ऑनलाइन कक्षाओं से बच्चों की आंखे हो रही खराब


ÓÓलव योर आइजÓÓ थीम पर मनाया विश्व दृष्टि दिवस
नवभारत न्यूज
भोपाल, 14 अक्टूबर. जब से कोरोना संक्रमण का प्रकोप शुरू हुअ भारत ही नहीं पूरे विश्व में ऑनलाइन क्लासेस का चलन शुरू हो गया है. छोटे-छोटे बच्चे भी दिन में चार से पांच घंटे मोबाइल पर रहते हैं. लगातार मोबाइल, लैपटॉप की स्क्रीन देखने से आंखों में ड्रायनेस भी बढ़ रही है. हमीदिया के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित श्रीवास्तव का कहना है कि, पिछले एक साल में सबसे ज्यादा बच्चे आंखो की परेशानी लेकर अस्पताल पहुंचे हैं. अक्टूबर माह के दूसरे गुरुवार को विश्व दृष्टि दिवस के रूप में मनाया जाता है. एम्स भोपाल में विश्व दृष्टि दिवस पर ÓÓलव योर आइजÓÓ थीम के पर जागरूता कार्यक्रम हुआ. साथ ही आंखो के मरीजों का रजिस्टे्रश्न फ्री किया गया.
फिजिसल वर्क कम होने से भी आंखो पर असर
एम्स डायरेक्टर डॉ. सरमन सिंह ने बताया कि विश्व भर में कम से कम 1 बिलियन लोग निकट या दूर दृष्टि दोष से पिडि़त हैं और इसे रोका जा सकता है. दृष्टि हानि सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करती है, जिनमें से अधिकांश 50 वर्ष से अधिक आयु के हैं, जबकि स्कूल जाने वाले आयु-समूह ऑनलाइन कक्षाओं तथा विशेष रूप से कोविड महामारी के कारण बाहरी खेलकूद गतिविधियों में आई कमी के कारण तेजी से इसकी पकड़ में आ रहे हैं. दृष्टि हानि और अंधापन जीवन के सभी पहलुओं पर प्रमुख और दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है, जिसमें दैनिक व्यक्तिगत गतिविधियां, समुदाय के साथ बातचीत, स्कूल और काम के अवसर और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंचने की क्षमता शामिल है.
एम्स में विश्व स्तरीय नेत्र सेवाएं
कार्यक्रम में जानकारी देते हुए एम्स के डायरेक्टर ने बताया कि एम्स, भोपाल का नेत्र विज्ञान विभाग, नेत्र देखभाल के सुपर स्पेशियलिटी क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है. जहां हम अपने समाज को विश्व स्तरीय नेत्र देखभाल सेवाएं प्रदान करने के लिए अपने संकाय सदस्यों के मध्य सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा के समायोजन, रेजिडेंट चिकित्सकों के लिए कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रम, अत्याधुनिक उपकरणों और मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर का उपयोग करते हैं. हम ऐसी सुपर-स्पेशियलिटी नेत्र देखभाल सेवाएं प्रदान करने का इरादा रखते हैं, जो न केवल सस्ती हों बल्कि समाज के सभी वर्गों के रोगियों के लिए भी सुलभ भी हों. हमने अंधेपन एवं दृष्टि हानि (एनपीसीबी और वीआई) के नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत् निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त क रने की दिशा में निरंतर काम किया है. तथा इसके परिणामस्वरूप यहां एक ऐसा केंद्र स्थापित किया गया है जहां मोतियाबिंद, बचपन के नेत्र रोग, ट्रॉमा, समय पूर्व रेटिनोपैथी (आरओपी), डायबिटिक रेटिनोपैथी, जटिल रेटिनल विकार आदि से संबंधित नेत्र रोगों का उपचार किया जाता है.

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