मजदूर को मिला 15 लाख का उज्जवल किस्म का हीरा

पन्ना :की रत्नगर्भा नगरी आये दिन हीरा उगल रही है और कई लोग रंक से राजा बन रहे हैं। यह बात अलग है कि हीरा मात्र 10 प्रतिशत ही हीरा कार्यालय में जमा होता है शेष कालाबाजारी की भेंट चढ़ जाता है लेकिन कहीं न कहीं हीरा से जुडे लोग माला माल अवश्य हो रहे हैं। भले ही शासन को भारी राजस्व क्षति हो रही है लेकिन सम्बंधित अधिकारियों एवं हीरा व्यापारियों सहित हीरा जिसे मिलता है वह भी रंक से राजा बन रहा है आज फिर एक मजदूर को लगभग 15 लाख कीमती हीरा मिला है जिसे हीरा कार्यालय में जमा करा दिया गया है हासिल जानकारी के अनुसार पन्ना शहर के आगरा मोहल्ला निवासी 33 वर्षीय समसेर खां को हीरापुर टपरियन उथली खदान क्षेत्र से आज बुद्धवार को सुबह जेम क्वालिटी वाला 6.66 कैरेट वजन का हीरा मिला है।

इस हीरे की अनुमानित कीमत 12 से 15 लाख रुपए बताई जा रही है। हीरा धारक समसेर खां अपने परिजनों व मित्रों के साथ दोपहर में कलेक्ट्रेट स्थित हीरा कार्यालय आकर वहां विधिवत हीरा जमा कर दिया है। हीरा कार्यालय पन्ना के पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि जमा हुए हीरे का वजन 6.66 कैरेट है. जो उज्जवल किस्म का लेकिन हल्का पीलापन लिए हुए है। आगामी होने वाली नीलामी में इस हीरे को रखा जाएगा। नीलामी में हीरा बिकने पर रॉयल्टी काटने के बाद शेष राशि हीरा मालिक को प्रदान की जायेगी। बताया कि हीरापुर टपरियन उथली खदान क्षेत्र में इसके पूर्व 8.22 कैरेट वजन का हीरा पन्ना के ही बेनीसागर मोहल्ला निवासी रतन प्रजापति को मिला था। उज्जवल किस्म का यह हीरा विगत सितम्बर माह में हुई हीरों की खुली नीलामी में 37 लाख 7 हजार 220 रुपये में बिका था।

हीरा कार्यालय में सिर्फ दो हवलदारः- देश का इकलौता हीरा कार्यालय में कर्मचारियों की भारी कमी है, जिसके कारण जहाँ कामकाज प्रभावित होता है वहीँ हीरा खदान क्षेत्रों की समुचित निगरानी न हो पाने के कारण बहुत ही कम हीरा जमा हो पाते हैं। उथली हीरा खदानों से निकलने वाले ज्यादातर हीरे चोरी – छिपे बिक जाते हैं। हीरा कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार मौजूदा समय यहाँ सिर्फ दो हवलदार बचे हैं जबकि पूर्व में हीरा खदानों की निगरानी के लिए 34 हवलदार पदस्थ थे। इसके अलावा हीरा कार्यालय में सिर्फ एक बाबू, एक वैल्युवर व एक चौकीदार है। हीरा अधिकारी का प्रभार भी खनिज अधिकारी को मिला हुआ है। पहले यहाँ जिला मुख्यालय स्थित हीरा कार्यालय के अलावा दो उप कार्यालय इटवां और पहाड़ीखेरा में थे लेकिन अब दोनों ही कार्यालय कर्मचारियों की कमी के चलते बंद हैं।

नव भारत न्यूज

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