विद्युत उत्पादन इकाई 4महीने में दूसरी बार बंद

जबलपुर:कोयला भंडार पर्याप्त है। फिर भी power crisis in MP, ऐसा क्या है, इसकी पड़ताल करने पर पता चलता है कि एक विद्युत उत्पादन इकाई को चार महीने में दूसरी बार बंद करना पड़ा है। वो भी मरम्मत के लिए। इस पर जानकार सवाल खड़ा कर रहे हैं। उनका कहना है कि 10 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर दो महीने तक मरम्मत के बाद पिछले माह ही शुरू हुआ उत्पादन फिर से अचानक क्यों बंद करना पड़ा?

ये संजय गांधी ताप विद्युत गृह का हाल है। ये 500 मेगावाट की पांच नंबर इकाई 19 जुलाई को मरम्मत के लिए बंद की गई थी दो महीने के बाद इसे 18 सितंबर को चालू किया गया। हालांकि शुरूआती दौर में इस उत्पादन इकाई को कम लोड पर ही चलाया गया। बताया जा रहा है कि जैसे ही लोड बढ़ा इसके व्वायलर में कंपन होने लगा। अब ब्वायलर में कंपन से विशेषज्ञ चिंतित हैं। उनका कहना है कि ऐसे में तो बड़ा हादसा भी हो सकता है। लिहाजा इस विद्युत उत्पदन इकाई को दोबारा बंद कर दिया गया है। चीफ इंजीनियर हेमंत संकुले का कहना है कि ने500 मेगावाट की पांच नंबर इकाई में मरम्मत का कुछ काम किया जाना है लिहाजा इसे बंद करना पड़ा है। उधर 210 मेगावाट की एक नंबर इकाई भी मरम्मत के चलते बंद है। ऐसे में बिजली संकट गहरा चला है।

चीफ इंजीनियर उत्पादन इकाइयों को बंद करने को लेकर लग रही कोयला किल्लत की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और कोयले की आपूर्ति लगातार हो रही है। लेकिन उधर 600 मेगावट क्षमता वाली श्रीसिंगाजी ताप गृह की एक इकाई भी बंद की गई है। यहां फिलहाल 2520 मेगावाट की जगह महज 716 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। ऐसे में बिजली संकट गहरा गया है

नव भारत न्यूज

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