सरकारी अस्पतालों में अमानक दवाओं पर लगेगी रोक

सॉफटवेयर से जुडेंगे दवा वितरण और ड्रग स्टोर
नवभारत न्यूज
भोपाल, 24 सितंबर. सरकारी अस्पतालों असकर दवाएं नहीं होने या दवाएं खराब होने जैसी खबरे आती रहती है. लागतार आ रही किशायतों

के चलते सरकारी अस्पतालों में अमानक स्तर की दवाओं की खरीदी और वितरण रोकने के लिए स्वास्थ संचनालय द्वारा सॉफ्टवेयर तैयार कि या जा रहा है. अस्पतालों में दवा वितरण केंद्रों तथा ड्रग स्टोर में इस सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा. इसके बाद अस्पतालों में दवा वितरण केंद्रों की सूची में दवा नहीं दिखेगी. जो किसी भी तरह से अमानक या संदिग्ध मानी जा रही है. इसका लाभ यह होगा कि संदिग्ध और अमानक दबाए ना तोखरीदी जा सकेगी और ना ही मरीजों को उनका विवरण हो पाएगा.
सीडेक तैयार कर रहा सॉफ्टवेयर
स्वास्थ्य संचनालय के डिप्टी डायरेक्टर हिमानी यादव के मुताबिक नए सॉफ्टवेयर से व्यावस्थाएं में सुधार आएगा. इस नई व्यवस्था की तैयारी पूरी हो चुकी है. ज्यादातर सरकारी अस्पतालों की दबाए बंटती रहती हैं, इन्हें स्टोर में वापस लेने में महीना लग जाता है. प्रदेश में दवाओं की खरीदी भंडारण वितरण के लिए नया सॉफ्टवेयर लागू किया जाएगा. इसे सी डेक ने तैयार किया है. इस सॉफ्टवेयर में सभी दवा वितरण केंद्र जोड़े जा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी अस्पतालों के दवा वितरण केंद्र के साथ सॉफ्टवेयर से जुडऩे के बाद अमानक दवाओं के वितरण पर पूरी तरह से रोक लगाना संभव होगा. स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रतिवर्ष क रीब 200 करोड़ रुपए की दवाएं खरीदीे की जाती है. विभाग के अस्पतालों में रोजाना 5 लाख मरीजों को दवाओं का नि:शुल्क वितरण किया जाता है. इसके लिए अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या और सुविधाओं के मान से ईडीएल (इमरजेंसी ड्रग्स लिस्ट) तय की गई है.

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