ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित हुई

महिला डॉक्टर को क्यों नहीं दिया योद्धा का दर्जा

जबलपुर:  कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को उपचार करते हुए महिला डॉक्टर के संक्रमित होने के कारण हुई मौत के बाद भी उनके परिवार को कोविड योद्धा कल्याण योजना का लाभ न दिये जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस आरव्ही मलिमथ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगल पीठ ने मामले में अनावेदको को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। हाईकोर्ट में यह मामला भोपाल निवासी नीलेश माडवगडे की ओर से दायर किया गया है,जिसमें कहा गया है कि उनकी पत्नी भारती मांझी रायसेन के सिलवानी
में आयुष अधिकारी के पद पर पदस्थ थी।

कोरोना संक्रमण के उपचार एव रोकथाम के लिए उनकी डयूटी आईसोलेशन वार्ड में लगाई गयी थी। डयूटी के दौरान 1 मई 2021 को सांस लेने में दिक्कत हुई और जांच में पाया गया कि उसका एसपीओ-टू का स्तर कम था। जिसे उपचार के रिफर कर दिया गया और अगले दिन उनकी मौत हो गयी। याचिका में कहा गया था कि उपचार के दौरान की गयी जांच से स्पष्ट है कि उसकी पत्नी की मौत कोरोना वायरस से हुई है। उसका अंतिम संस्कार भी कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया था।

उपचार के लिए आर पी टी सी आर टेस्ट नहीं करवाये जाने के कारण सरकार उसे कोरोना योद्धा मानने से इंकार कर रही है। जबकि ब्लॉक चिकित्सक अधिकारी ने लिखित में इस बात का उल्लेख किया है कि जल्दी में रिफर किये जाने के कारण उनका आरपीटीसीआर टेस्ट नहीं कराया गया था। याचिका में केन्द्र व प्रदेश सरकार, संचालक मेडिकल ऐजुकेशन, जिला आयुष अधिकारी को अनावेदक बनाया गया था। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई
दिसम्बर माह के पहले सप्ताह में निर्धारित की है।

नव भारत न्यूज

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