जैव विविधता के संरक्षण के लिए अनुसंधान करें वैज्ञानिक: नायडू

नयी दिल्ली, 07 अक्टूबर (वार्ता) उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने वैज्ञानिकों से पूर्वोत्तर क्षेत्र के जैव-संसाधनों और पशुधन की रक्षा और संरक्षण के लिए अनुसंधान करने का आह्वान करते हुए कहा है कि यह टिकाऊ, जलवायु के अनुकूल और सांस्कृतिक रूप से क्षेत्र की जनजातीय संस्कृतियों के साथ तालमेल के अनुरूप हाेना चाहिए।

श्री नायडू ने बृहस्पतिवार को नागालैंड में दीमापुर के राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के परिसर का दौरा किया और कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों को स्थान विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए काम करना चाहिए जो टिकाऊ, जलवायु के अनुकूल और सांस्कृतिक रूप से क्षेत्र की जनजातीय संस्कृतियों के साथ तालमेल बिठा सकें। उन्होंने वैज्ञानिकों से पूर्वोत्तर की प्रगति और समृद्धि के लिए नवीनतम तकनीकों को अपनाने के साथ कृषि के आधुनिकीकरण की दिशा में काम करने का आग्रह किया।

 

श्री नायडू ने कहा कि यह पशु नागालैंड के लोगों के लिए आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से अत्यधिक महत्व रखता है इसलिए शिक्षित युवाओं को पशु के संरक्षण की ओर आकर्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी प्रगति को अपनाकर डेयरी को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।

 

इस अवसर पर नागालैंड और असम के राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी, नागालैंड के उप मुख्यमंत्री वाई. पैटन,नागालैंड के कृषि मंत्री जी. कैतो ऐ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

नव भारत न्यूज

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