कैसे जमा किया इतना धन !

कानपुर और कन्नौज के इत्र व्यापारी पीयूष जैन के यहां केंद्रीय आयकर और प्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा मारे गए छापे में करोड़ों रुपए कैश बरामद हुआ है. बताया जाता है कि इस इत्र व्यापारी के घर से लगभग 257 करोड़ रुपये नकद, 25 किलो सोना और 250 किलो चांदी बरामद की गई है. इनके अलावा अरबों रुपए की चल और अचल संपत्ति का भी पता चला है. मीडिया में आई खबरों के अनुसार पियूष जैन ने काले धन से कऱीब एक हज़ार करोड़ की संपत्ति एकत्रित की है. केंद्रीय एजेंसियों ने पियूष जैन के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की थी.बाद में अदालत के आदेश पर उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. कहा जाता है कि इस ईत्र व्यापारी ने जीएसटी में हेराफेरी कर इतनी दौलत इक_ी की है. केंद्रीय एजेंसियों की नजर में अभी उत्तर प्रदेश के कुछ और इत्र व्यापारी हैं. पियूष जैन पान गुटखा और मसाले का भी व्यवसाय करता था. देखा गया है कि पान गुटखा और मसाले के व्यापारियों पर जब भी छापेमारी होती है उनके पास पास अकूत दौलत मिलती है. इसका कारण इस व्यवसाय में होने वाला अंधाधुंध मुनाफा है. कहा जाता है कि 10 रूपए में मिलने वाले एक गुटखे की वास्तविक लागत एक रूपए भी नहीं होती.

यह भी एक तथ्य है कि इस का व्यवसाय करने वाले व्यापारी नियम और कानून का पालन नहीं करते. पियूष जैन ने जीएसटी बचाने के लिए नकली बिल बनाए और करोड़ों रुपए का चूना केंद्रीय एजेंसियों को लगाया. शिकंजे में फंसने के बाद अब वह कह रहा है कि सारा टैक्स चुकाने के लिए तैयार है.इस बरामदगी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि उसके पास इतना पैसा आया कहां से? जब पियूष जैन गैर कानूनी तरीके से काला धन जमा कर रहा था तो उस पर राज्य और केंद्रीय एजेंसियों की नजर क्यों नहीं पड़ी. जीएसटी एकत्रित करने वाले विभाग को उस पर पहले शक क्यों नहीं हुआ? यदि उसका एक ट्रक पकड़ा नहीं जाता तो ये मामला शायद ही उजागर होता. उस ट्रक के साथ नकली बिल भेजे गए थे जिसे स्थानीय अधिकारियों ने पकड़ लिया. जाहिर है अभी तक यह कालाबाजारी इसलिए बचा हुआ था क्योंकि स्थानीय अधिकारियों की उससे मिलीभगत थी. इसके अलावा वह राजनीतिक दलों से भी जुड़ा था. इस कारण पियूष को लेकर सियासत भी गरम हो गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मामले में समाजवादी पार्टी को शंका के घेरे में रख रहे हैं.जबकि समाजवादी पार्टी भाजपा पर आरोप लगा रही है. दोनों राजनीतिक दल यही सवाल कर रहे हैं कि इतना धन इसके पास कैसे आया? यही सवाल सभी की जुबान पर है. इतना धन एकत्रित करना यह साबित करता है कि नेताओं का भी उसको संरक्षण था. इस पूरे प्रकरण से यह साफ जाहिर होता है कि हमारे तंत्र में भ्रष्टाचार यदि बढ़ नहीं रहा तो कम भी नहीं हो रहा है. उत्तर प्रदेश में सभी जानते हैं कि कन्नौज और कानपुर के इत्र व्यापारी माफिया की तरह काम करते हैं. वहां के लोगों का यह भी कहना है कि यदि सही तरीके से जांच हो और दूसरे व्यापारियों को भी इसकी जद में लिया जाए तो कन्नौज और कानपुर में कई पीयूष जैन मिलेंगे. जाहिर है तंत्र को चुस्त दुरुस्त किए जाने की आवश्यकता है. अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए. जिन अधिकारियों के रहते पीयूष जैन फला फूला उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए.

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