ईडब्ल्यूएस की जनसंख्या का पेश किया जाये आंकडा

हाईकोर्ट ने जारी किये निर्देश
जबलपुर:  ईडब्ल्यूएस आरक्षण को सात बिंदुओं पर चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक तथा जस्टिस व्ही के शुक्ला की युगलपीठ ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। युगलपीठ ने ईडब्ल्यूएस की जनसंख्या की जानकारी पेश करने के निर्देश भी जारी किये गये है। याचिका पर अगली सुनवाई 13 सितम्बर को निर्धारित की गयी है।

याचिकाकर्ता अनूप सिंह मीणा एवं अन्य की तरफ से ईडब्ल्यूएस आरक्षण के संबंध में 2 जुलाई 2019 को जारी पॉलिसी को चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया था कि 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण दिये जाने से कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक हो जायेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने इंद्रा साहनी मामलें में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की गयी है। आरक्षण पालिसी मे आर्थिक रूप से कमजोर एससी,एसटी,ओबीसी को लाभ से बंचित किया गया है जो संविधान के अनुच्छेद 14,15,16 एवं 21 का उल्लंघन है।

आरक्षण की पालिसी के अंतर्गत सामान्य वर्ग के व्यक्ति जिसकी सालाना आय 8 लाख रूपए है को आर्थिक रूप से गरीब माना गया है जबकि 8 लाख सालाना कमाने बाले ओबीसी वर्ग को क्रीमीलेयर माना जाता है। संविधान संशोधन में आरक्षण की अधिकतम सीमा दस प्रतिशत निर्धारित की गई है जबकि मध्य प्रदेश राज्य में कुल जनसंख्या मात्र 4.4 प्रतिशत है। विवादित जातियों को लाभ से बंचित किया गया है।

जाति प्रमाण पत्र नहीं होने पर लाभ नहीं दिया जाये। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का निर्धारण राज्य का अधिकार है लेकिन इसके निर्धारिण में गंभीर संवैधानिक त्रुटी की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर सिर्फ बीपीएल कार्ड धारक को ही माना गया है। प्रदेश में बीपीएल कार्डधारी की संख्या लगभग 5 प्रतिशत है,जिसमें एससी,एसटी,ओबीसी वर्ग भी शामिल है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह ने पैरवी की।

नव भारत न्यूज

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