बिना परमिट सड़कों पर कैसे भाग रहें अवैध ऑटो

हाईकोर्ट ने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को लगाई जमकर फटकार

जबलपुर: ऑटो रिक्शा चालकों द्वारा सड़कों में धमा चौकड़ी मचाने तथा यातायात नियमों का पालन नहीं करने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विजय शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष ट्रांसपोर्ट कमीश्नर वीडियों कांफ्रेसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। युगलपीठ ने बिना परमीट चल रहे ऑटो पर नराजगी व्यक्त करते हुए ट्रॉसपोर्ट कमीश्नर को जमकर फटकार लगाई। युगलपीठ ने तल्ख शब्दों में कहा कि पुलिस व ट्रांसपोर्ट विभाग कार्यवाही नहीं कर सकते तो न्यायालय किसी दूसरी एजेन्सी को नियुक्त कर दें।

उल्लेखनीय है कि यह जनहित का मामला सतना बिल्डिंग निवासी अधिवक्ता सतीश वर्मा और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर किया गया था। जिसमें कहा गया था कि शहर की सड़कों पर बेखौफ होकर चलने वाले ऑटो लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। ऐसे ऑटो न सिर्फ शहर की यातायात व्यवस्था चौपट करते हैं, बल्कि इस हद तक सवारियों को बैठाते हैं कि हमेशा उनकी जान का खतरा बना रहता है। सवारी बैठाने के लिए ऑटो चालक बीच सड़क में कभी भी वाहन रोक देते है। शहर की सड़कों पर धमाचौकड़ी मचाने वाले ऑटो के संचालन को लेकर कई बार सवाल उठे, लेकिन जिला प्रशासन अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कदम उठा पाने में नाकाम रहा है।

याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया था इंदौर में 10 हजार तथा भोपाल में 15 हजार ऑटो बिना परमिट संचालित हो रहे है। ऑटो संचालन के विनिथामक प्रावधान के तहत अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रतिधंटा निर्धारित की गयी है। ऑटो में
व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम अनिर्वाय होगा जो परिवाहन विभाग के सेन्द्रल इंट्रीग्रेशन लिंग होगा। इसके अलावा परमीट, क्षेत्रीय परिवाहन
प्राधिकारियों तथा चालकों के कर्तव्य व आचारण भी निर्धारित किये गये है।

प्रदेश भर में दस साल पुराने ऑटो-डीजल रिक्ष को परमिट जारी नहीं किया जायेगा। ऐसे ऑटो रिक्षा को सीएनजी में प्रतिस्थापित किया जायेगा। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ पिछले आठ सालों में अवैध रूप से संचालित ऑटो रिक्शा पर कार्यवाही नहीं किये जाने पर नाराजगी व्यक्त की गयी। युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करने हुए प्रति सप्ताह कम्पलाईस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये है। युगलपीठ ने प्रत्येक सोमवार को सर्वप्रथम उक्त याचिका को लिस्ट करने के आदेश भी जारी किये है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी तथा अमित पटैल ने पैरवी की।

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