विद्यार्थियों के मुंह से मास्क गायब, सोशल डिस्टेंसिंग नहीं


स्कूलों में नहीं हो रहा कोरोना नियमों का पालन
नवभारत न्यूज
बैतूल, 26 सितंबर. जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई कोरोना गाईड लाईन कागजों तक सिमटकर रह गई है. जिले में कोरोना संक्रमित मरीज मिलना बंद हुए वैसे ही 50 प्रतिशत क्षमता के साथ स्कूल खुल गए है, लेकिन स्कूलों में कोरोना गाईड लाईन की धज्जियां उड़ रही है.
इसी तरह लापरवाही बरती गई तो कोरोना संक्रमण फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता है. विद्यार्थियों को सोशल डिस्टेसिंग के साथ नहीं बैठाया जा रहा है. अधिकतर स्कूलों में विद्यार्थियों के मुंह से मास्क भी गायब है. शिक्षक इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे है. पिछले कुछ दिनों से शासन के निर्देश अनुसार हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी 50 प्रतिशत क्षमता के साथ कक्षाएं लगना शुरू हुई. शासन के निर्देश है कि कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए विद्यार्थियों को कक्षा में सोशल डिस्टेसिंग के साथ बैठाया जाए और विद्यार्थियों को मास्क लगाना अनिवार्य है, लेकिन कई स्कूल ऐसे है जहां कोरोना गाईड लाईन का पालन बिल्कुल भी नहीं हो पा रहा है. शिक्षक भी ध्यान नहीं दे रहे है. शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खंडारा में कक्षा 11 वीं के कक्ष हाल में पूरी क्षमता के साथ विद्यार्थियों को बैठाया गया था. हद तो तब हो गई जब एक डेस्क पर तीन-तीन विद्यार्थियों पर बैठते है. अधिकतर विद्यार्थियों के चेहरे से मास्क गायब थे. जब इस संबंध में शिक्षकों से चर्चा की तो शिक्षक कुछ उचित जवाब देने पर बचते रहे.
सेनेटाइजर और हाथ धुलाई की व्यवस्था नहीं – शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्कूलों में विद्यार्थियों की हाथ धुलाई के लिए पानी और साबून और सेनेटाईजर की व्यवस्था किए जाने दावा किया जा रहा है. जहां कुछ ऐसे भी स्कूल है जहां न तो सेनेटाईजर और न ही हाथ धुलने की साबून की व्यवस्था की है. विद्यार्थी बिना हाथ धुले ही कक्ष में प्रवेश करते है. यह लापरवाही भारी पड़ सकती है. ऐसे ही हालात रहे तो स्कूलों में कोरोना संक्रमण फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता है. वर्तमान में वायरल फीवर बीमारी ने भी पांव पसारकर रखे है. सोशल डिस्टेसिंग के साथ नहीं बैठाया गया तो संक्रमण एक बच्चे से दूसरे बच्चे में फैलने का खतरा बना रहता है. उच्च अधिकारियों द्वारा भी व्यवस्थाओं को लेकर स्कूलों में पहुंचकर यथा स्थिति को नहीं देखा जा रहा है. खास तौर पर ग्रामीण स्कूलों के हालात बद से बदत्तर नजर आ रहे है. यहां तक देखने में आया कि कई शिक्षक तक मास्क लगाने में परहेज करते है.
स्कूलों में बढऩे लगी विद्यार्थियों की संख्या – स्कूल खुलने के बाद विद्यार्थियों की संख्या भी धीरे-धीरे बढऩे लगी है. विद्यार्थियों को परिजन स्कूल जाने के लिये लिखित अनुमति देने लगे है. हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी में विद्यार्थियों की संख्या में पहले की अपेक्षा इजाफा हुआ है. हालांकि अभी भी मिडिल और प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम है. वायरल फीवर बीमारी के चलते प्राथमिक और मिडिल स्कूल में पालन विद्यार्थियों को स्कूल भेजने से परहेज करने लगे है. स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ ऑनलाईन भी पढ़ाई जारी है, ताकि जो विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंच रहे है उन्हें ऑनलाईन ही पढ़ाई करवाई जा रही है.

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