कोरोना से जान गवाने वाले रेलकर्मियों को सरकार दे 50 लाख

एनएफआईआर के महामंत्री ने मीडिया से चर्चा में कहा

रतलाम: नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे मेन के महामंत्री डॉ एम राघ्वैया ने कहां की कोविड-19 महामारी के दौरान जिस तरह रेलवे कर्मचारियों ने अपनी सेवाएं दी है ,उसे देखते हुए रेल कर्मियों को भी फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा दिया जाना चाहिए और कोरोना वायरस के कारण जिन रेल कर्मचारियों की जान गई है उनके परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा भी दिया जाना चाहिए। एनएफआईआर के महामंत्री डॉ एम राघ्वैया ने मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए यह बात कही। वे मंगलवार को वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ की सेंट्रल वर्किंग कमेटी मीटिंग को संबोधित करने रतलाम आए थे। जहां मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने रेल कर्मचारियों की समस्याओं व मांगों को लेकर अपनी बात रखी।

आपने रेलवे के निजीकरण का विरोध करते हुए हड़ताल की चेतावनी भी दी। पत्रकारों से चर्चा करते हुए डॉ राघवैया ने कहा कि नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे मेन भारतीय रेलवे में कार्यरत 12 लाख कर्मचारी एवं 13 लाख सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख संगठन है। आपने कहा कि कोविड-19 महामारी जैसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय रेलवे ने वर्ष 2020- 21 में पूर्व के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए मालभाड़ा परिवहन में 1233 मिलयन टन सामग्री का परिवहन कर उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। इसके बावजूद रेल कर्मचारी भी कई समस्याओं का निराकरण नहीं होना बेहद दुखद है।

आपने कहा कि एन एफ आई आर सरकार से लगातार रेल कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा देने एवं कोरोनावायरस के कारण जान गवा चुके रेल कर्मचारियों के परिवारों को 50 लाख मुआवजा देने की मांग करती आ रही है। प्रेस वार्ता में महामंत्री डॉ. वेरेमस अध्यक्ष शरीफ खान पठान, कार्यकारी महामंत्री आरजी काबर, कार्यकारी अध्यक्ष अजयसिंह, मण्डल मंत्री बीके गर्ग, मण्डल मंत्री बीके गर्ग, मण्डल अध्यक्ष रफीक मंसूरी, सहायक मण्डल मंत्री दीपक भारद्वाज व मण्डल प्रवक्ता गौरव दुबे मौज़ूद रहे।

नव भारत न्यूज

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