स्कूल फीस वृद्धि की दी गई छूट का आदेश वापस हो

एनूयएमएम ने सरकार को भेजा नोटिस

जबलपुर:  मप्र स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 22 नवंबर को एक आदेश जारी कर केवल ट्यूशन फीस वसूलने के 8 जुलाई के परिपत्र को शून्य कर दिया गया है। जिससे अब पूर्व का 29 जून का आदेश जीवित हो गया है, जिसमें 10 फीसदी फीस बढ़ाने की छूट दी गई है, जो कि न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है। इस संबंध में नागरिक उपभोक्ता मार्ग दर्शक मंच ने नोटिस भेजकर उक्त आदेश तत्काल
वापस लिये जाने की मांग की है।

एनयूएमएम के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके द्वारा दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने 4 नवंबर 2020 को निर्देश दिये थे कि जब तक कोरोना महामारी पूर्णत: समाप्त नहीं हो जाती तब तक केवल ट्यूशन फीस वसूली जाये। अभी कोरोना महामारी समाप्त नही हुई है, 26 नवंबर तक प्रदेश में 14 नये कोरोना संक्रमित मिले है और वर्तमान में प्रदेश में सक्रिय मरीजों की संख्या 102 है। आवेदकों का कहना है कि 8 जुलाई के परिपत्र को शून्य करने हेतु राजस्थान राज्य बावत् सुको के आदेश का हवाला पूर्णत: गलत है। क्योकि मप्र फीस अधिनियम व राजस्थान फीस कानून बिल्कुल ही भिन्न है। आवेदको का कहना है कि कोरोना काल में 10 फीसदी फीस वृद्धि करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका अभी भी हाईकोर्ट में लंबित है।

नव भारत न्यूज

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