जल हठ अभियान के लिए तुलसी सिलावट की जद्दोजहद

मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
तुलसी सिलावट ने प्रदेश सरकार में जब भी जो मंत्रालय संभाला, हमेशा अपनी अलग ही छाप छोड़ी है. वे जब स्वास्थ्य मंत्री रहे तब जनहित में कदम उठाए और बीमारों को अपन घर से नजदीक ही उपचार मिले इसके लिए संजीवनी क्लीनिक खुलवाए. खाद्य मंत्रालय संभालने के दौरान मिलावटखोरी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया. दोनों बार जनता ने उनके कार्य को भरपूर सराहा. अब तुलसी सिलावट ने जल ससाधन मंत्री के रहते जल संरक्षण व क्षिप्रा शुद्धि का बीड़ा उठाया है. वे जल संरक्षण के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए जल हठ नाम से एक सामाजिक अभियान चलाने वाले हैं. अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं और बावड़ी को संरक्षित किया जाएगा, जबकि लोगों को बारिश के पानी को बचाने के लिए जागरुक किया जाएगा.

इसी प्रकार शिवराज सरकार की मंशा अनुसार उज्जैन की पवित्र नगरी में क्षिप्रा नदी के पानी की शुद्धि का बीड़ा भी उठाया है. उन्होंने क्षिप्रा में मिलने वाली कान्ह नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए इसे चुनौती के रूप में स्वीकारा है. शिप्रा नदी में मिल रही प्रदूषित कान्ह नदी के कारण शिप्रा नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है. रामघाट पर बीते चार माह से पानी की टेस्टिंग में शिप्रा का पानी डी ग्रेड का मिला जो कि न तो नहाने लायक है और न ही पीने लायक बचा है. शिप्रा शुद्धिकरण को लेकर सन्तों के मोर्चा खोलने के बाद तुलसी सिलावट, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद राघवपिपलिया स्थित डेम व त्रिवेणी स्थित कच्चे डेम को देखने पहुँचे थे और गंदा पानी क्षिप्रा में न मिले इसक लिए पक्के डेम बनाने की दिशा में आगे बढऩे की बात कही थी. अब इस बार उन्होंने जल संरक्षण व क्षिप्रा शुद्धि को लक्ष्य बना लिया है.

बिरला के सामने विचित्र स्थिति

प्रदेश के 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में निमाड़ अंचल की बड़वाह विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर सचिन बिरला विधायक चुने गए थे. हाल में हुए खंडवा लोकसभा उपचुनाव के दौरान वे भाजपा में शामिल हो गए थे. अब विधानसभा अध्यक्ष के एक आदेश के बाद बिरला के सामने विचित्र स्थिति उपज गई है. वे भाजपी होते हुए भी फिलहाल कांग्रेसी विधायक कहलाएंगे. दरअसल दल बदल कानून के तहत सचिन बिरला की विधायकी समाप्त करने के लिए डॉक्टर गोविंद सिंह ने आवेदन दिया था, जिसके बाद आवेदन में दिए गए आरोपों का सत्यापन नहीं हुआ. वहीं विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने बिरला की सदस्यता समाप्त करने के आवेदन को खारिज कर दिया. साल 2018 में सचिन बिरला ने 30 हजार से ज्यादा वोटों से भाजपा नेता हितेंद्र सिंह सोलंकी को हराया था. सोलंकी तीन बार बीजेपी से विधायक चुने गए थे, लेकिन सचिन के सामने उनकी हार हुई थी. अब जब विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बिरला की विधायकी समाप्त करने का आवेदन खारिज हो गया है तो बिरला विधानसभा में अपने पुराने सहयोगियों के साथ ही बैठेंगे और कांग्रेस के विधायक बने रहेंगे.

बड़बोलापन ले डूबा

शाजापुर भाजयुमो जिलाध्यक्ष पद बड़बोलेपन के कारण देवांशु जैन के हाथ से फिसल गया और श्याम टेलर की झोली में आ गिरा. देवांशु का नाम करीब करीब तय माना जा रहा था, पर अति आत्मविश्वास में लोगों के सामने ऐसा कुछ उनके मुंह से निकल गया कि उनकी छवि भाजपा आलाकमान के सामे एकदम गिर गई. पिछले दिनों युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद के दावेदार देवांशु का कथित ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे अपने पूर्व सोशल मीडिया मित्र से यह कह रहे थे कि जिलाध्यक्ष का पद उनकी जेब में है. वे जिलाध्यक्ष ही बनेंगे. श्याम टेलर को तो कार्यकारिणी सदस्य बनाया जाएगा. इस ऑडियो में कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के खिलाफ भी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया था. यहां तक कि ऑडियो में यह तक कहा था कि जिलाध्यक्ष तो वे बन गए हैं केवल उनके नाम की घोषणा होना बाकी है. बताया जा रहा है कि विद्यार्थी परिषद के श्याम टेलर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा की पसंद थे. यहां तक कि जिले से जो पैनल संगठन ने भेजी थी, उसमें श्याम टेलर का नाम तक नहीं था. क्योंकि जिलाध्यक्ष अम्बाराम कराड़ा देवांशु जैन को जिलाध्यक्ष बनाना चाहते थे. लेकिन श्याम टेलर का नाम प्रदेश स्तर पर जोड़ा गया और आखिरकार श्याम टेलर को तमाम अवरोधों के बाद युवा मोर्चा की कमान मिल ही गई.

नव भारत न्यूज

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