसका 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को विस्तार देने के लिए राज्य सरकार बड़ी यूनिट लगाने पर ढाई करोड़ रुपए तक की सब्सिडी देगी।

उन्होंने कहा कि पिछले 15 साल में प्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि की है। अनेक योजनाएँ बनाकर हमने प्रयत्नपूर्वक तय किया कि प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में आगे लाएंगे। इसी का परिणाम है कि प्रदेश को अनेक बार कृषि कर्मण अवार्ड प्राप्त हुआ। मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन में रिकार्ड स्थापित किए हैं। प्रदेश में 43 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदकर रिकार्ड स्थापित किया गया है। आज मध्यप्रदेश में पंजाब से भी अधिक गेहूँ पैदा होता है। कृषि के क्षेत्र में प्रदेश नित नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूर्ण करने में सतत सहयोग प्रदान कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। राज्य सरकार फसलों के उत्पादन के साथ उद्यानिकी को प्रोत्साहित कर प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को पूरा करने की दिशा में सक्रिय है। किसान की आय बढ़ाने के लिए कृषि के विविधीकरण की आवश्यकता है। फल, फूल, सब्जी, औषधियों की खेती और कृषि वानिकी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उद्यानिकी का क्षेत्र 15 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है। प्रदेश में फल, सब्जियाँ, मसाले आदि की बड़े पैमाने पर खेती हो रही है। इन उत्पादों की प्रोसेसिंग की व्यवस्था होने से निश्चित रूप से किसानों की आय बढ़ेगी।

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