साबरमती गांधी आश्रम के पुनर्विकास पर रोक संबंधी तुषार गांधी की याचिका ख़ारिज

अहमदाबाद, 25 नवंबर (वार्ता) गुजरात हाई कोर्ट ने अहमदाबाद में महात्मा गांधी के ऐतिहासिक साबरमती आश्रम के पुनर्विकास की राज्य सरकार की परियोजना पर रोक लगाने तथा सम्बंधित सरकारी संकल्प को रद्द करने की बापू के प्रपौत्र तुषार गांधी की चर्चित जनहित याचिका को आज ख़ारिज कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति आशुतोष जे शास्त्री की खंडपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए यह भी अवलोकन दिया कि याचिककर्ता की शंका का निवारण सम्बंधित सरकारी आदेश में भी किया गया है। श्री गांधी ने पिछले माह ही उक्त जनहित याचिका अदालत में दायर की थी। इसमें उन्होंने दावा किया था कि क़रीब 1200 करोड़ रुपए की उक्त परियोजना से इस ऐतिहासिक महत्व वाले आश्रम और इसके संचालन की मूल प्रकृति प्रभावित होगी। इसे रद्द कर आश्रम को इसके मूल स्वरूप में संरक्षित किया जाना चाहिए।
इसी साल पांच मार्च को राज्य सरकार ने उद्योग और खनन विभाग के ज़रिए क़रीब 55 एकड़ में इस आश्रम के पुनर्विकास के लिए एक संचालन परिषद के गठन का संकल्प जारी किया था। श्री गांधी ने इस क़दम को उनके दादा जी यानी बापू के मूल विचारों के सर्वथा विपरीत भी करार दिया था। राज्य सरकार ने इस परियोजना की डिज़ाइन उसी एचसीपी प्राइवेट लिमिटेड से तैयार कराया है जो नए संसद भवन यानी सेंट्रल विस्टा परियोजना की भी डिज़ाइन कर्ता है।
कई गांधीवादी संगठनों ने इसके विरोध में एक यात्रा का भी आयोजन किया था।
अदालत में राज्य सरकार के प्रतिनिधि महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने कहा कि इस परियोजना में यहां राणिप क्षेत्र में साबरमती नदी के किनारे स्थित इस आश्रम के स्वरूप से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। इसके क़रीब एक एकड़ क्षेत्र को नहीं छुआ जाएगा। परियोजना आस पास के 55 एकड़ क्षेत्र को विकसित करने की है। इसके ज़रिए गांधीवादी विचारधारा का ही प्रसार होगा। श्री त्रिवेदी ने यह भी कहा कि पूर्व में इसी तर्ज़ पर बिनावजह स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी का भी विरोध किया जा रहा था।
ज्ञातव्य है कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान रणनीति निर्माण का एक प्रमुख केंद्र रहे इस आश्रम में गांधी जी दक्षिण अफ़्रीका से वापसी के बाद एक दशक से अधिक समय तक रहे थे। यही से उन्होंने नमक सत्याग्रह सम्बंधित दांडी यात्रा शुरू की थी।

नव भारत न्यूज

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