ताई को पद्मभूषण

सियासत

लोक सभा स्पीकर, केंद्रीय मंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव रही सुमित्रा ताई को मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पद्मभूषण पुरस्कार से नवाजा। यह इंदौर के लिए गौरव की बात है। सुमित्रा ताई इंदौर से लगातार आठ बार लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं। किसी महिला सांसद का यह रिकॉर्ड है। उनका राजनीतिक जीवन बेदाग और अनुकरणीय रहा है। बड़े पदों पर रहकर भी उन्होंने खुद को साफ़ रखा है। सुमित्रा ताई का विवाह 1965 में जयंत महाजन एडवोकेट से हुआ था। उनका विवाह करवाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सह प्रांत प्रचारक बाबा साहब नातू का योगदान था।

बाबा साहब नातू सुमित्रा ताई के पिता को जानते थे। सुमित्रा ताई के पिता कोंकण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघ चालक थे। ताई भी प्रारंभ में राष्ट्रीय सेविका समिति से जुड़ी रहीं हैं। वे राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से रामायण और महाभारत पर प्रवचन करती थी। धार्मिक स्वभाव की ताई नाना महाराज तरनेकर संस्थान से भी जुड़ी हैं। 1983 में जब इंदौर में भाजपा की निगम परिषद बनी और राजेंद्र धारकर महापौर बने तो उन्होंने ताई को एल्डरमैन बनाया। अगले वर्ष ताई इंदौर की उपमहापौर मनोनीत हुई। 1985 में उन्हें विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 3 से टिकट दिया गया, जहां उन्होंने महेश जोशी को कड़ी टक्कर दी।

उनके भाषण पूरे चुनाव के दौरान चर्चित रहे। ताई के चुनाव की खूब चर्चा रही। वो चुनाव पराजित होने के बावजूद भाजपा में उनकी लोकप्रियता बढ़ी। 1989 में संभागीय संगठन मंत्री कृष्ण मुरारी मोघे, स्वर्गीय निर्भय सिंह पटेल और स्वर्गीय नारायण राव धर्म की मदद से उन्हें लोकसभा का टिकट मिला। अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने दिग्गज नेता प्रकाश चंद्र सेठी को हराया। उसके बाद तो उन्होंने ललित जैन, रामेश्वर पटेल, महेश जोशी, पंकज संघवी और सत्यनारायण पटेल जैसे नेताओं को शिकस्त दी। स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के मंत्रिमंडल में सुमित्रा ताई राज्यमंत्री थी। वे भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव भी रही हैं। इस दौरान उन्हें गुजरात का प्रभारी बनाया गया था। इस कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके पुराने संबंध हैं। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें लोकसभा अध्यक्ष बनाया। लोकसभा अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल याद किया जाता है उन्होंने सभी को साथ में लेकर चलने की कोशिश की।

सोनिया गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं से उनके निजी संबंध बन गए थे। शांत स्वभाव की ताई अपने पूरे राजनीतिक जीवन में एखाद बार ही विवादों में पड़ी होंगी। इंदौर की रेलवे कनेक्टिविटी और विमान सुविधाएं बढ़ाने में ताई का बड़ा योगदान है। इसी तरह इंदौर का बाईपास और रिंग रोड भी ताई की देन है। उन्होंने इंदौर में अहिल्या उत्सव की शुरुआत की। जिससे शहर को अलग ही सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान मिली। ताई की प्रेरणा से अनेक सामाजिक संस्थाओं का गठन हुआ है। उन्हें पद्मभूषण मिलना इंदौर के लिए गौरव की बात है। महामहिम राष्ट्रपति ने कल प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी नेमिनाथ जैन और कथक गुरु पुरू दाधिच को पद्मश्री पुरस्कार दिया है। इंदौर की तीन हस्तियों को पदम पुरस्कार मिलना भी गौरव की बात है।

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