फिर आदिवासियों का दिल जीतने के प्रयास में शिवराज

मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास

मालवा-निमाड़ अंचल की 65 सीटों पर हार-जीत प्रदेश में सत्ता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आई है. यहां अधिकांश आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं, विशेषकर निमाड़ के. 2023 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश के प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा में आदिवासी समुदाय को अपने पाले में करने की खींचतान का दौर शुरू हो चुका है. आदिवासी दिवस के अवकाश को लेकर लंबी राजनीति हो चुकी है. स्वतंत्रता संग्राम के जननायक बिरसा मुंडा की जन्मतिथि के अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल में विशाल जनजातीय गौरव दिवस आयोजित कर सियासी बाजी जीत चुके हैं.

इस तरह आदिवासियों में पैठ जमाने के मामले में एक तरह से कामयाब हुए हैं. बिरसा मुंडा की जन्मतिथि मनाने के बाद अब चर्चा में टंट्या मामा का बलिदान दिवस है.  क्षेत्र में टंट्या भील मामा और राबिनहुड के नाम से लोकप्रिय रहे हैं. आजादी के लिए बिरसा मुंडा की भांति मामा टंट्या ने भी अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया था और आदिवासी समुदाय की अस्मिता, सम्मान और देश के लिए संघर्ष किया था. पातालपानी उनका कार्यक्षेत्र था, वो शोषण करने वालों के खिलाफ लड़ते थे. उनके बलिदान दिवस चार दिसंबर पर उनकी जन्मभूमि, कर्मभूमि पातालपानी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बड़े आयोजन की तैयारी में हैं. इस मौके पर शिवराज जन्म स्थली तहसील मानपुर का नामकरण टंट्या मामा की घोषणा कर फिर आदिवासियों का दिल जीतने के प्रयास में हैं.

जयस की तैयारियों पर पानी

इधर आदिवासी समुदाय के बीच सक्रिय जयस आदिवासी समागम को लेकर पहले से ही तैयारियां कर रहा था. यह आयोजन उसकी प्रतिष्ठा के साथ अस्तित्व का भी सवाल बना हुआ है. कहा यह जा रहा है कि जयस के इस आयोजन की खबर जैसे ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लगी, तो उन्होंने टंट्या मामा की जन्मस्थली जाने का एलान कर दिया. कोई शक नहीं कि जयस को अहसास होने लगा था कि भाजपा के जनजातीय गौरव दिवस की सफलता से कहीं आदिवासी उनके हाथों से निकल न जाएं. यही वजह है कि वह आदिवासियों के स्थानीय जननायक टंट्या मामा की जन्मस्थली पर बड़ा आयोजन करके अपनी ताकत फिर दिखाना चाह रहा था, लेकिन शिवराज ने उनकी तैयारियों पर पानी फेर दिया है.

700 करोड़ खर्चने के बाद भी प्रसूताओं की मौत क्यों?

निमाड़ में चिकित्सा सुविधाओं का आधार खंडवा मेडिकल कॉलेज और जिला चिकित्सालय अब खून के आंसू रो रहा है. 5 साल में 700 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद यहां लेडी बटलर प्रसूता चिकित्सालय में प्रसूताओं और नवजातों की जिंदगी सुरक्षित नहीं रह गई है. डॉक्टर और नर्सों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है. कई नर्सें तो बिना टिप के काम ही नहीं करतीं. परिस्थितियां बिल्कुल विपरीत हैं. मेडिकल कॉलेज होने के कारण डॉक्टरों की संख्या अचानक बढ़ गई. जिला चिकित्सालय में यह इमानदारी से काम करें तो स्थिति बदल सकती है. करोड़ों रुपए की मशीनें तालों में बंद पड़ी हैं. गरीबों का उपचार नहीं हो पा रहा है.

कई गरीबों को तो अपने दुधारू जानवर तक बेच कर निजी चिकित्सालयों की शरण लेनी पड़ रही है. लेडी बटलर अंग्रेजों के जमाने का भवन है. खंडवा जिले की आबादी 30 हजार थी. उस नक्शे पर यह बनाया गया था. आज 10 लाख से भी अधिक की आबादी है. ऐसे में मेडिकल कॉलेज भी होने के कारण निमाड़ और भुवाना के मरीज यहां आते हैं. क्षमता से 3 गुना प्रसूताएं दाखिल करना मजबूरी हो जाती है. प्रसूताओं को जमीन पर लेट आना भी मजबूरी हो गई है. जिले के जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य सुविधाएं पुख्ता करने के लिए जी तोड़ मेहनत की. पैसा भी आया. भवन भी बने. मशीनें भी आईं.  परंतु सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को इमानदारी से गरीबों के उपचार में रम जाना चाहिए. कुछ चिकित्सक ऐसा कर भी रहे हैं, लेकिन अधिकांश केवल कॉलेज में पढ़ा कर निजी प्रैक्टिस करने निकल जाते हैं. इन परिस्थितियों में सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को कौन देखेगा? गरीबों का उपचार कौन करेगा? इस तरह के कई सवाल उठ रहे हैं!

नव भारत न्यूज

Next Post

डिजिआना ग्रुप और कौटिल्य_अकादमी पर आयकर का छापा

Thu Nov 25 , 2021
मीडिया घराने पर कार्यवाही नवभारत न्यूज भोपाल, 25 नवंबर. डिजिआना ग्रुप और कौटिल्य_अकादमी पर आयकर का छापा। जांच जारी। विभाग ने सुबह करीब 6 बजे कौटिल्य अकादमी और केबल और मीडिया समूह डिज़ियाना के भोपाल और इंदौर ठिकानों पर दबिश दी।