नयी दिल्ली, 23 सितंबर (वार्ता) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि विकसित भारत की नवाचार यात्रा के लिए वैश्विक और नई सोच की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री ने नीति आयोग की रिपोर्ट “प्रगति के मार्ग : भारत की नवाचार गाथा का विश्लेषण और अंतर्दृष्टि” जारी करने के अवसर पर कहा कि इस रिपोर्ट का विमोचन भारत की नवाचार क्षमता को विकसित भारत @ 2047 के विजन के साथ जोड़ने में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मौके पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान भी साथ थे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकारी और निजी क्षेत्र, दोनों को अपनी बाधाओं को दूर करके अच्छे तालमेल के साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा कि निवेश में समान भागीदारी और उद्योगों के साथ शीघ्र जुड़ाव स्टार्ट-अप्स को सफल उद्यमों में बदलने की कुंजी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत का लगातार प्रगति करना सोची-समझी नीतिगत पसंद, उद्यमिता में निवेश और देश के युवा नवप्रवर्तकों की भावना का परिणाम है। उन्होंने कहा कि 2015 में 81वें स्थान से 2025 में 39वें स्थान पर आना कोई आकस्मिक घटना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है, जिसमें 1 लाख से अधिक सरकारी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह है कि अब लगभग 50 प्रतिशत स्टार्ट-अप टियर-2 और 3 शहरों से आते हैं, जो उद्यमिता के लोकतंत्रीकरण और देश की समावेशी नवाचार गाथा को दर्शाता है।
डॉ. जितेंद्र ने प्रौद्योगिकी के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ब्रिक (जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद) और आईएन-स्पेस (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र) की तर्ज़ पर विशेषीकृत इंटरफेस तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्लेटफ़ॉर्म सरकारी और निजी क्षेत्रों के बीच निर्बाध सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गहन तकनीकी स्टार्ट-अप नीति और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) जैसी सरकारी पहल अग्रणी प्रौद्योगिकियों में संप्रभुता के निर्माण की दिशा में एक मौलिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करती हैं।
डॉ. सिंह ने हितधारकों से नीति आयोग की रिपोर्ट को केवल एक आकलन के रूप में नहीं, बल्कि एक रोडमैप और कार्रवाई के आह्वान के रूप में देखने का आग्रह किया, ताकि सफल मॉडलों का विस्तार किया जा सके, इनक्यूबेटरों में विविधता लाई जा सके, राज्य-स्तरीय क्षमताओं को मजबूत किया जा सके, और अग्रणी अनुसंधान एवं विकास में साहसपूर्वक निवेश किया जा सके।
इस समारोह में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. अभय करंदीकर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, दीपक बागला, मिशन निदेशक, अटल इनोवेशन मिशन (नीति आयोग) और डॉ. विवेक कुमार सिंह, वरिष्ठ सलाहकार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रभाग (नीति आयोग) मौजूद थे।
