आजादी के 74 साल भी रतनगंवा में नहीं है सड़क एवं पुल, बिजली खंभे के सहारे निकलते हैं ग्रामीण

पन्ना : प्रदेश एवं जिले के नेता एवं जनप्रतिनिधि अपने लच्छेदार भाषणों में जिले को स्वर्ग बनाने की हुंकार भरते हैं और विकास के मसीहा बनते हैं लेकिन यह कैसा विकास जहां किसी भी ग्राम के लिए सड़क बिजली पानी एक मूलभूत समस्या होती है शेष विकास बाद की बात होती है पन्ना विधानसभा के अंतर्गत ग्राम पंचायत गुखौर कें अंतर्गत आने वाला ग्राम रतनगंवा एक ऐसा ग्राम हैं जहां सड़़क एवं पुल न होने के कारण भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं वर्षा ऋतु में तो आवागमन लगभग ठप्प हो जाता है

वहीं ग्रामीणों ने अस्थाई तौर पर बिजली के खंभे रखकर अपने निकलने का अस्थाई व्यवस्था की है। 170 मतदाता और लगभग 400 की आबादी वाले इस गांव तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों द्वारा देसी जुगाड के रूप में चार बिजली के खंभों को नदी में आर पार रखकर आवागमन का साधन बनाया गया है, जहां से पैदल तो किसी तरह नहीं को पार कर लेते हैं पर साइकिल और मोटर साइकिल पार करना मुसीबत मोल लेने के समान है। गांव के लोग तो किसी तरह काम चला लेते हैं पर बाहरी लोग नदी किनारे खडे होकर मोटरसायकिल से नदी पार करने के बारे में सोच कर ही घबरा जाते हैं।

आंगनवाड़ी एवं विद्यालय के शिक्षक कभी कभार आते हैंः- इस संबंध में जब स्थानीय लोगों से संपर्क किया गया तो पता चला कि लगभग 3 वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्माण स्वीकृत हुआ था, जिसकी मिट्टी मात्र डाली गई है, अभी पुल का निर्माण नहीं किया गया। गत माह वैक्सीनेशन महा अभियान के तहत जब यहां वैक्सीनेशन टीम पहुंची तो दुर्गम रास्तों और पुल विहीन नदी को बिजली खंभों के सहारे पार करने में टीम के सदस्यों के पसीने छूट गए। ग्रामीणें ने बताया कि गांव में प्राथमिक शाला और मिनी आंगनबाडी केंद्र है, जहां कभी कभार ही शिक्षकों का आना जाना होता है जो बारिश के दिनों में पूरी तरह बंद हो जाता है।

बारिश के दिनों में बंद हो जाता है आवागमनः- स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी समस्या की जानकारी देते हुए बताया कि हमारे गांव में आजादी के 74 वर्षाे बाद भी पक्की सडक तो दूर कच्चा रास्ता भी नसीब नहीं हो सका, जिसके चलते हम लोग तमाम परेशानियों को सहते हुए आवागमन करते पर नदी में पुल नहीं होने से इसे पार करना काफी मुश्किल था जो बिजली के खंभे रखकर किसी तरह काम चला रहे हैं जहां कई लोग गिर कर घायल भी हो चुके हैं। बारिश के दिनों में यदि कोई व्यक्ति बीमार होता है। तो उसे अस्पताल पहुंचाना मुश्किल होता है। इसके अलावा ग्रामीणों को खाद, बीज,राशन एवं जरूररत की अन्य सामग्री लाने से जाने में समस्या होती है।

लोग सडक और पुल नहीं होने से इस गांव रिश्ते करने में भी आनाकानी करते हैं। जिसके कारण ग्रामीण परेशान हैं और लगातार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी समस्या रखकर सडक और पुलिस निर्माण की मांग करते आ रहे हैं समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने जले वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शीघ्र सडक और पुल निर्माण की मांग की है।

ग्राम पंचायत सिलधरा का मजरा दउन टोला मूलभूत सुविधाओं से बंचितः- केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रो का विकास करने एवं बिजली, सडक, पानी, शिक्षा सहित अन्य मूल भूत सुविधाए मजरा टोला मे पहुचाने के लिए लगातार योजनाए बनाकर चलाई जा रही है। तथा ग्राम पंचायतो को करोडो का बजट स्वीकृत किया जाता है। कि किसी भी ग्राम मजरा टोला मे मूल भूत सुविधाए आवश्यक रूप से विकसित की जाये लेकिन योजनओं का संचालन करने वाले जिम्मेवार सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, उपयंत्रीयों द्वारा कागजो पर विकास तथा निर्माण कार्य दिखाकर शासन की योजनाओं को भ्रष्टाचार की भेटं चढा दिया जाता है।

इसी प्रकार का मामला ग्राम पंचायत सिलधरा जनपद पंचायत पन्ना के अन्तर्गत मजरा दउन टोला का प्रकाश मे आया है उक्त मजरा पहुचने के लिए 74 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज दिनांक तक लोगो को ग्राम से मुख्य सडक पहुचने के लिए रास्ता नही है और न ही सडक का निर्माण किया गया जिससे वर्षात के समय मे यदि ग्राम का कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो उसे चारपाई पर ले जाया जाता है क्योंकि कोई भी वाहन मजरा टोला तक नही पहुच सकता। इस संबंध मे स्थानीय लोगो ने अनेको बार ग्राम पंचायत के जिम्मेवारो तथा जनपद पंचायत के अधिकारियों को आवेदन देकर सडक निर्माण कराये जाने की मांग की गई उसके बावजूद सडक नही बनाई गई। स्थानीय निवासी राजेन्द्र सिंह द्वारा सीएम हेल्प लाईन मे भी समस्या का संबंध मे शिकायत दर्ज कराई गई थी। तो जिम्मेवारो द्वारा झूठी जानकारी भेज दी गई की सडक का निर्माण कर दिया गया है जबकी वर्तमान मे वहीं स्थिति कायम है।

नव भारत न्यूज

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