पूर्वी भारत को नजरंदाज किया पूर्ववर्ती सरकारों ने: शाह

नयी दिल्ली 25 नवम्बर (वार्ता) केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्ववर्ती सरकारों पर पूर्वी भारत के विकास को नजरंदाज करने का आरोप लगाते हुए आज कहा कि मोदी सरकार ने पिछले सात वर्षों में इस क्षेत्र के विकास पर फोकस किया है और अब वहां परिवर्तन की बयार देखी जा सकती है।
श्री शाह ने गुरूवार को यहां वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से इंडियन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के वार्षिक सत्र में “ भारत@75 – एमपॉवरिंग नॉर्थ-ईस्ट इंडिया” विषय पर बोलते हुए कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के साथ ही वर्ष 2014 में भारत के विकास के साथ-साथ पूर्वोत्तर के विकास के लिए अपना विज़न साझा किया था। उन्होंने कहा था कि किसी भी देश का जब तक सर्वसमावेशी, सर्वसपर्शी और संतुलित विकास ना हो, तब तक वह देश आगे नहीं बढ़ सकता। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज़ादी के बाद पश्चिमी और दक्षिणी भारत में विकास ज़्यादा हुआ लेकिन अगर 70 सालों की पृष्ठभूमि में देखें तो लगता था कि पूर्वी भारत कहीं ना कहीं पिछड़ गया है।
उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने कहा था कि सरकार बनने पर हम पूर्वी भारत के विकास पर फ़ोकस करेंगे और इसे शेष भारत के विकास के समकक्ष लाकर देश के विकास में योगदान देने वाला बनाएंगे और पिछले 7 साल में पूर्वी क्षेत्र में परिवर्तन की बयार देखी जा सकती है। उन्होने कहा कि जब हम पूर्वी भारत के विकास की बात करते हैं तो पूर्वोत्तर के विकास के बिना इसकी कल्पना ही नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के दो हिस्से हैं। पहले हिस्से में जाने-अनजाने शहीदों ने हमें आज़ादी दिलाने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उन्हें याद करके नई पीढ़ी को उनसे जोड़ा जाएगा। दूसरे हिस्से में 75 से 100 साल तक भारत को कहां से कहां पहुंचाना है, इसका हम संकल्प लेना है। उन्होंने कहा , “ प्रधानमंत्री जी ने इन 25 सालों को आज़ादी का अमृत काल कहा है और इन 25 सालों में भारत दुनिया में हर क्षेत्र में सर्वप्रथम हो, इस दृष्टि से आगे बढ़ना है। आर्थिक विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जी ने हमारे सामने पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा है और पूर्वोत्तर के विकास के बिना यह संभव नहीं हो सकता।”
श्री शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर हमारे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र है और जब तक इसे शेष भारत के साथ हर दृष्टि से जोड़ा नहीं जाता, यानी वहां की और शेष भारत की जनता के बीच सामंजस्य पैदा नहीं होता, एकात्मता का भाव पैदा नहीं होता, बाक़ी के भारत और वहां के विकास की दर समान हो, और बाक़ी भारत जितनी शांति और समृद्धि वहां भी हो, तब तक पूर्वोत्तर का विकास संभव नहीं है। वर्ष 2014 के बाद से हमने पूर्वोत्तर के विकास को चरणबद्ध तरीक़े से आगे बढ़ाया है।

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