प्रियंका – राहुल की आक्रामकता से कांग्रेसियों में जागी उम्मीद

दिल्ली डायरी 
प्रवेश कुमार मिश्र 
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसानों की नृशंस हत्या पर आरंभ हुई राजनीति में कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी व राहुल गांधी के नेतृत्व में किसानों के साथ खड़ी होकर एकबार फिर से योगी आदित्यनाथ की सरकार को बैकफुट पर आने को मजबूर कर दिया है. घटना के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने आक्रामकता के साथ जिस तरह से राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला उसको लेकर सत्ताधारी दलों के अलावा संपूर्ण विपक्ष में चर्चा होती रही. पुलिस प्रशासन से संघर्ष लेकर जेल में किए गए सत्याग्रह तक सुर्खियों में रहा. इतना ही नहीं राहुल गांधी ने भी सख्त रूख के साथ जिस तरह प्रशासन को झुकने को मजबूर किया उसको लेकर कांग्रेस के अंदर और बाहर चर्चा रही। राहुल-प्रियंका के इस प्रयास जहां एक ओर पीड़ित परिवार के बीच न्याय की उम्मीद जगी वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी नेताओं के अंदर भी उम्मीद जगी.
किंकर्तव्यविमूढ हुए ग्रुप 23 के कांग्रेसी नेता 
प्रियंका गांधी व राहुल गांधी के सख्त रूख से उत्तर प्रदेश की राजनीति में अचानक आए बदलाव और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की बढ़ती उमंग से कांग्रेस के ग्रुप 23 के सदस्यों के अंदर बेचैनी बढ़ गई है. ग्रुप 23 के नेताओं के मुख्य सवाल को राहुल-प्रियंका की जोड़ी ने अपने कार्यकलाप के सहारे जिस खूबसूरती से कुंद किया है उसके कारण इन दिनों ग्रुप 23 के नेता किंकर्तव्यविमूढ हो गए हैं. आम कार्यकर्ताओं की ओर से अब उनसे सवाल किया जाने लगा है कि वे कब सत्ताधारी दल के कथित निरंकुशता के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे.
बिहार में बिखर गया महागठबंधन और राजद परिवार
बिहार में दो विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में राजद पर गठबंधन धर्म का अनुसरण नहीं करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी ने दोनों सीट पर अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया है. इतना ही नहीं राजद परिवार में भी फूट पड़ गई है . राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटो के बीच जारी शीतयुद्ध अब आमने सामने की लड़ाई का रूप धारण कर लिया है. लालू के बड़े बेट तेजप्रताप ने अपनी ओर से दो उम्मीदवार मैदान में उतार दिए है. जिसके कारण उपचुनाव रोचक हो गया है. हालांकि महागठबंधन के भविष्य को लेकर अभी भी राजद व कांग्रेस के रणनीतिकार उम्मीद पाले हुए हैं .
लखीमपुर खीरी की घटना की आंच से भाजपाई परेशान 
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के कुछ माह पूर्व किसानों पर हुए अत्याचार के आरोप से घिरी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के साथ-साथ भाजपाई रणनीतिकार भी बेचैन हैं. अभी तक सख्त कार्रवाई करने का दावा करने वाली राज्य सरकार द्वारा भाजपा के सांसद पुत्र के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी कई सवाल को जन्म दे दिया है. कुछ लोग कह रहे हैं कि इस घटना की कथित सच्चाई सामने आने के बाद भी केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री का इस्तीफा नहीं लेना भी भाजपा की आंतरिक रस्साकशी का परिणाम है. इतना ही नहीं कुछ लोग इसे मोदी बनाम योगी के बीच चल रहे शीतयुद्ध का परिणाम बता रहे हैं तो कुछ लोग एक खास जाति के वोट के संभावित बिखराव को रोकने का प्रयास बता रहे हैं. लेकिन जो भी है इस घटना ने योगी सरकार पर एक कलंक का धब्बा लगा दिया है जिसके कारण आम भाजपाई परेशान दिख रहे हैं.
ममता को विपक्ष का राष्ट्रीय चेहरा बनाने में जुटे हैं पीके 
पिछले कुछ दिनों से चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य को लेकर खुब चर्चा रही है. कभी खबर आई की पीके ने कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की हैं और वे जल्द कांग्रेस पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं. कभी खबर आई कि पीके आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी के साथ अपना भविष्य ढूंढ रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच पिछले दिनों खबर आई कि पीके पश्चिम बंगाल के किसी शहर से वोटर बन गए हैं और वे ममता बनर्जी के आशीर्वाद से राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं. कहा जा रहा है कि पीके ने ममता बनर्जी को विपक्ष का राष्ट्रीय चेहरा बनाने की रणनीति बनाई है और इसके लिए ममता ने उन्हें राज्यसभा भेजने का वादा किया है.

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