विजयवर्गीय ने कही जनता के मन की बात

सियासत

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय जनता के बीच रहने वाले नेता हैं। वे खुद एक गरीब परिवार से आए हैं इसलिए उन्हें जनता की बुनियादी दिक्कतों के बारे में जानकारी है। उन्होंने मीडिया के समक्ष इंदौर की जलभराव की समस्या का जिक्र किया और कहा कि इसके लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। आखिर नगर निगम, विकास प्राधिकरण और पीडब्ल्यूडी के पास इतने इंजीनियर हैं इसके बावजूद सड़क निर्माण में इतनी तकनीकी गलतियां कैसे हुई। कैलाश विजयवर्गीय यह बताते समय गुस्से में भी थे और उनके चेहरे पर दर्द भी था। श्री विजयवर्गीय का यह कहना सही है कि वास्तव में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होना चाहिए। इस संबंध में देखा गया है कि लीपापोती की जाती है और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती।

माफियाओं के खिलाफ अभियान में भी यह देखा गया है कि माफियाओं की प्रगति अधिकारियों की मिलीभगत के कारण हुई। इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों के खिलाफ तो कार्रवाई हुई लेकिन अतिक्रमण को बढ़ावा देने वाले या अतिक्रमण होने पर आंख मूंदे बैठे अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं होती। जब तक इस मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं होगी तब तक माफियाओं के हौसले बुलंद रहेंगे। इंदौर स्वच्छता में अव्वल है लेकिन इसे अपराध मुक्त भी बनाना पड़ेगा।

तभी यहां की आर्थिक तरक्की को नए आयाम मिलेंगे। इंदौर की समस्याओं के बारे में कैलाश विजयवर्गीय निरंतर मुखर रहे हैं। उन्होंने अपने स्तर पर कई समस्याओं को हल भी किया है। उनके महापौर रहते इंदौर के विकास को पंख लगे थे। उन्होंने जितने भी विकास कार्य किए दूर दृष्टि के साथ किए, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अधिकारियों ने सड़क निर्माण के समय जबरदस्त लापरवाही बरती जिसका खामियाजा पूरे इंदौर को भुगतना पड़ रहा है। बहरहाल, अगले वर्ष यह समस्या ना हो इसकी अभी से तैयारी करनी चाहिए।

मुगालते में ना रहें

स्वच्छता, स्मार्ट सिटी, वॉटर प्लस, वैक्सीनेशन महाभियान सहित कई मामलों में देश में अव्वल रहे इंदौर ने अब वैक्सीन के पहले डोज के बाद दूसरे डोज का टारगेट भी 50 फीसदी पूरा कर लिया है। शनिवार तक इंदौर में वैक्सीनेशन के लिए पात्र 28.86 लाख लोगों में से करीब 50 फीसदी लोगों के दोनों डोज हो चुके हैं। ऐसे में संभव है कि बाकी 50 फीसदी टारगेट भी दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। खास बात यह कि 24 दिन पहले ही इंदौर ने पहले डोज का 100 फीसदी टारगेट पूरा किया था जो 228 दिनों में पूरा हुआ था। यह सही है कि वैक्सीनेशन के मामले में इंदौर ने बेहतरीन काम किया है, लेकिन इस मामले में अति आत्मविश्वास में रहना घातक सिद्ध हो सकता है क्योंकि पॉजिटिव मामले अभी भी आ रहे हैं। खास करके विदेश से आने वाले लोग और भारत के केरल से इंदौर आने वाले लोगों के संदर्भ में अतिरिक्त सतर्कता रखने की आवश्यकता है।

इसी कारण वैक्सीन को लेकर जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम की आदि टीमें पूरी सतर्कता के साथ जुटी हुई हैं।31 अगस्त को इंदौर में पहले डोज का 100 फीसदी टारगेट पूरा किया था तथा देश में 10 लाख की आबादी वाले शहर में अव्वल रहा था। इसके बाद दूसरे डोज पर फोकस किया गया।25 सितंबर तक 38,263 से ज्यादा लोगों को दूसरा डोज लग चुका था। टीकाकरण अधिकारी डॉ. तुरण गुप्ता के मुताबिक वैसे अब तक 28,86,107 को पहला डोज लग चुका है जबकि 14.43 लाख लोगों को दोनों डोज लग चुके हैं। इस तरह करीब 50 फीसदी लोगों को दोनों डोज लग चुके हैं। दरअसल विशेषज्ञों का कहना है कि अब अगर कोरोना संक्रमित होते भी हैं तो लक्षण ए सिम्टोमैटिक रहेंगे।पहले के जैसी क्रिटिकल स्टेज नहीं बनेगी यानी अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ सकती है।फिर भी लंबे समय तक मास्क, सोशल डिस्टेसिंग, सैनिटाइजर सहित कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।

नव भारत न्यूज

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