67 वर्ष की हुयी अनुराधा पौडवाल

मुंबई, 27 अक्टूबर (वार्ता) बॉलीवुड की जानी-मानी पार्श्वगायिका अनुराध पौडवाल आज 67 वर्ष की हो गयी।

अनुराधा पौडवाल का जन्म 27 अक्तूबर 1954 को हुआ। बचपन से ही उनका रुझान संगीत की ओर था और वह गायिका बनने का सपना देखा करती थी। अपने सपनों को साकार करने के लिए उन्होंने बॉलीवुड की ओर रुख किया। आरंभिक दिनों में उन्हें हालांकि काफी संघर्ष करना पड़ा। अनुराधा पौडवाल ने वर्ष 1973 में प्रदर्शित फिल्म ‘अभिमान’ से अपने सिने कैरियर की शुरूआत की। अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में उन्हें मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन के निर्देशन में एक संस्कृत का श्लोक गाने का अवसर मिला, जिससे अमिताभ बच्चन काफी प्रभावित हुये। वर्ष 1974 में अनुराधा पौडवाल को मराठी फिल्म यशोदा में भी पार्श्वगायन करने का अवसर मिला।

वर्ष 1976 में प्रदर्शित फिल्म कालीचरण में अनुराधा पौडवाल आवाज में गाया गीत एक बटा दो दो बटा चार उन दिनों बच्चों में काफी लोकप्रिय हुआ था। इस बीच अनुराधा ने आपबीती, उधार का सिंदूर, आदमी सड़क का, मैने जीना सीख लिया जाने मन और दूरियां जैसी बी और सी ग्रेड वाली फिल्मों में पार्श्वगायन किया, लेकिन इन फिल्मों से उन्हें कोई खास फायदा नहीं पहुंचा।

करीब सात वर्ष तक मायानगरी मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1980 में जैकी श्राफ और मीनाक्षी शेषाद्री अभिनीत फिल्म हीरो में लक्ष्मीकांत प्यारे लाल के संगीत निर्देशन में तू मेरा जानू है, तू मेरा दिलवर है की सफलता के बाद अनुराधा पौडवाल बतौर गायिका फिल्म इंडस्ट्री में कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गयी। वर्ष 1986 में प्रदर्शित फिल्म उत्सव बतौर गायिका अनुराधा पौडवाल के कैरियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुयी। शशि कपूर के बैनर तले बनी इस फिल्म में अनुराधा पौडवाल को लक्ष्मीकांत-प्यारे लाल के संगीत निर्देशन में मेरे मन बजा मृदंग गीत गाने का अवसर मिला जिसके लिये वह सर्वश्रेष्ठ गायिका के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित की गयी।

अनुराधा पौडवाल की किस्मत का सितारा वर्ष 1990 में प्रदर्शित फिल्म आशिकी से चमका। बेहतरीन गीत-संगीत से सजी इस फिल्म की जबरदस्त कामयाबी ने न सिर्फ अभिनेता राहुल राय, गीतकार समीर और संगीतकार नदीम-श्रवण और गायक कुमार शानू को शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया बल्कि अनुराधा पौडवाल को भी फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया। फिल्म के सदाबहार गीत आज भी दर्शकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

नदीम-श्रवण के संगीत निर्देशन में अनुराधा पौडवाल की आवाज में रचा बसा गीत सांसो की जरूरत हो जैसे ,नजर के सामने जिगर के पार,अब तेरे बिन जी लेंगे हम,धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना,मैं दुनिया भूला दूंगा तेरी चाहत में और मेरा दिल तेरे लिये धड़कता है श्रोताओं में काफी लोकप्रिय हुये। उनकी आवाज ने फिल्म को सुपरहिट बनाने में अहम भूमिका निभायी। फिल्म में अनुराधा पौडवाल को नजर के सामने जिगर के पार गीत के लिये सर्वश्रेष्ठ गायिका का फिल्म फेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ।

आशिकी की सफलता के बाद अनुराधा पौडवाल को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गये। इनमें बागी,बहार आने तक,कुर्बान,साजन,साथी,फूल और कांटे तथा सड़क जैसी बड़े बजट की फिल्में शामिल थी। इन फिल्मों की सफलता के बाद अनुराधा पौडवाल ने सफलता की नयी बुलंदियों को छुआ और एक से बढकऱ एक गीत गाकर श्रोताओं को मंत्रमुंग्ध कर दिया।90 के दशक में अनुराधा पौडवाल ने निश्चय किया कि वह केवल टी.सीरीज द्वारा जारी भक्ति भावना से प्रेरित फिल्मों या अलबम के लिये ही पार्श्वगायन करेगी। इस क्रम में उन्होंने टी.सीरीज द्वारा जारी कई अलबमों के लिये पार्श्वगायन किया।

अनुराधा पौडवाल फिल्म इंडस्ट्री की पहली गायिका बनी जिन्हें कैसेट के कवर पर फिल्म अभिनेता या अभिनेत्रियों की तुलना में अधिक प्रमुखता के साथ दिखाया गया। अनुराधा पौडवाल को चार बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 1989 में प्रदर्शित मराठी फिल्म कलट नकलट के लिये वह सर्वश्रेष्ठ पाश्र्वगायिका के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित की गयी। उन्‍हें वर्ष 2017 में पद्मश्री से भी सम्‍मानित किया गया।अनुराधा पौडवाल ने अपने पांच दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 350 फिल्मी/ गैर फिल्मी एलबम को अपनी आवाज दी ।अनुराधा पौडवाल आज भी अपनी मधुर आवाज से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रही है।

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